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सोमवार, 11 मई, 2009 को 11:52 GMT तक के समाचार
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विकास के नाम पर वोट मिलेंगे: बंसल

पवन कुमार बंसल
'चंडीगढ़ को स्लमफ़्री शहर बनाना है'
केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में 13 मई को मतदान होना है. यहाँ से वर्तमान सांसद पवन कुमार बंसल केंद्र सरकार में वित्त राज्य मंत्री हैं. उनका मुक़ाबला भारतीय जनता पार्टी के सतपाल जैन और बसपा के हरमोहन धवन से है.

चुनावी मुद्दों, आर्थिक मंदी का मतदान रुझान पर असर समेत अनेक मुद्दों पर पवन कुमार बंसल ने बीबीसी से बातचीत की.

ज़ोर शोर से चुनाव प्रचार चल रहा है, आपने रैली भी की. किस तरह की प्रतिक्रिया रही है. लोगों के बीच कौन से स्थानीय और राष्ट्रीय मुद्दे लेकर जा रहे हैं.

प्रतिक्रिया ज़बरदस्त है, इतनी तो हम भी उम्मीद नहीं कर रहे थे. जहाँ तक मुद्दों की बात है तो मैं इसे मुद्दा शब्द तो नहीं कहूँगा. मैं जहाँ भी लोगों के बीच जाता हूँ तो तर्क हर जगह यही रहता है कि देश आगे कैसे बढ़े, अर्थव्यवस्था मज़बूत कैसे हो, लोगों का जीवनस्तर कैसे बढ़े और चंडीगढ़ शहर का विकास कैसे हो. अब आप इसे मुद्दा कहिए या कुछ भी, हम विकास और प्रगति के आधार पर ही चुनाव लड़ रहे हैं.

आप यूपीए सरकार की इतनी तारीफ़ कर रहे हैं. सरकार की पांच साल में तीन उपलब्धियाँ?

सबसे बड़ी उपलब्धि यही है कि देश में ओवरऑल विकास हुआ है, लोगों के लिए हर तरह के अवसर बढ़े हैं, समावेशी विकास हुआ है. इसके अलावा आपसी भाईचारे का माहौल देश में बना है.

 मैं जात-पॉत-धर्म के नाम पर राजनीति नहीं करता. केवल विकास की बात करता हूँ, लेकिन इतना कह सकता हूँ कि सिख दंगों से जुड़े मुद्दे का चंडीगढ़ में असर नहीं होगा. यहाँ की 32 गुरुद्वारा प्रबंधक समितियों ने कांग्रेस को समर्थन दिया है. माहौल पहले के मुक़ाबले बहुत बदला है

हर जगह आर्थिक मंदी का दौर है, आप वित्त मंत्रालय में रहे हैं, वित्त राज्य मंत्री रहे. कहीं न कहीं मंदी का ये मुद्दा वोटरों को प्रभावित करेगा जब वे वोट डालने जाएँगे?

विश्व में आर्थिक मंदी चल रही है लेकिन भारतीय चुनाव में इस मुद्दे का असर नहीं पड़ेगा. मुझे तो लगता है कि इसका उल्टा ही असर होगा. अमरीका जैसी अर्थव्यवस्था गिर गई, जापान में जीडीपी शून्य से नीचे गिर गया लेकिन हिंदुस्तान में आज भी सात फ़ीसदी विकास दर है. अमरीका के 30 बैंक विफल हो गए लेकिन भारत के एक भी बैंक को आँच नहीं आई. बैंकों की क्रेडिट ग्रोथ इस वर्ष भी 26 फ़ीसदी रही है.

चंडीगढ़ की छवि सुनियोजित और सुंदर शहर के रूप में है. लेकिन चंडीगढ़ के आस-पास के गाँव भी हैं जहाँ किसानों की समस्याएँ हैं, उसके लिए क्या समाधान हैं. करीब एक लाख लोग झुग्गियों में या गाँवों में रहते हैं, झुग्गियों में लोगों के पास मूलभूत सुविधाएँ भी नहीं हैं.

मेरी ओर से तो ये योजना एकदम तैयार है कि शहर को स्लम फ़्री बनाना है यानी झुग्गियों से मुक्ति दिलानी है. 22 हज़ार झुग्गी निवासियों को पहले ही बसा दिया गया है, 25000 और को बसाना है. इसके बाद स्लम फ़्री शहर हो जाएगा. कुछ इलाक़े पंजाब और हरियाणा में है. उसके लिए एकीकृत विकास की ज़रूरत है.

पवन बंसल
'मैं तो एंटी-इनकम्बेंसी शब्द का मतलब ही नहीं समझता. ये सरकार के काम पर निर्भर करता है'

आपने कहा स्लम फ़्री शहर बनेगा. झुग्गी रहित शहर तो बन जाएगा लेकिन क्या इनमें रहने वाले लोगों के हितों का ध्यान भी रखा जाएगा. लोगों की शिकायत है कि वे उपेक्षा का शिकार हुए हैं.

ऐसे लोगों के लिए ही तो पूरी योजना चल रही है ताकि कच्चे मकानों और झुग्गियों की जगह उन्हें पक्के मकान मिलें, अच्छा माहौल मिले, आसपास स्कूल हों, डिसपेंसरी हो. स्लम फ़्री से मेरा मतलब ये था कि झुग्गियों को हटाकर लोगों को नए घर देना न कि लोगों को वहाँ से हटाकर बेघर कर देना.

सिख समुदाय के लोग भी चंडीगढ़ में रहते हैं. दंगों के मुद्दे को लेकर समुदाय में नाराज़गी है. कांग्रेस को इसका नुकसान होगा?

वैसे मैं जात-पात-धर्म के नाम पर राजनीति नहीं करता. केवल विकास की बात करता हूँ, लेकिन इतना कह सकता हूँ कि सिख दंगों से जुड़े मुद्दे का चंडीगढ़ में असर नहीं होगा. यहाँ की 32 गुरुद्वारा प्रबंधक समितियों ने कांग्रेस को अपना समर्थन दिया है. माहौल पहले के मुकाबले बहुत बदला है.

युवाओं का वोट बहुत अहम है. कोई नेता ब्लॉगिंग कर रहे हैं, कोई जिम के चक्कर लगा रहे हैं.आप युवाओं तक कैसे पहुँच बना रहे हैं.

युवाओं तक पहुंच बनाने का सबसे बेहतरीन तरीका है उन्हें रोज़गार के साधन मुहैया करवाएँ. यहाँ शानदार आईटी पार्क बना है जहाँ बड़ी संख्या में युवा काम करते हैं. मेरी कोशिश है कि युवा जहाँ भी रहें उन्हें ट्रेनिंग ऐसी मिले कि साथ के साथ उन्हें रोज़गार मिल जाए. कई युवक आज अनइम्प्लॉयड ही नहीं बल्कि अनइम्प्लॉयबल भी हैं. तो कोशिश ये है कि उनके हाथ में ऐसा कोई हुनर हो ताकि वे रोज़गार पा सकें.

पवन बंसल
'मेरी कोशिश है कि युवा जहाँ भी रहें उन्हें ट्रेनिंग ऐसी मिले कि साथ ही उन्हें रोज़गार मिल जाए'.

केंद्र में कांग्रेस की सरकार रही- सत्ता विरोधी लहर का नुकसान सत्ताधारी पार्टी को उठाना पड़ता है.

मैं तो एंटी-इनकम्बेंसी शब्द का मतलब ही नहीं समझता. ये सरकार के काम पर निर्भर करता है. अगर सरकार ने काम अच्छा किया है, तो सत्ता विरोधी लहर नहीं होगी. अगर जनता के नुमाइंदे ने काम नहीं किया तभी एंटी इनकंबेंसी होती है. अगर सकारात्मक काम हुआ है तो उल्टा पॉज़िटिव वोट मिलता है.

16 मई को किस तरह की तस्वीर बनती देखते हैं. किस तरह का गठबंधन बनेगा?

पूरी तस्वीर क्या होगी इस बारे में तो मैं नहीं कह सकता लेकिन इतना यकीन है कि कांग्रेस उम्मीद से ज़्यादा सीटें जीतेगी और एक मज़बूत गठबंधन बनेगा. मनमोहन सिंह फिर प्रधानमंत्री बनेंगे. उन्होंने बहुत लगन के साथ काम किया है.

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