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इसबार दोगुने मत से जीतूंगा : आदित्यनाथ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर प्रदेश के पूर्वी अंचल के प्रमुख शहर गोरखुपर में एक नारा बहुत मशहूर है कि ' गोरखपुर में रहना है तो योगी-योगी कहना है'. यह नारा वहाँ के सांसद योगी आदित्यनाथ को लेकर बनाया गया है. गोरखपुर में मैने उनसे इस नारे, लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्वांचल में प्रदर्शन और कुछ अन्य मुद्दों पर बातचीत की. पेश हैं उसके प्रमुख अंश. आपके बारे में कहा जाता है कि आप सांप्रदायिक तेवर वाले व्यक्ति हैं, धर्मनिरपेक्ष नहीं. साथ ही एक नारा आपकी सभाओं में लगाया जाता है कि 'गोरखपुर में रहना है तो योगी-योगी कहना है' ऐसा है और इसमें बुराई क्या है. आपको यह क्यों बुरा लगता है. यह लोगों का मेरे प्रति प्रेम है और मैं तो देखता हूँ कि इतिहास में कृष्ण की भूमिका भी ऐसी ही रही है. इस तरह के नारों से मुझ जैसे व्यक्ति को निष्काम भाव से काम करने, समाज और राष्ट्र के प्रति समर्पण भाव रखने की प्रेरणा दी जा रही है और इसमें कोई बुराई कैसे हो सकती है. मुझे विश्वास है कि मैं इसबार दोगुने मतों से जीतूंगा. पूर्वांचल की स्थिति को कैसे देख रहे हैं आप चुनाव के मद्देनज़र? पूर्वांचल में भारतीय जनता पार्टी पिछली बार की तुलना में बेहतर स्थिति में होगी. इस बार सीटें बढ़ेंगी. रही बात अन्य दलों की तो पूर्वांचल या पूरे उत्तर प्रदेश में मफ़िया और बाहुबलियों को टिकट देकर अराजकता फैलाने के लिए बहुजन समाज पार्टी दोषी है. समाजवादी पार्टी तो पहले से ही ऐसे तत्वों को प्रश्रय देती रही है. इसलिए जनता इन लोगों को नकार देगी. इस चुनाव में मनोज तिवारी जैसे कलाकार आपके प्रतिद्वंद्वी हैं. कैसा लगता है? कोई व्यक्ति कलाकार हो सकता है. हो सकता है कि उसमें कुछ विशिष्ट गुण हों पर वो व्यक्ति जन भावनाओं को, उसकी ज़रूरतों को भी समझ सकता है, इसमें संदेह है. मुझे नहीं लगता कि वे जनता की ज़रूरतों को समझ सकते हैं. लोग उन्हें लेकर कितने गंभीर हैं इसका सच परिणाम आने से साथ ही सामने आ जाएगा. आपने पिछले कुछ वर्षों में कितना विकास कार्य किया है? हमने 12 वर्षों में जितना विकास का काम किया है उतना किसी सांसद के कार्यकाल में नहीं हुआ है. इसकी एक लंबी सूची है. पर इन सबसे भी अहम बात यह है कि हम 12 वर्ष पहले हिंदुत्व के जिस विचार को लेकर सामने आए थे, अभी भी उसपर क़ायम हैं. लोग उसे स्वीकार कर रहे हैं. हिंदुत्व से जुड़े मुद्दों पर हम क़ायम हैं, उसका प्रचार-प्रसार हो रहा है. लोग हिंदुत्व को आज की ज़रूरत मान रहे हैं. यह हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि है. आप किन बातों को लेकर आगे बढ़ रहे हैं? हम गोरखपुर की पहचान को मिटने नहीं देंगे. गोरखपुर की पहचान बाबा गोरखनाथ धाम से है. गीता प्रेस और हनुमान प्रसाद पोद्दार जी से है. फ़िराक़ गोरखपुरी और मुंशी प्रेमचंद जैसे लोगों से है. कोई अपसंस्कृति का वाहक गोरखपुर में संस्कृति की बात करे, यह स्वीकार्य नहीं है. गोरखपुर में कुछ लोग मौत के सौदागर रहे हैं वो लोग आज गोरखपुर के विकास की बात कर रहे हैं. ऐसा होना गोरखपुर की पहचान को ख़त्म करने जैसा है. मुझे उम्मीद है कि जिन लोगों ने गोरखपुर की पहचान को कलंकित किया है और ख़ुद हर क्षेत्र में फ़्लॉप रहे हैं, गोरखपुर के लोग उन्हें सबक सिखाएंगे. |
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