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'सरकार के गठन से पहले वामदलों से चर्चा करेंगें' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पंद्रहवीं लोकसभा के लिए हो रहे आने वाले चुनावों में एक बार फिर सत्ता की चाबी क्षेत्रीय दलों के हाथों में होगी.हर क्षेत्रीय दल महत्वपूर्ण है और ज़्यादातर बड़े क्षेत्रीय दल में प्रधानमंत्री पद का एक न एक दावेदार है. समाजवादी पार्टी के मुखिया और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव एक ऐसे ही एक नेता हैं जिनसे हमने विशेष बातचीत की. इस बातचीत में वे न केवल पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के साथ उनकी हाल की निकटता का बचाव करते नज़र आए बल्कि उन्होंने ये भी कहा कि 'अमर सिंह से अन्य नेता जलते हैं और जो लोग उन पर आरोप लगाते हैं वे स्वार्थी हैं.' उन्होंने क़रीबी सहयोगी आज़म ख़ान को भी दबी ज़ुबान में चेतावनी दे डाली है. पेश हैं इस विशेष बातचीत के मुख्य अंश: क्या साइकल इस बार केंद्र में सत्ता तक पहुँच रही है ? समाजवादी पार्टी चाहती है कि अगली सरकार समाजवादी पार्टी के समर्थन वाला गठबंधन ही बनाए. पिछली बार हमने देश हित में कांग्रेस सरकार को बचाया और सरकार में शामिल नहीं हुए. प्रधानमंत्री और सोनिया गाँधी ने हमसे सरकार में शामिल होने का आग्रह किया था पर हम बाहर ही रहे नहीं तो लोग कहते की हमने सत्ता के लालच में उनकी सरकार बचाई. हम मानते थे कि परमाणु करार देश के हित में है. पर इस बार हम चुनाव के बाद ये तय करेगें की हमें क्या करना है. इस बात के कितनी संभावना है की मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री ना हों ? मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने भी कहा है कि वो अगली बार तीसरे मोर्चे को बल देने के लिए सरकार में शामिल हो सकते हैं. आपका वाम दलों के साथ पुराना रिश्ता है, क्या आप उन्हें समर्थन दे सकते हैं ? जहाँ तक वाम दलों का संबंध है हमारे रिश्ते हमेशा अच्छे रहे और हमने कई निर्णय साथ भी किए. वो परमाणु करार के समय हमसे नाराज़ हो गए थे. अमर सिंह ने प्रकाश कराट से मिलने का समय माँगा था पर उन्होंने मिलने से इंकार कर दिया. राजनीति में संवाद बंद नहीं होना चाहिए. चुनाव बाद हम वाम दलों के नेताओं से बात करेगें और कोई भी निर्णय समाजवादी पार्टी, लालू प्रसाद यादव और राम विलास पासवान वाम दलों के साथ मिलकर ही लेंगे. एक समय आपको मौलाना मुलायम और कल्याण सिंह को हिन्दू ह्रदय सम्राट कहा जाता था. आप दोनों में तो बेर और केर का संबंध था. आज कल्याण सिंह आपको प्रधानमंत्री बनाने के लिए पूरी ताकत से साइकल पर पैडल मार रहे हैं ? ये विचारधारा का प्रश्न है. कल्याण सिंह भले ही मुख्यमंत्री थे लेकिन जो भारतीय जनता पार्टी और आर एस एस का निर्णय था वो उसे नहीं टाल सकते थे. कल्याण सिंह पार्टी के अनुशासन से बंधे थे. लेकिन अब उन्होंने अब साफ़ कह दिया है की उन्होंने समाजवादी पार्टी के साथ बिना शर्त दोस्ती की है. इसी कारण से कल्याण सिंह पाँव में असहनीय पीड़ा होने के बावजूद समाजवादी पार्टी के पक्ष में प्रचार कर रहे हैं. पर इस दोस्ती के चलते मुसलमान नेता पार्टी छोड़ गए और आज़म खान भी बहुत नाराज़ हैं ? कौन छोड़ गया बताईए? शाफ़ीकुर्र रहमान बर्क़, सलीम शेरवानी उन्हें तो हमने पार्टी से निकला है. सलीम शेरवानी इलाहाबाद में घूम रहे थे इन्होंने कभी सोचा भी नहीं था की वे मंत्री बनेगें. हमने उन्हें राज्य मंत्री बनवाया. बर्क़ को जहाँ से लड़ा रहे थे वहां से वो लड़ना नहीं चाहते थे. और आज़म खान ? आज़म खान पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से हैं. आज भी वो महामंत्री हैं. ठीक है उनके मर्ज़ी के हिसाब से टिकट नहीं मिला पर उन्हें ये समझना चाहिए की जयप्रदा पार्टी की अधिकृत उम्मीदवार हैं. खान को उनके लिए और पार्टी के अन्य प्रत्याशियों के लिए काम करना चाहिए. अब भी उनके पास समय है. अगर आज़म खान नहीं माने तो क्या क्या उन्हें पार्टी के बाहर जाना होगा ? ये समाजवादी परिवार के भीतर की बात है. इस बात का निर्णय चुनाव बाद करेगें बैठक में लेंगे. मुझे उम्मीद हैं वो मान जाएँगे. वो पार्टी के महामंत्री हैं उन्हें पार्टी के निर्णय के अनुसार काम करना चाहिए. आज़म खान अमर सिंह को बहुत कोसते हैं. आपके पुराने साथी बेनी प्रसाद वर्मा हों या राज बब्बर या आज़म, सभी अमर सिंह से बहुत नाराज़ हैं ? ये लोग स्वार्थी हैं. अमर सिंह का नाम इसलिए लेते हैं की अमर सिंह मेहनत करते हैं. अमर सिंह से जलते हैं. मीडिया में भी कुछ लोग अमर सिंह से जलते हैं. जलन का तो मेरे पास कोई इलाज नहीं हैं. जितनी सभाएं मैं करता हूँ उतनी ही वो भी करते हैं. पार्टी में जो मेहनत करेगा वो आगे बढेगा. आज मीडिया में उनका नाम है. हर दल में लोग उनको पूछते हैं. पार्टी के कार्यकर्ता उनको मानने लगे हैं. क्या उत्तर प्रदेश में बिना दबंगों के राजनीति नहीं चल सकती. जो दबंग पहले आपके साथ थे वो अब हाथी पर सवार हैं! मुझे आर्श्चय है की ये बात आप कैसे कह रहे हैं. मेरी पार्टी में तो कोई ग़लत छवि का आदमी रहा ही नहीं. मुख्तार अंसारी, अफज़ल अंसारी? ये मेरी पार्टी के सदस्य कब थे . इन्होंने टिकट माँगा पहले दे दिया बाद में पता चला की इनकी छवि ख़राब है जनता में, तो टिकट काट दिया. समाजवादी पार्टी में कभी कोई अपराधी नहीं रहा और रहा है तो उसे निकाल बाहर किया है. आज अपराधियों की भर्ती हो रही हैं पीएसयू में आप बोलेगें नहीं? कितने कुख्यात अपराधी हैं सरकार में इनका नाम लेने की आपकी हिम्मत नहीं है क्या? एक और बात आपके विरोधी कहते हैं की मुलायम सिंह गाँव, गरीब किसान की बात करते हैं लेकिन जब से अमर सिंह इनके साथ आए हैं इनके चारों तरफ़ जया बच्चन, जयप्रदा, संजय दत्त, नफ़ीसा अली, किशन कुमार जैसे अभिनेताओं की भीड़ बढ़ रही है, करोड़पतियों का जमावड़ा है. समाजवादी विचारधारा किसी की बपौती नहीं है. ऐसा नहीं कि केवल वही समाजवादी हो सकता है जो लोहिया से मिला हो, उन्हें देखा हो. संजय दत्त की है समाजवादी विचारधारा, अमर सिंह हैं समाजवादी विचारधारा के. जया बच्चन ने माना हैं समाजवादी विचारधारा को. अमर सिंह पहले कैसे कपडे़ पहनते थे अब कैसे कपडे़ पहनते हैं. गरीबों के बीच में जा के कितना काम करते हैं. आपका धन्यवाद ऐसे प्रश्नों के लिए जिनसे कई संदेहों का समाधान हुआ. |
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