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'अंग्रेज़ी, कंप्यूटर विरोध' की आलोचना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी ने समाजवादी पार्टी (सपा) के घोषणा पत्र में कंप्यूटर और अंग्रेज़ी शिक्षा के विरोध की कड़ी आलोचना की है. समाचार एजेंसियों के अनुसार भाजपा और कांग्रेस ने कहा है कि सपा को इसे घोषणा पत्र से हटा देना चाहिए. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की पुत्री प्रियंका गांधी ने सपा के घोषणा पत्र में कही बातों पर हैरानी जताई. उन्होंने कहा, "इक्कीसवीं सदी का ये बड़ा अजीब घोषणा पत्र है. मैं यक़ीनन उस शख्स से मिलना चाहूँगी जिसने ये घोषणा पत्र तैयार किया है." कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, "ये घोषणा पत्र भारत को पाषाण युग में ले जाता है. इसकी निंदा की जानी चाहिए और ख़ारिज किया जाना चाहिए." उत्तर प्रदेश में सीटों के तालमेल पर कांग्रेस और सपा के बीच सहमति नहीं बन सकी थी. कांग्रेस 80 लोक सभा सीटों वाले इस राज्य में अकेले दम पर चुनाव लड़ रही है. हास्यास्पद उधर, भाजपा ने सपा के घोषणा पत्र को हास्यास्पद बताते हुए कहा है कि सपा उस दौर में भी 19वीं सदी में जी रही है, जबकि 'भारत 21वीं शताब्दी का विश्व नेता बनने' की राह पर है. इस बीच, सपा ने अपने घोषणा पत्र में शामिल ‘अंग्रेज़ी शिक्षा और कंप्यूटर के इस्तेमाल के विरोध’ का बचाव किया है. सपा के महासचिव अमर सिंह ने संवाददाताओं से कहा कि उनकी पार्टी अंग्रेज़ी शिक्षा और कंप्यूटर के इस्तेमाल पर पाबंदी की बात नहीं कर रही है. उन्होंने कहा, "लेकिन नौकरियों की क़ीमत पर इन्हें बढ़ावा नहीं देना चाहिए." उन्होंने कहा कि सपा सरकारी दफ़्तरों में अंग्रेज़ी के अनिवार्य इस्तेमाल के ख़िलाफ़ है. अमर सिंह ने कहा कि क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने का मतलब अंग्रेज़ी को हतोत्साहित करना नहीं है. इससे पूर्व, सपा के प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने शनिवार को पार्टी का घोषणा पत्र जारी करने के बाद कहा था कि वो अंग्रेज़ी को अनिवार्य बनाने के ख़िलाफ़ हैं. ये पूछे जाने पर कि उनका बेटा अखिलेश यादव भी तो कॉन्वेंट में पढ़ा है, मुलायम ने कहा, "अंग्रेज़ी भाषा सरकार चलाने और रोज़मर्रा के कामकाज में क्षेत्रीय भाषाओं की जगह नहीं ले सकती." |
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