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चौथा चरण: बिहार के दिग्गजों की अग्निपरीक्षा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लोकसभा चुनाव के चौथे चरण में बिहार की बाक़ी बची तीन सीटों पटना साहिब, पाटिलपुत्र और नालंदा में गुरुवार को मतदान हो रहा है. चुनाव प्रचार अभियान का शोर तो थम गया है लेकिन चुनावी सरगर्मियाँ उफान पर हैं क्योंकि इस चरण में जहाँ राष्ट्रीय जनता दल (राजद) अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव उम्मीदवार हैं, वहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह ज़िले नालंदा में भी मतदान हो रहा है. अंतिम चरण के इस मतदान को राजनीतिक विश्लेषक लालू प्रसाद यादव, लोकजनशक्ति पार्टी (लोजपा) के अध्यक्ष रामविलास पासवान और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अग्निपरीक्षा मान रहे हैं. बिहार में लड़ाई नीतीश बनाम लालू-पासवान की जोड़ी के बीच हो गई है. वह भी ऐसे समय में जब पिछले दो दशक में पहली बार विकास भी चुनावी मुद्दा बना है हालांकि जातीय समीकरण का जादू अब भी चल रहा है. अंतिम दौर में जहाँ मतदान होगा उनमें से पटना साहिब कायस्थ बाहुल्य, पाटिलपुत्र यादव बाहुल्य और नालंदा कुर्मी बाहुल्य सीटें मानी जाती हैं. युवा समाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद कौसर नदीम के मुताबिक़ पार्टियों ने इसी आधार पर अपने उम्मीदवार भी खड़े किए हैं. पाटिलपुत्र से लालू प्रसाद यादव उम्मीदवार हैं, तो जनता दल (युनाइटेड) ने रंजन यादव और कांग्रेस ने विजय सिंह यादव को अपना उम्मीदवार बनाया है. मुक़ाबला भी इन्हीं तीनों के बीच है और इनका संबंध 'यादव' बिरादरी से है.
पटना साहिब में दो बड़ी फ़िल्मी हस्तियाँ शत्रुघ्न सिन्हा और शेखर सुमन आमने-सामने हैं. शत्रुघ्न भाजपा के और शेखर सुमन कांग्रेस के प्रत्याशी हैं. वहीं राजद ने विजय कुमार साहू को अपना उम्मीदवार बनाया है. शत्रुघ्न और शेखर कायस्थ बिरादरी से आते हैं. नालंदा लोकसभा क्षेत्र में सीधा मुक़ाबला जद (यू) उम्मीदवार कौशलेंद्र कुमार, लोजपा के सतीश कुमार और कांग्रेस के रामस्वरूप प्रसाद में है. तीनों उम्मीदवार कुर्मी बिरादरी से आते हैं. पाटलिपुत्र का दंगल लालू प्रसाद यादव सारण के साथ-साथ पाटलिपुत्र से भी चुनाव लड़ रहे हैं. उन्हें इस यादव बहुल्य क्षेत्र में भी काफ़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. कुछ विश्लेषकों का कहना है कि यहाँ से चौकाने वाले नतीजे आ सकते हैं. स्थानीय पत्रकार संजय कुमार कहते हैं, "लालू से लोहा ले रहे जद (यू) उम्मीदवार रंजन यादव की छवि एक ईमानदार और काम कराने वाले नेता की है. वहीं उनके साथ नीतीश के विकास का जलवा भी है." राजनीतिक टिकाकारों की राय में कांग्रेस उम्मीदवार विजय यादव पूर्व सांसद हैं और क्षेत्र में उनकी भी पैठ है. ऐसे में यादव का वोट बंटना निश्चित है. इस क्षेत्र में जनसंख्या के मामले में भूमिहार और मुसलमान दूसरे नंबर पर हैं. भूमिहार जहाँ परंपरागत रूप से जद (यू) को वोट देते आए हैं वहीं मुसलमान इस बार बंटे हुए नज़र आ रहे हैं. कांग्रेस के मैदान में आने से चुनावी गणित बदल गई है. आम मतदाता बातचीत में विकास के नाम पर वोट देने की बात करता है या तो ख़ामोश रह जाता है. संजय कुमार कहते हैं, "यह ख़ामोशी ही फ़ैसला करेगी कि हवा का रुख़ क्या है." पाटिलपुत्र में लालू के लिए भाकपा (माले) के उम्मीदवार रामेश्वर प्रसाद भी मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं.वे पूर्व सांसद हैं और खेतिहर मज़दूरों में काफ़ी लोकप्रिय हैं. विधानसभा वार भी लालू की स्थिति कमज़ोर है. पाटिलपुत्र सीट में छह विधानसभा क्षेत्र आते हैं. इनमें से दानापुर, विक्रम और मसौढ़ी पर भाजपा-जद (यू) गठबंधन के क़ब्ज़े में है तो मनेर और फुलवारी शरीफ़ पर राजद का कब्ज़ा है और पालीगंज पर भाकपा माले का. इसके बाद भी राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्याम रजक दावा करते हैं, "लालू जी सभी उम्मीदवारों की ज़मानत ज़ब्त करा देंगे. राजद को सभी वर्गों का वोट मिल रहा है. लड़ाई संप्रदायिक बनाम सेक्युलर है. लालू जी जाति की सीमाओं में नहीं बंधे हैं, अगर कोई यादव नेता मैदान में है भी तो लालू जी के सामने उनकी हैसियत ही क्या है." पटना साहिब में मुक़ाबला शत्रुघ्न सिन्हा और शेखर सुमन के चुनाव क्षेत्र पटना साहिब में भी मुक़ाबला काफ़ी दिलचस्प है. कायस्थ बहुल इस क्षेत्र में मुक़ाबला भी दो कायस्थ उम्मीदवारों के बीच है लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि कहीं दो कायस्थों की लड़ाई में कोई तीसरा न बाज़ी मार ले जाए. युवा मतदाता महताब आलम कहते हैं, ''कायस्थ के बाद यहाँ वैश्य समाज के वोटर अधिक हैं. यह समाज अपनी जाति के प्रत्याशी को संसद में भेजने के लिए आतुर नज़र आ रहा है. इसके साथ जद (यू) के बाग़ी सांसद डॉक्टर एजाज़ अली भी उनके हक़ में प्रचार कर रहे हैं. ऐसे में किसी चौंकाने वाले नतीजे से इनकार नहीं कर सकते हैं. ''
कांग्रेस प्रवक्ता डॉक्टर शकील अहमद कहते हैं, "हाँ शहरी इलाक़ों में ऐसा लग रहा है कि हवा का रुख़ भाजपा के पक्ष में हैं लेकिन हम लोगों ने देहात का दौरा किया है और पाया है कि नतीजे कांग्रेस के पक्ष में आएँगे." नालंदा की लड़ाई नालंदा कुर्मी बहुल इलाक़ा है. यह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का गृह ज़िला भी है. भाकपा (माले) का गढ़ रहे नालंदा में अब नीतीश की तूती बोलती है. यहाँ कुर्मी के बाद दलितों की बड़ी आबादी है इसलिए सीधा मुक़ाबला लोजपा और जद (यू) के बीच माना जा रहा है. यहाँ के 16 लाख मतदाताओं में क़रीब पाँच लाख कुर्मी हैं. जद (यू) ने अपने सांसद रामस्वरूप प्रसाद के बाग़ी हो जाने के बाद कौशलेंद्र कुमार को उम्मीदवार बनाया है जबकि रामस्वरूप प्रसाद कांग्रेस के उम्मीदवार हैं तो लोजपा ने पूर्व विधायक सतीश कुमार को मैदान में उतारा है. तीनों उम्मीदवार कुर्मी जाति के घमैला उपजाति के हैं. विश्लेषकों का मानना है कि इससे कुर्मी की बड़ी उपजाति कोचइसा के मतदाता नाराज़ हैं. लोकतांत्रिक समता पार्टी ने पूर्व विधायक अनिल सिंह को मैदान में उतारा है, वे कोचइसा कुर्मी हैं. नीतीश के गृह ज़िले में विकास की बहुत चर्चा है. नालंदा के बरबिगहा गीलानी के निवासी जोधन यादव रिक्शा चलाते हैं. जब वे हमें पटना में मिले तो बताया कि मतदान करने गाँव जाएँगे और नीतीश के पक्ष में वोट डालेंगे. जब मैंने उनसे इसका कारण पूछा तो उन्होंने बताया, "नीतीश गाँव को चमका रहे हैं, बिजली, पानी दे रहे हैं, सड़क बनवा रहे हैं तो उन्हीं को वोट देंगे न जो काम करेगा." उनका साफ़ कहना था कि जाति के आधार पर नहीं बल्कि विकास के नाम पर वोट करेंगे. जब मैंने उनसे नालंदा से जद (यू) के उम्मीदवार का नाम पूछा तो उनका कहना था, "हम तीर छाप(जद यू का चुनाव निशान) पर वोट देंगे, नीतीश को वोट देंगे." |
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