13 साल की कच्ची उम्र में मां बनने के मायने

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- Author, सीटू तिवारी
- पदनाम, पटना से, बीबीसी हिन्दी के लिए
तेरह साल की इस बच्ची का आठ महीने का एक बच्चा है.
डॉक्टरों की अथक कोशिशों और एक बड़े ऑपरेशन के बाद जनवरी में बिहार के एक सरकारी अस्पताल में उसका बच्चा पैदा हुआ. जब 3.2 किलोग्राम का यह बच्चा पैदा हुआ तो अनचाहा गर्भ ढो रही इस मां का वज़न 36 किलोग्राम था.
सरकारी अस्पताल के कांउसलर की रिपोर्ट कहती है कि 13 साल की इस मां को यह बच्चा अच्छा नहीं लगता है.

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इस नाबालिग़ लड़की को ख़ुद कभी मां का प्यार नसीब नहीं हुआ. उसने होश संभाला तो उसकी मां गुजर चुकी थीं. अपने भाई बहन के लिए वह मां की ज़िम्मेदारी निभा रही थी. लेकिन मां की ज़िम्मेदारी निभाने और सचमुच के मां बन जाने में बहुत बड़ा फ़र्क है.
बाल कल्याण समिति, समस्तीपुर के अध्यक्ष तेज पाल सिंह ने बीबीसी को बताया, "बच्ची तो इसी असमंजस में है कि उसके पेट में बच्चा कैसे आ गया. वह ग्रामीण परिवेश की बच्ची है जो बहुत अबोध है. वह इस अनचाहे बच्चे को अपने साथ नहीं रखना चाहती."
इस बच्चे की देखभाल सरकारी होम में की जा रही है.

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नाबालिग़ बच्ची के साथ कथित बलात्कार उसके गांव में ही हुआ. वो दिन आम दिनों जैसा ही था जब वो अपने पिता को खाना पहुंचाने गई थी. गांव के एक लड़के ने उसके साथ कथित रूप से बलात्कार किया और किसी से नहीं कहने की चेतावनी देते हुए धमकाया. वह चुप रही.
उस लड़की के साथ यह घटना कई बार हुई. एक दिन अचानक जब उसके पेट में ज़बरदस्त दर्द हुआ, उसकी चाची उसे डाक्टर के पास ले गई. जांच के बाद डॉक्टर ने बताया कि उसे पांच महीने का गर्भ है. पूछने पर बच्ची ने आरोपी का नाम बताया. पुलिस में शिकायत दर्ज की गई और पिछले साल 21 सितंबर को केस दर्ज हुआ.

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एफआईआर में अभियुक्त की उम्र 14 साल लिखी गई. लेकिन बाल कल्याण समिति के लोगों का कहना है कि स्कूल सर्टिफ़िकेट के मुताबिक़, अभियुक्त की उम्र साढ़े सत्रह साल है. उसे कुछ हफ़्ते बाद अदालत से ज़मानत मिल गई.
बाल कल्याण समिति के लोगों ने बीबीसी को बताया, "अभियुक्त तमाम आरोपों से इंकार करते हुए ख़ुद को निर्दोष बता रहा है. हम डीएनए टेस्ट की तैयारी कर रहे हैं ताकि आरोप साबित हो सकें. बच्ची के पिता से बातचीत के बाद लगता है कि वो तो अपनी बच्ची को रखना चाहते हैं, लेकिन उसकी चाची इसके ख़िलाफ़ है. वो सवाल उठाती हैं कि इससे शादी कौन करेगा? ऐसे में बच्ची को लेकर कोई फ़ैसला ज़रूरी है. अगर बच्ची अपने बच्चे को अपने पास नहीं रखना चाहती तो उसे एडॉप्शन होम के हवाले करना होगा."

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बिहार में 10 साल की उम्र की एक दूसरी लड़की के साथ पिछले साल जुलाई में बलात्कार हुआ. इस मामले के एक अभियुक्त को सज़ा हो चुकी है. दूसरा अभियुक्त ख़ुद नाबालिग़ है और मामला जस्टिस जुवेनाइल बोर्ड में चल रहा है.
इस बालात्कार पीड़ित नाबालिग़ से मुलाक़ात हुई तो उसके हाथ में बच्चों की कविताओं की एक किताब थी. वे उसमें से कविता पढ़ रही थी. "जंगल में है चहल पहल, तितली का है शोर"

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उसने बीबीसी से कहा, "मैं पढ़ना चाहना हूं. लेकिन डाक्टर साहब हमें अस्पताल में रखकर दवाइयां खिलाते हैं. मैने अपनी सहेलियों से कह दिया है कि मैं ठीक हो जाऊंगी तो फिर पढ़ने आऊंगी.”
बच्ची के मामा ने बीबीसी से कहा "हम किसान हैं, ज्यादा नहीं जानते. लेकिन हम अपने प्यार से बच्ची को वह वारदात भुलाने में मदद करेंगें. बच्ची हमारे परिवार का हिस्सा है. हम किसी और की ग़लती की सज़ा उसे कैसे दे सकते हैं?"
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