जेल में मौत, दाह-संस्कार को बस 35 रूपये

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    • Author, रवि प्रकाश
    • पदनाम, रांची से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

साल 1894 और 2016 के बीच कुल 132 साल का फ़ासला है. इस बीच दुनिया काफ़ी बदल गई है. 1894 का ग़ुलाम भारत अब आज़ाद है. पाकिस्तान और बांग्लादेश नाम के दो देश दुनिया के नक्शे में जुड़ चुके हैं. लेकिन अगर कुछ नहीं बदला है तो वह है झारखंड के जेलों का क़ानून.

यहां के जेलों में ब्रिटिश प्रिजनर्स एक्ट-1894 के तहत आज भी काम होता है. जेल में किसी कैदी की मौत की दशा में उनके अंतिम संस्कार के लिए सरकार जेल प्रशासन को सिर्फ 35 रुपए देती है. यह राशि अंग्रेजी हुकूमत ने 1894 में तय की थी. तब 35 रुपया बहुत बड़ी रकम थी. आज 35 रुपए में एक किलो लकड़ी भी नहीं मिलती है.

हरमू मुक्तिधाम के एक कर्मचारी (नाम नहीं बताने के शर्त पर) कहते हैं, "बहुत कंजूसी में किए गए अंतिम संस्कार में भी करीब दो हज़ार रुपए खर्च होते हैं. शव जलाने की लकड़ी से लेकर कफ़न तक की क़ीमत बढ़ी है. पंडित जी और मौलवी साहब का दक्षिणा भी."

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आख़िर 35 रुपए में कैसे करते हैं अंतिम संस्कार?

बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल के अधीक्षक अशोक चौधरी ने बीबीसी कहा, "हमें करना पड़ता है. क़ानूनी तौर पर हम इससे ज़्यादा राशि क्लेम नहीं कर सकते. हम ब्रिटिश प्रिजनर्स एक्ट-1894 के प्रावधानों के तहत काम करने के लिए बाध्य हैं."

वहीं जेल कर्मचारियों का कहना है कि कैदियों के अंतिम संस्कार के लिए हमें आपस में चंदा करना पड़ता है.

अशोक चौधरी के मुताबिक़ जेल में मौत पर कैदियों का अंतिम संस्कार उनके धार्मिक रीति-रिवाजों के मुताबिक़ कराया जाता है.

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कोई भी जेल अधिकारी यह नहीं बता पाता कि अंग्रेजी शासन में अंतिम संस्कार की क्या प्रक्रिया थी. सरकार के रिकॉर्डघर में इससे सबंधित फ़ाइलें नहीं हैं. बिहार से बंटवारे के बाद बने नए झारखंड राज्य के पास सौ साल पुरानी कई फ़ाइलें नहीं हैं. फ़ाइलें मौजूद होतीं तो यह जानना दिलचस्प होता कि 132 साल पहले 35 रुपए में क्या-क्या होता था. क्योंकि तब 35 रुपए बड़ी रकम थी.

वरिष्ठ पत्रकार मधुकर ने बताया कि झारखंड हाइकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस वीरेंदर सिंह और जस्टिस एस चंद्रशेखर की खंडपीठ ने अप्रैल में एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए झारखंड सरकार को अपना जेल मैन्युअल बनाने का निर्देश दिया था.

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भारत सरकार 2003 में ही मॉडल जेल मैन्युअल बनाकर राज्यों से इसमें ज़रूरी संशोधन के लिए कह चुकी है. बिहार ने 2012 में अपना जेल मैन्युअल बना लिया था.

झारखंड की जेल आइजी सुमन गुप्ता के मुताबिक़ जेल मैन्युअल का ड्राफ्ट तैयार है. सरकार की मंजूरी मिलते ही उसे लागू करने की कार्यवाही की जाएगी.

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