शक्ति प्रदर्शन के बाद दलित अब क्या चाहते हैं?

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गुजरात में दलितों की पिटाई के ख़िलाफ़ अहमदाबाद में दलितों ने विशाल रैली में शपथ ली है कि वो अब मरे हुए पशुओं को उठाने का काम नहीं करेंगे.

लेकिन अब दलितों की क्या मांगें हैं और आगे क्या करने जा रहे हैं?

इसी बारे में बीबीसी संवाददाता इक़बाल अहमद ने दलितों के नेता जिग्नेष मेवानी से बातचीत की है.

जिग्नेष मेवानी ने सरकार के सामने जो मांगें रखी हैं उनमें दलितों को सुरक्षा, पिछली ऐसी घटनाओं में तुरंत कार्रवाई, विशेष अदालतें, मरे पशुओं को न उठाने वालों के लिए खेती की ज़मीन शामिल हैं.

चुनावी राजनीति के बारे में पूछे जाने पर जिग्नेष कहते हैं कि वो इस आंदोलन की राजनीति में दलित आंदोलन के साथ मुस्लिम समुदाय, आदिवासियों के सवाल, मजदूर वर्ग को भी जोड़ेंगे.

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गुजरात के दलित आंदोलन के नेता की मांगों की लिस्ट ख़ासी लंबी है और इस प्रकार है:

  • ऊना के अभियुक्तों को यदि ज़मानत भी मिले तो उन्हें 5 जिलों से बाहर रखा जाए.
  • आंदोलन करने वाले बेगुनाह दलितों पर दर्ज फर्जी मुकदमे वापस लिए जाएं. <image id="d5e390"/>
  • ऊना की घटना के वीडियो में हमलावरों की पहचान संभव है. इसमें पुलिस की भूमिका संदेहास्पद है इसलिए पुलिसवालों के ख़िलाफ़ दलित उत्पीड़न के तहत मुकदमा दर्ज हो.
  • चार साल पहले सूर्यनगर जिले में एक शहर में तीन दलित लड़कों की हत्या के मामले में फ़रार अभियुक्त को गिरफ्तार किया जाए.
  • गुजरात के सारे जिलों में अनुसूचित जाति- जनजाति कानून के तहत मामले चलाने के लिए विशेष अदालतें बनाई जाएं.
  • मरे हुए पशुओं को उठाने का काम छोड़ने वाले दलितों और भूमिहीन दलितों को सरकारी कोटा से 5-5 एकड़ जमीन दी जाए.
  • सभी दलित सफाईकर्मियों को छठे वेतन आयोग का लाभ दिया जाए और उनकी नौकरी पक्की की जाए.

विश्लेषक मानते हैं कि गुजरात के दलित पिछले 15-20 वर्षों से भाजपा को वोट देते रहे हैं. भाजपा के गुजरात मॉडल में दलित भी शामिल हैं.

लेकिन फिर दलितों में इतना गुस्सा क्यों है?

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जिग्नेष का दावा है कि गुजरात में दलित उत्पीड़न की घटनाएं पिछले 10-15 सालों में बढ़ी हैं.

उन्होंने कहा कि आर्थिक शोषण, जातिगत भेदभाव और हिंसा पिछले 10-12 सालों में काफी बढ़ गए हैं.

उनका कहना है कि 2001 से 2015 तक गुजरात में दलित उत्पीड़न के 15 हज़ार से ज़्यादा मुकदमे दर्ज हुए और अब 116 गांवों में दलित पुलिस संरक्षण में जी रहे हैं.

सम्मेलन में गुज़रात के सभी दलित सफाईकर्मियों को छठे वेतन आयोग का लाभ दिए जाने की मांग की गई.

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इमेज कैप्शन, सम्मेलन में गुज़रात के सभी दलित सफाईकर्मियों को छठे वेतन आयोग का लाभ दिए जाने की मांग की गई.

जिग्नेष का दावा है कि गुजरात में एक लाख से ज्यादा सफाईकर्मियों को न्यूनतम मजदूरी नहीं मिली है.

उनका कहना है कि दलित आंदोलन का आज का मिजाज़ तो ऐसा है कि आने वाले दिनों में भारतीय जनता पार्टी को न केवल गुजरात में बल्कि पूरे देश में दलित का गुस्सा झेलना होगा.

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