"आज़ादी के इतने सालों बाद भी नहीं मिटी गुलामी''

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गुजरात में स्व्यंभू गौ-रक्षकों के हाथों दलित युवकों की पिटाई के बाद अब कई दलित परिवारों ने धर्मपरिवर्तन का फैसला किया है.
बनासकांठा जिला के दलित संगठन के अध्यक्ष दलपत भाटिया के मुताबिक ये सभी परिवार बौध धर्म अपनाएंगे.
हाल ही में गुजरात के ऊना में जानवरों की खाल उतार रहे चार दलित लड़कों की पिटाई की घटना सामने आई थी.
दलपत भाटिया कहते हैं कि आज़ादी मिलने के इतने सालों बाद भी दलितों की परिस्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है.
उनके मुताबिक आज भी दलितों को वही गुलामी, वही मार, वही नाइंसाफी से गुज़रना पड़ता है.
बीबीसी से बातचीत में दलपत भाटिया कहते हैं, "आज़ादी का एहसास ही नहीं कर रहे हैं. सरकार ने भी अब तक कोई इंसाफ नहीं दिया है."
वो कहते हैं, "दिन प्रतिदिन अमानवीय अत्याचार हो रहे हैं. इसमें बढ़ोतरी हो रही है. जो कम होने चाहिए था वो बढ़ रहे हैं."

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इन लोगों की शिकायत है कि राज्य सरकार की तरफ़ से इनकी शिकायतों पर कोई जवाब नहीं आया है.
उन्हें सिर्फ़ आश्वासन दिया जाता है कि कमिटि गठित की गई है जो कार्रवाई कर रही है.
2012 की घटना को याद कर दलपत भाटिया कहते हैं कि तीन युवा लड़कों को गोली मारी गई थी लेकिन अब तक आरोपी गिरफ्तार नहीं हुआ है.
हाल ही के एक घटना में पुलिस वाले ने सूरत शहर में एक लड़के को मारा था.
दलपत भाटिया मानते हैं कि बौध धर्म अपनाने से समस्याओं का समाधान हो जाएगा और गुलामी मिट जाएगी. कोई उन्हें कुछ भी बोलने नहीं आएगा.
दलपत कहते हैं कि बहुत सालों से दलित राह देख रहे थे कि कोई उनका साथ दे.
(बीबीसी संवाददाता मोहनलाल शर्मा से बातचीत पर आधारित)
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