पैलेट गन के मामले में समिति का गठन होगा

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भारत सरकार कश्मीर में पैलेट गन के विकल्प पर विचार कर रही है.

कश्मीर में हिंसा के बाद जवाबी कार्रवाई में पैलेट गन से जख़्मियों की भारी संख्या को देखते हुए गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा में कहा कि ''हम विशेषज्ञों की एक समिति गठित करेंगे. ये देखेगी कि पैलेट गन के विकल्प के तौर पर कौन से ग़ैर घातक हथियार लाए जा सकते हैं. ये समिति दो महीने में अपनी रिपोर्ट पेश करेगी.''

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ये समिति पैलेट गन यानि छर्रों वाली बंदूक और ग़ैर घातक हथियारों के विकल्प पर अपनी सिफारिशें पेश करेगी.

पैलेट गन और ग़ैर घातक हथियारों के इस्तेमाल के चलते कश्मीर में कई प्रदर्शनकारियों को गंभीर चोटें आईं थी और कुछ की आंखें तक चली गईं.

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घाटी में बढ़ते आतंकवाद को लेकर कुछ सदस्यों की शंकाओं को ख़ारिज करते हुए गृहमंत्री ने कहा कि ''सुरक्षा बलों ने कई चरमपंथियों को मारा है जिससे आतंकवाद में कमी आई है.

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सुरक्षा बलों को ''अधिकतम संयम'' बरतने के निर्देश दिए हैं. साथ ही ये भी कहा कि किसी से कोई ग़लती हुई होगी इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता. जिन लोगों की जान गई और जो घायल हुए उन्हें लेकर हम सब दुखी हैं.''

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कुछ सुरक्षाकर्मियों के मारे जाने पर जश्न मनाने वाले लोगों पर निशाना साधते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि ''समाज में ''बर्बरता'' की कोई जगह नहीं है.

पैलेट गन पर कई सदस्यों की चिंताओं को लेकर गृहमंत्री ने बताया कि इन हथियारों से घायल हुए एक व्यक्ति की मौत हुई है जबकि 53 लोगों को आंखों में चोटें आईं हैं.

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ये बंदूके ग़ैर घातक हथियार की श्रेणी में आती हैं जिन्हें 2010 में भी इस्तेमाल किया गया था. तब 6 लोगों की मौत हो गई थी, 98 घायल हुए थे जिनमें से 5 लोगों की आंखों की रोशनी चली गई थी.''

राजनाथ सिंह ने इस बात को ख़ारिज किया कि सुरक्षाबलों ने इन हथियारों का इस्तेमाल अंधाधुंध तरीक़े से किया. उन्होने ऐलान किया कि सरकार पैलेट गन के विकल्प को ध्यान में रख रही थी.

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