पीने से पहले इनकी बात पर गौर करें

इमेज स्रोत, Kashif Masood

    • Author, इमरान क़ुरैशी
    • पदनाम, बेंगलुरु से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

ऐसा लगता है कि आजकल लोगों को वाइन बनाने की सनक चढ़ी हुई है. इस बात को जाने बिना कि यह इतना आसान भी नहीं जितना आमतौर पर लोगों को लगता है.

इसलिए वाइन उत्पादन को लेकर सलाह देने के दौरान अलोक चंद्रा लोगों को इस व्यवसाय में आने से पहले आगाह करते है.

आलोक चंद्रा वाइन उत्पादन को लेकर परामर्श देने का काम करते हैं. वाइन इंडस्ट्री में आने से पहले वो चाय टेस्टर के रूप में अपनी सेवाएं देते थे.

उन्होंने तीन दशक पहले वाइन इंडस्ट्री में कदम रखा.

आलोक चंद्रा कहते हैं, "बहुत सारे लोग वाइन बनाने की तरफ आकर्षित हो रहे हैं. लेकिन इससे पैसा कमाने वाले लोगों की संख्या दुनिया में बहुत कम है."

वाइन उत्पादकों को जो वे सलाह देते हैं उसमें अंगूर के पैदावर से लेकर उसकी गुणवत्ता का मूल्यांकन तक शामिल है.

उनके एक क्लाइंट का व्यवसाय उनकी सलाह से नौ सालों में सात लेबल से बढ़कर 35 लेबल तक पहुंच गया.

उनका ये क्लाइंट वाइन आयात करने का काम करता है. इससे जो मूल बात पता चलती है, वो यह है कि भारत में वाइन की खपत बढ़ रही है और इसकी वजह से कुछ लोग इसके उत्पादन के कारोबार में भी आना चाहते है.

आलोक चंद्रा बीबीसी हिंदी से कहते हैं, "लेकिन वाइन को सिर्फ चखकर परखना एक जटिल काम है. चाय की तरह ही किसी इंसान को वाइन को परखने के लिए अपने सूंघने, स्वाद और देखने की क्षमता का उपयोग करना होता है."

इमेज स्रोत, Kashif Masood

वो आगे बताते हैं, "अगर वाइन का रंग गहरा लाल हो तो आप यह मान सकते हैं कि वाइन अच्छी गुणवत्ता वाला होगा. सफेद वाइन के मामले में अगर यह थोड़ा पीले रंग का है तो फिर इसे जांचना होगा कि यह कितना सही है. दूसरी बात जो हम परखते हैं, वो होती है इसकी खुशबू. हम यह जांचते हैं कि इसकी खुशबू फूलों जैसी है, या फलों जैसी "

आलोक चंद्रा का कहना है, "अगर आप खुशबू से इसका अंदाज़ा नहीं लगा सके तो फिर इसे आपको चखना चाहिए और देखना चाहिए कि यह कैसा है. शुरू में एक भारतीय मीठी वाइन पसंद करता है क्योंकि सॉफ्ट ड्रिंक या मिठाई खाने के प्रति उसका झुकाव बना हुआ रहता है. कई लोग खट्टे वाइन की खोज में रहते हैं. लेकिन समय के साथ उन्हें इस बात का एहसास होता है कि वाइन की गुणवत्ता को परखना एक जटिल काम है."

वाइन पीने वाले लोग संभव है कि उन्होंने जो पहली बार वाइन पी थी फिर उसे कभी नहीं पीना चाहे क्योंकि वे समय के साथ दूसरे वाइन का ज़ायका ले लेते हैं और हो सकता है कि ज्यादा बेहतर गुणवत्ता वाले वाइन का.

इमेज स्रोत, Kashif Masood

और इस तरह से वे वाइन के मामले में ज्यादा परिपक्व हो जाते हैं.

आलोक चंद्रा का कहना है कि वाइन की गुणवत्ता "उस अंगूर की गुणवत्ता पर निर्भर करता है जिससे वाइन बनाया गया है."

उनका मानना है कि मिट्टी और मौसम का भी बहुत फ़र्क़ पड़ता है.

वो बताते हैं कि भारत में भले ही ज्यादा प्रकार के अंगूर ना पाए जाते हो लेकिन दुनिया में कम से कम दस हज़ार प्रकार के अंगूर पाए जाते हैं.

वाइन का कोई शौकिन कैसे वाइन को परखे इस पर आलोक चंद्रा का कहना है, "आपके पास एक साफ-सुधरे चौड़े ग्लास में वाइन भरी होनी चाहिए. इसकी एक चुस्की आप लें और फिर धीरे-धीरे मुंह में इसकी कुल्ली करें. इसके बाद इसे बाहर थूक दें. अब इस दौरान महसूस होने वाले एहसास को आप रिकॉर्ड के लिए लिख सकते हैं कि इसका स्वाद कैसा था, इसकी खुशबू कैसी थी, यह हल्के असर वाला था या फिर गहरे असर वाला."

इमेज स्रोत, Kashif Masood

वो बताते हैं कि ऐसा ही आप एक के बाद दूसरे वाइन की चुस्की के साथ भी कर सकते हैं और उसका एक रिकॉर्ड बना सकते है ताकि उसकी तुलना कर सकें.

आलोक चंद्रा बताते है कि अगर आप पांच या दस वाइन की जांच कर रहे हों तो आपको बीच में एक ब्रेक लेकर पानी से मुंह साफ करना होगा. आप एक कॉफी ब्रेक भी ले सकते हैं.

वो एक वाकया सुनाते हुए कहते है कि कुछ साल पहले जब वे इटली में एक प्रतियोगिता के दौरान जज थे तो उन्हें एक दिन में पचास वाइन को चखकर जांचना था लेकिन हर दस वाइन को चखने के बाद हम एक ब्रेक लेते थे.

वाइन

इमेज स्रोत, iStock

आलोक चंद्रा एक और पहलू की ओर ध्यान दिलाते हैं. वो कहते हैं कि वाइन के साथ आप क्या खाते हैं, यह भी काफी महत्वपूर्ण है.

वो बताते हैं, "पश्चिमी खानों के साथ वाइन का स्वाद ज्यादा बेहतर तरीके से महसूस किया जा सकता है क्योंकि पश्चिमी खाने सूखे होते हैं. लेकिन भारतीय खानों में मसाले, दही, दाल और रसदार सब्जी जैसी चीज़ें होती हैं. इसलिए बेहतर है कि यहां खाने से पहले ही वाइन का स्वाद ले लिया जाए."

वो वाइन को चॉकलेट और अंडे के साथ भी नहीं लेने की सलाह देते हैं.

कॉफी टेस्टर या सिंगल माल्ट टेस्टर की तरह वो भी तंबाकू से परहेज रखने की सलाह देते हैं.

हालांकि वाइन चखने को लेकर कोई पेशेवर कोर्स तो नहीं लेकिन लंदन का एक एजुकेशन ट्रस्ट इस पर एक कोर्स चलाता है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> कर सकते हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)