मानव तस्करी विरोधी विधेयक की ख़ास बातें

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    • Author, ज़ुबैर अहमद
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

केंद्रीय सरकार का कहना है कि मानव तस्करी भारत में तीसरा सब से बड़ा और गंभीर अपराध है.

मानव तस्करी और इस तरह के दूसरे अपराधों की रोक थाम के लिए भारत सरकार ने मानव तस्करी (सुरक्षा, बचाव और पुनर्वास) बिल 2016 का मसौदा जारी किया है. ये बिल सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर तैयार किया गया है लंबे समय से इसकी ज़रूरत महसूस की जा रही थी.

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दरअसल मौजूदा क़ानून इम्मोरल ट्रैफिक प्रिवेंशन एक्ट 1956 के अंतर्गत देह व्यापर तक सीमित था लेकिन इस बिल में इसके दायरे को बढ़ाया गया है और इसमें कई ऐसे अपराधों को शामिल किया गया है जो मौजूदा क़ानून में शामिल नहीं थे:

1. बंधुआ मज़दूरी और बाल मज़दूरी से लेकर वेतन कम देने जैसे अपराध इस बिल में शामिल हैं. उदाहरण के तौर पर वो परिवार जो छोटी बच्चियों को नौकरानी की तरह रखते हैं और उन्हें पर्याप्त वेतन नहीं देते, उनका शोषण करते हैं तो ऐसे परिवार के ख़िलाफ कार्रवाई की जा सकती है

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2. पीड़ितों और गवाहों की पहचान बाहर करने पर रोक: मीडिया या कोई व्यक्ति पीड़ितों और गवाहों के नाम या पहचान सार्वजनिक करे तो इनके ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की जायेगी

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3. विशेष जांच एजेंसी: बिल में केंद्रीय सरकार को एक विशेष जांच एजेंसी के गठन का सुझाव दिया गया है. इस एजेंसी का काम होगा मानव तस्करी के मामलों की नए क़ानून के अंतर्गत जांच करना

4. विशेष अदालत: पीड़ितों के आघात को कम करने और अधिक से अधिक केसेज़ में सज़ा दिलाने के लिए बिल में जिला स्तर पर विशेष अदालतों के गठन का प्रावधान है. इन में सरकारी वकीलों और जजों की नियुक्ति की कोशिशों का प्रस्ताव भी है

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5 . पुनर्वास: बिल के अनुसार तस्करी की शिकार लड़कियों के लिए लम्बे अर्से तक के लिए सरकारी रिहाइश का इंतेज़ाम हो जहाँ उनके पुनर्वास पर ज़ोर दिया जाये. उन्हें नए हुनर सिखाए जाएँ ताकि वो मुलाज़मत कर सकें.

6. अंतर-देश की तस्करी: मानव तस्करी भारत से पडोसी देशों में आम है. इसकी रोक थाम के लिए बिल में पड़ोसी देशों से इस सम्बन्ध ताल मेल बढ़ाने का सुझाव है.

7. इस विधेयक में ज़िला और राज्य स्तर पर अंतर-मंत्रालयी तस्करी विरोधी समितियों के गठन का सुझाव है