घर की टेंशन से बेफ़िक्र नेताओं की लंबी फेहरिस्त

- Author, प्रदीप कुमार
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
जयललिता, ममता बनर्जी और सर्बानंद सोनोवाल. तीनों अलग अलग राजनीतिक पार्टियों से जुड़े हैं. लेकिन क्या आपको मालूम है कि इस बार विधानसभा चुनावों में कामयाबी हासिल करने के अलावा इन तीनों में क्या समानता हैं?
दरअसल तीनों शादी शुदा नहीं हैं. तीनों के तीनों सिंगल हैं. यानी ऐसे नेता जो घर परिवार की टेंशन से बिलकुल बेफ़िक्र हैं.
ख़ास बात ये है कि मौजूदा समय में भारतीय राजनीति में सिंगल नेताओं की धूम मची हुई है. मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सिंगल ही हैं.

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उनकी शादी जरूर हुई थी और शादी के बारे में अपने हलफ़नामे को लेकर वे विवादों में भी रहे हैं. लेकिन मोदी जब से राजनीति में पूरी तरह सक्रिय हुए हैं, तब से वे सिंगल ही हैं. चाहे गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर उनका कार्यकाल रहा हो या अब प्रधानमंत्री की भूमिका.
राज्यों की तरफ देखें तो जयललिता, ममता और सर्बानंद की कड़ी में ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर भी शामिल हैं.

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बीजू जनता दल के मुखिया और 2000 से ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक अपने पिता बीजू पटनायक के निधन के बाद राजनीति में आए.
राज्य में कांग्रेस पर हमला करने के लिए वे अपने 'सिंगल' होने का सहारा लेते रहे हैं कि कांग्रेस पार्टी की तरह उनकी पार्टी में वंशवाद नहीं चलेगा क्योंकि उनका परिवार ही नहीं है. ये बात दूसरी है राजनीति में वे अपने पिता की जगह लेने के लिए आए थे.

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हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के रास्ते से राजनीति में आए. उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का क़रीबी माना जाता है. वे हरियाणा के पहले कुंवारे मुख्यमंत्री हैं. संघ से अपने जुड़ाव के चलते खट्टर ने शादी नहीं की थी.
यानी मौजूदा समय में पांच राज्यों की कमान एक तरह से कुंवारों के हाथों में है. इसके अलावा तीन राज्यों के मौजूदा मुख्यमंत्री लंबे समय से अकेले रह रहे हैं. इन लोगों ने शादी जरूर की, लेकिन अलग अलग वजहों से अब अकेले हैं.
राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया की शादी धौलपुर के महाराजा से 1972 में हुई. लेकिन एक साल बाद ही दोनों अलग हो गए.

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वसुंधरा तब बेहद कम उम्र की थीं, लेकिन उनकी गोद में बेटा दुष्यंत भी था. इसके बाद वसुंधरा ने शादी नहीं की. 1984 में वे सक्रिय राजनीति में आईं और 2003 में राजस्थान की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं.
जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती भी अपने पिता की विरासत संभाल रही हैं. उनकी भी शादीशुदा ज़िंदगी ठीक नहीं रही.

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पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद के कहने पर उन्होंने रिश्ते में चाचा लगने वाले जावेद इक़बाल से शादी तो की लेकिन कुछ ही सालों में दोनों का तलाक हो गया. तब तक महबूबा दो बेटियों की मां बन चुकी थीं.
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी इन दिनों सिंगल हैं. दरअसल उनकी पत्नी मंजु कुमारी सिन्हा का निधन 2007 में हो गया था. तब नीतीश राज्य के मुख्यमंत्री बन चुके थे.
नीतीश का एक बेटा भी है, लेकिन वो राजनीति में नहीं है.
इन सब सिंगल नेताओं के बीच बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती भी हैं, जिन्होंने शादी नहीं की.
अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में उनकी जीत की संभावना अभी से जताई जा रही है. मायावती पहले भी चार बार राज्य की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं.

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उनके अलावा फिलहाल केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल उमा भारती ने भी शादी नहीं की.

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वहीं कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी सिंगल ही हैं.

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अतीत में भी सिंगल रहे नेता भारतीय राजनीति में शिखर पर पहुंचते रहे हैं. अटल बिहारी वाजपेयी अब तक देश के इकलौते कुंवारे प्रधानमंत्री रहे हैं.
उनसे पहले, जवाहर लाल नेहरू जब प्रधानमंत्री थे जो उस समय वो सिंगल ही थे. 17 साल तक भारत के प्रधानमंत्री रहे नेहरू की पत्नी कमला नेहरू का देहांत 1936 में हो गया था.

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नेहरू के अलावा इंदिरा गांधी भी 1966 में जब पहली बार प्रधानमंत्री बनीं थीं तब उनके पति फिरोज गांधी का देहांत हुए छह साल बीत चुके थे.
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