'शाही रसगुल्ला' पर मौसम की मार

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    • Author, मनीष शांडिल्य
    • पदनाम, पटना से, बीबीसी हिन्दी के लिए

गर्मी की मार इस बार बिहार के लीची उगाने वाले किसानों पर भी पड़ रही है. बिहार का मुजफ्फ़रपुर ज़िला मीठी-रसीली शाही लीची का प्रमुख उत्पादक है.

यह ज़िला लीची के बगानों के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है. लीची को पेड़ पर उगने वाला रसगुल्ला भी कहते हैं.

लेकिन पूरे अप्रैल महीने में पड़ी रिकार्ड तोड़ गर्मी और अब तक बारिश न होने का असर शाही लीची के उत्पादन और इसकी गुणवत्ता पर भी पड़ना तय माना जा रहा है.

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किसानों का कहना है कि अनुकूल मौसम नहीं मिल पाने की वजह से बागों में तेजी से लीची के फल झड़ रहे हैं. यहां तक कि आबो-हवा में नमी नहीं रहने के कारण सिंचाई से भी ज़्यादा फ़ायदा नहीं हो रहा है.

लीची उगाने वाले ज़िले के एक प्रमुख किसान भवानी शंकर बताते हैं, ‘‘मंजर बहुत बढ़िया आया था. लेकिन इतना लंबा सूखा मौसम रहा, इतनी ज़्यादा पछुआ हवा चली कि मंजर तो क्या पेड़ों के पत्ते तक झुलस गए. ऐसे मौसम ने लीची की फसल को बर्बाद कर दिया.’’

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जानकारों के मुताबिक ज़िले में हर साल करीब तीन लाख टन लीची का उत्पादन होता है. इस साल लीची के उत्पादन में 30 से 40 फ़ीसद तक की कमी की बात कही जा रही है.

लीची के निर्यातक और राधाकृष्ण इंपैक्स प्राइवेड लिमिटेड के निदेशक आलोक केडिया आशंका जताते हैं, ‘‘एक्सपोर्ट क्वालिटी की लीची की फसल शायद इस बार तैयार नहीं हो. लगातार पछुआ हवा चलने के कारण इस बार लीची की साइज छोटी रहेगी. बड़े पैमाने पर लीची पर काले दाग भी आ गए हैं.’’

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हालांकि बिहार में बीते तीन दिनों में पारा गिरा है. आलोक इसे लीची के लिए बहुत अनुकूल मौसम बताते हैं. साथ ही उनका ये भी ये भी कहना है कि अगर अब भी बारिश हो गई तो और बेहतर रहेगा.

आलोक केडिया जिस बदले मौसम की बात कर रहे हैं, उसे पटना स्थित भारतीय मौसम विज्ञान केंद्र के पूर्वानुमान से भी और मज़बूती मिलती दिख रही है.

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केंद्र ने चार मई को बिहार के दक्षिण-पश्चिम इलाके को छोड़ लगभग पूरे बिहार में हल्की बारिश का पूर्वानुमान लगाया है. बावजूद इसके मुजफ़्फ़रपुर में लीची की पैदावार बहुत कम होने की आशंका बनी हुई है.

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