गुजरात में नई आरक्षण पॉलिसी का ऐलान

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गुजरात सरकार ने राज्य में आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग को शिक्षा और नौकरी में 10 प्रतिशत आरक्षण देने का फ़ैसला किया है.
अहमदाबाद से स्थानीय पत्रकार प्रशांत दयाल ने बताया कि शुक्रवार को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की मौजूदगी में प्रदेश नेताओं की बैठक हुई जिसमें आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को आरक्षण देने का फ़ैसला किया गया.
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष विजय रूपनी ने इस फ़ैसले की घोषणा करते हुए बताया कि जो ऊंची जातियां आर्थिक रूप से पिछड़ी हैं, उन्हें इसमें 10 प्रतिशत की हिस्सेदारी मिलेगी.
रूपनी ने बीबीसी से बात करते हुए बताया कि जिनकी मासिक आमदनी 50 हजार रुपये है उन्हें आरक्षण का लाभ मिलेगा.
यानी इस आरक्षण के दायरे में वैसे परिवार आएंगे जिनकी आमदनी का दायरा 6 लाख रुपये सालाना से कम है.

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इस बारे पूरे देश में चर्चा हो रही थी कि आर्थिक पिछड़ेपन को आरक्षण का आधार बनाया जाए या नहीं.
गुजरात में आरक्षण को लेकर चल रहे पाटीदार आंदोलन के कारण पंचायत के चुनाव में भाजपा को भारी नुकसान हुआ था.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वर्ष 2017 में विधानसभा के चुनाव होने हैं इसी वजह से आर्थिक आधार पर आरक्षण देने का फ़ैसला किया गया है.
1 मई को इस आरक्षण के लिए अधिसूचना जारी की जाएगी. इन सामान्य श्रेणी के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों में पाटीदार भी शामिल होंगे.
बीते साल गुजरात के पाटीदार समुदाय के लोगों ने आरक्षण की मांग करते हुए पूरे राज्य में आंदोलन चलाया था.
इसके नेता हार्दिक पटेल को हिरासत में लेने के बाद हिंसा भड़क उठी थी. इसमें कुछ लोगों की मौत भी हो गई थी.

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इस आंदोलन में बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ और आगज़नी की घटनाएं हुई थीं.
हार्दिक और उनके समर्थकों पर राष्ट्रद्रोह का अभियोग लगाया गया.
हार्दिक पटेल की अगुवाई वाले संगठन पाटीदार अनामत आंदोलन समिति राज्य सरकार के फ़ैसलों की आलोचना करती रही है.
पिछले साल अक्टूबर में गिरफ़्तार किए गए पाटीदार अनामत आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल सूरत में लाजपोर जेल में बंद हैं.
पटेल समुदाय गुजरात का सबसे संपन्न और मजबूत वर्ग माना जाता है. गुजरात की कुल जनसंख्या की लगभग 15 फ़ीसदी आबादी पटेलों की है.
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