हाइवे पर उतरे किसान, हड़ताल की धमकी

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    • Author, समीरात्मज मिश्र
    • पदनाम, लखनऊ से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

गन्ने के मूल्य बढ़ाने की मांग को लेकर उत्तर प्रदेश के गन्ना किसान सोमवार को सड़कों पर उतरे.

भारतीय किसान यूनियन के नेतृत्व में किसानों ने राज्य से गुज़रने वाले प्रमुख राजमार्गों पर जाम लगाया जिससे सड़कों पर गाड़ियों की लंबी क़तारें लग गईं. जाम के कारण यात्रियों को परेशानी भी उठानी पड़ी.

देर शाम किसानों की राज्य के मुख्य सचिव के साथ वार्ता भी हुई लेकिन गन्ने के दाम बढ़ाने पर कोई नतीजा नहीं निकला.

भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने बीबीसी को बताया कि मुख्य सचिव के साथ उनकी वार्ता ठीक ठाक रही लेकिन गन्ने के मूल्य और किसानों के बक़ाए की अदायगी पर कोई सार्थक आश्वासन नहीं मिला है.

टिकैत का कहना था कि इसके लिए सरकार को पंद्रह दिन का समय दिया गया है.

एनएच 58 पर किसानों ने सुबह 11 बजे मुज़फ़्फ़रनगर-खतौली के बीच हाईवे पर तंबू गाड़ दिये और यहीं पंचायत की. जाम के कारण दिल्ली से हरिद्वार और देहरादून की ओर जाने वाला यातायात प्रभावित रहा.

एनएच 24 और दूसरे हाइवे पर भी लंबे जाम लगे रहे. हालांकि मुख्य सचिव से वार्ता के बाद जाम तो हटा लिया गया लेकिन पंद्रह दिन के भीतर मांगें न मानने पर और उग्र आंदोलन की चेतावनी दी गई है.

वहीं सरकार ने फ़िलहाल गन्ने का दाम बढ़ाने से साफ़ इंकार कर दिया है. राज्य सरकार के प्रवक्ता और कैबिनेट मंत्री राजेंद्र चौधरी कहते हैं कि सरकार ने दो साल पहले एकमुश्त चालीस रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की है, इसलिए अब दाम बढ़ाने का सवाल ही नहीं है.

वहीं भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत का कहना था कि सरकारें लगातार किसानों की अनदेखी कर रही हैं और यदि यह सिलसिला नहीं रुका तो किसान हड़ताल करने पर विवश हो जाएंगे.

उत्तर प्रदेश सरकार ने पिछले तीन साल से गन्ने का दाम नहीं बढ़ाया है जिसे लेकर किसानों में नाराज़गी है. किसानों के करोड़ों रुपये चीनी मिलों पर बक़ाया भी हैं.

वहीं जानकारों का कहना है कि सरकार अभी तो नहीं लेकिन अगले सीज़न में गन्ने का दाम बढ़ा सकती है क्योंकि 2017 में होने वाले विधान सभा चुनाव में वो किसानों की नाराज़गी झेलने की बजाय उन्हें ख़ुश करना चाहेगी.