आरएसएस पर केरल के मुख्यमंत्री का पलटवार

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- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
केरल के मुख्यमंत्री ओमन चांडी ने आरएसएस के अंग्रेजी भाषा के मुखपत्र ऑर्गनाइज़र पर ज़ोरदार पलटवार किया है.
उन्होंने अख़बार के संपादकीय बोर्ड को एक खुली चिट्ठी लिखी है. चांडी ने ऑर्गनाइज़र में छपे एम सुरेंद्र नाथ के लेख 'केरल: गॉड्स ओन कंट्री ऑर गॉडलेस कंट्री?' का जवाब देते हुए उसमें उठाए गए मुद्दों पर अपना पक्ष रखा है.
चांडी के मुताबिक़, "लेख में कहा गया है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में फैला सांप्रदायिकता का ज़हर अब केरल के दरवाजे तक पंहुच गया है."

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चांडी ने इसका ज़ोरदार खंडन करते हुए लिखा, "साल 1992 में बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद केरल में एक पत्ता तक नहीं हिला था. मैं यह भी याद दिलाना चाहूंगा कि देश के दूसरे हिस्सों के उलट केरल में सांप्रदायिक हिंसा कभी बेकाबू नहीं हुई. समाज सुधारक श्री नारायण गुरु की शिक्षाएं केरल के लोगों को मिली हैं और सहिष्णुता मलयाली मानसिकता का हिस्सा है."
वे लिखते हैं, "सातवीं सदी में कोडनगल्लुर के हिंदू राजा चेरामन पेरुमल ने अपनी ज़मीन मस्जिद बनाने के लिए दी थी और वहां देश की पहली मस्जिद बनाई गई थी. इसी तरह हिंदू राजा भास्कर रवि वर्मा ने यहूदी व्यापारी जोजफ़ रब्बन को आठवी सदी में यहां बस जाने को कहा था. कोपरनिकस से लगभग 1,000 साल पहले आर्यभट्ट ने पृथ्वी के आकार का पता लगाया था."

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केरल के मुख्यमंत्री ने अपनी चिट्ठी में लिखा, "सुरेंद्र नाथ ने शराब के मुद्दे पर कन्नूर का मजाक उड़ाया है और कहा है कि यह 'किलिंग फील्ड' बन चुका है. पर मैं यह बता दूं कि केरल में आरएसएस और भाजपा के कार्यकर्ता और उनके जवाब में भारतीय मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के कैडर ख़ून ख़राबा में शामिल हैं."
चांडी लिखते हैं, "अद्वैत वेदांत के दार्शनिक नित्य चैतन्य यति ने केरल को ईश्वर का बाग कहा था. मैं ऑर्गनाइज़र से यह अपील करता हूं कि वे इस बाग में ज़हर का विनाशकारी बीज बोने से बाज आएं."
उन्होंने आरएसएस के मुखपत्र से यह भी कहा कि वे इस लेख को तुरत वापस ले लें.
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