संघ की सदस्यता के लिए लग रही क़तारें

आरएसएस

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    • Author, रवि प्रकाश
    • पदनाम, रांची से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ की सदस्यता लेने वालों में पिछले चार सालों में साढ़े इक्कीस सौ प्रतिशत का इज़ाफ़ा हुआ है.

आरएसएस के राष्ट्रीय प्रचार प्रमुख डा मनमोहन वैद्य के मुताबिक़ चार साल पहले यानी साल 2011 तक सिर्फ़ 354 लोग हर महीने संघ से जुड़ रहे थे.

लेकिन अब वो तादाद आठ हज़ार को पहुंच गई है.

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डा वैद्य ने रांची में पत्रकारों को बताया कि साल 2012 में हर माह एक हज़ार लोग आरएसएस से जुड़ा करते थे. वर्ष 2013 में ये ढ़ाई हज़ार पहुंच गई.

आरएसएस की बैठक

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साल 2014 में सात हज़ार लोग हर महीने संघ से जुड़ रहे थे. जबकि पिछले माह अक्तूबर 2015 तक यह संख्या 8 हज़ार हो गयी है.

आरएसएस नेता का कहना था कि इनमें ज़्यादातर 25 से 35 के हैं.

रांची में संगठन के राष्ट्रीय कार्यमंडल की बैठक जारी है.

इसमें जनसंख्या वृद्धि में कथित असमानता पर प्रस्ताव लाया जा रहा है. संघ लगातार बढ़ती मुस्लिम आबादी को लेकर चिंतित है.

डॉ वैद्य ने कहा कि “2011 की जनगणना रिपोर्ट में जिस तरह की बातें सामने आईं हैं उसपर संघ चुप नहीं बैठ सकता.''

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इमेज कैप्शन, रांची में 30 अक्तूबर को शुरू हुई बैठक तीन दिन चलेगी.

उन्होंने कहा, हज़ारिका आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2050 तक असम और पश्चिम बंगाल में भारतीय ही अल्पसंख्यक हो जाएंगे.

उन्होंने कहा कि संघ ने जनसंख्या वृद्धि में हो रही असमानता पर नियंत्रण करने वाली नीति की सिफारिश की है.

बैठक में सरसंघचालक मोहन भागवत और विश्व हिंदू परिषद के नेता प्रवीण तोगाड़िया भी मौजूद हैं.

मोहन भागवत

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आरएसएस के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले ने पुरस्कार लौटाने वालों को कुंठित बताया.

होसबले ने कहा संघ सहिष्णुता का पक्षधर है और असहिष्णुता के हर मामले के केंद्र को ज़िम्मेदार बताना ग़लत है.

होसबले ने ये भी साफ़ किया कि संघ आरक्षण विरोधी नहीं लेकिन वो उसकी समीक्षा चाहता है.

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