बीफ़ खाने से रोक नहीं सकते: इंजीनियर रशीद

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- Author, माजिद जहांगीर
- पदनाम, श्रीनगर से, बीबीसी हिन्दी डॉटकॉम के लिए
जम्मू कश्मीर विधानसभा में आठ अक्तूबर को बीफ़ पार्टी के मुद्दे पर भाजपा विधायकों ने निर्दलीय विधायक इंजीनियर रशीद के साथ मारपीट की थी.
इंजीनियर रशीद ने इसके जबाव में अपनी व्यक्तिगत और धार्मिक स्वतंत्रता का हवाला देते हुए मारपीट की घटना की निंदा की है. वे इस घटना की तुलना दादरी हत्याकांड से भी करते हैं. पेश से उनके साथ बातचीत के मुख्य अंश
<bold><link type="page"><caption> बीफ़ पर जम्मू-कश्मीर विधानसभा में मारपीट </caption><url href="http://www.bbc.com/hindi/india/2015/10/151008_mla_thrashed_kashmir_assembly_ra" platform="highweb"/></link></bold>

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सवाल: बीफ़ पार्टी की ज़रूरत आख़िर क्या थी ?
इंजीनियर रशीद: पार्टी का मक़सद ये संदेश देना था कि जिस चीज़ की मेरे धर्म में इजाज़त है, उससे मुझे कोई रोक नहीं सकता. हिंदू दोस्तों को भी अपने धर्म के हिसाब से चलने की इजाज़त है. बर्दाश्त करने का मतलब ये नहीं है कि आप अपने अधिकारों का आत्मसमर्पण कर दें. बर्दाश्त का मतलब ये है जिसकी जो मर्ज़ी है खा सकता है.
सवाल: क्या आपने बीफ़ मामले में क़ानून की अवज्ञा नहीं की है?
इंजीनियर रशीद: मैंने कोई क़ानून नहीं तोड़ा. सुप्रीम कोर्ट मना करे फिर भी मैं बीफ़ खाउँगा क्योंकि ये मेरे धर्म, मेरी आस्था का मामला है. मैंने किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए ऐसा नहीं किया. हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट, विधानसभा किसी को भी इस मामले में टांग नहीं अड़ानी चाहिए.

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सवाल: जब आप बीफ़ पर प्रतिबंध के ख़िलाफ़ विधानसभा में प्रस्ताव पहले ही रख चुके थे तो बीफ़ पार्टी की क्या ज़रूरत थी?
इंजीनियर रशीद: विधानसभा में उस प्रस्ताव पर चर्चा होती, वोटिंग होती या फिर उसे रद्द ही कर दिया जाता तो हम मानते कि बात हुई. लेकिन जम्मू कश्मीर की विधानसभा तो दिल्ली से रिमोट कंट्रोल से चल रही है. स्पीकर को क्या कहना है, उन्हें पहले मोहन भागवत से पूछना पड़ता है. मुफ़्ती साहब को राम माधव से पूछना पड़ता है. ये विधानसभा हमारे अरमानों और जज़्बातों का क़ब्रिस्तान बन चुकी है.
सवाल: क्या आपको नहीं लगता कि आपकी बीफ़ पार्टी से जम्मू के लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंची है?
इंजीनियर रशीद: मुझे पूरा विश्वास है कि जम्मू के 99 प्रतिशत लोग जो मेरे दोस्त और भाई हैं, जो साम्प्रदायिक नहीं हैं, उनकी भावनाओं को ठेस नहीं पहुंची है. जब वो कोई चीज़ खाते हैं तो मुझे कुछ नहीं होता. उनका धर्म भी उन्हें यही कहता है कि जो खाना चाहो खाओ.

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सवाल: पहले बीफ़ के समर्थन में बिल पर हस्ताक्षर मुहिम और फिर बीफ़ पार्टी का आयोजन. आप इससे साबित क्या करना चाहते हैं.
इंजीनियर रशीद: मैं और क्या करता. शर्म तो उन्हें आनी चाहिए कि हमारे धर्म को सुप्रीम कोर्ट में न ले जाते. मेरी मुहिम में 1,25,000 लोग जुड़ गए हैं. सबसे बड़ी अदालत लोग होते हैं. लोग कहें कि हम बीफ़ खाना बंद कर दें तो मुझे श्रीनगर के लाल चौक पर फांसी से लटका दो.
सवाल: आपको नहीं लगता कि जिन लोगों ने विधानसभा में आपके साथ मारपीट की, उन्हें जज़्बात आपकी बीफ़ पार्टी से आहत हुए होंगे?
इंजीनियर रशीद: अगर मान भी लें कि मेरी बीफ़ पार्टी से उनकी भावना को ठेस पहुंची लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि आप विधानसभा के भीतर अपने साथी पर घात लगाकर हमला करें. मैं एक था और वो 27 लोग. अगर वो 27 लोग विधानसभा में कह देते कि इसने हमारी भावना को ठेस पहुंचाई तो भी मैं उनकी बात रख लेता. जो वो विधायक होस्टल में शराब पीते हैं तो क्या उससे हमारी भावना को ठेस नहीं पहुंचती?
STY40725766दादरी हत्याकांड दुनिया भर में सुर्ख़ियों मेंदादरी हत्याकांड दुनिया भर में सुर्ख़ियों मेंदुनिया भर के मीडिया ने दादरी में एक मुसलमान की हत्या की ख़बर को प्रमुखता से प्रकाशित किया है.2015-10-02T11:14:04+05:302015-10-02T12:00:42+05:302015-10-02T12:00:42+05:302015-10-02T15:39:43+05:30PUBLISHEDhitopcat2

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मैंने तो सिर्फ गो हत्या की थी किसी इंसान को तो नहीं मारा था. दादरी की घटना और मेरे साथ जो हुआ, उसमें क्या फर्क है, मुझे बताएं. दादरी की घटना के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पूरे देश से माफ़ी मांगनी चाहिए.
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