एफ़टीआईआई हड़ताल के 100 दिन

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    • Author, देवीदास देशपांडे
    • पदनाम, मुंबई से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

शनिवार को भारतीय फिल्म एवं टेलीविज़न इन्स्टिट्यूट (एफ़टीआईआई) में जारी हड़ताल के 100 दिन पूरे हो गए.

छात्र टीवी कलाकार गजेंद्र चौहान को एफ़टीआईआई का चेयरमैन बनाए जाने का विरोध कर रहे हैं.

संस्थान के इतिहास में ये अब तक की सबसे लंबी हड़ताल है. इस मौके पर पुणे, कोलकाता और मुंबई में छात्रों के समर्थन में कई कार्यक्रम किए गए. फ़िल्म उद्योग की कई हस्तियों ने इन कार्यक्रमों में हिस्सा लिया.

इनमें राजीव रवी, निष्ठा जैन, निर्देशक ऑनीर और तीन बार राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता एडिटर अजीत कुमार शामिल हुए.

एफटीआईआई हड़ताल

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छात्रों के समर्थन में नई दिल्ली में सरकार के विरोध में प्रदर्शन आयोजित किया गया.

हैदराबाद से कुछ छात्र और मुंबई से स्ट्रीटप्ले दल रिपब्लिकन पँथर नाम का एक संगठन भी संस्था में आए.

पहले भी चला था आंदोलन

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इससे पहले सन् 2000 में छात्रों का आंदोलन छह महीने चला था.

लेकिन उस समय छात्रों की कक्षाएँ जारी रही थीं.

इस बार चूंकि छात्रों ने पाठ्यक्रम का बहिष्कार किया है इसलिए पूरे संस्थान का काम ठप हो चुका है.

सरकार बातचीत के लिए राज़ी

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हालांकि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने छात्रों के साथ चर्चा करने में तत्परता दिखाई है और छात्रों ने इस पहल का स्वागत भी किया है. लेकिन यह चर्चा कहाँ और कब होगी, इसे लेकर असमंजस की स्थिति है.

हड़ताली छात्रों के प्रवक्ता अमेय गोरे ने कहा, "दो या तीन दिनों में चर्चा शुरू होने की हमें उम्मीद है लेकिन निश्चित तौर पर कुछ कहा नहीं जा सकता. चर्चा होने पर भी हड़ताल जारी रहेगी क्योंकि हमारा सरकार पर विश्वास नहीं है.''

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गोरे का कहना है ''हमें रिकार्ड बनाने में रुचि नहीं है बल्कि हमने जिन सिद्धांत के साथ यह आंदोलन शुरू किया था उन्हें कायम रखना है. हम सरकार के साथ किसी प्रकार की सौदेबाज़ी नहीं करेंगे."

गोरे ने कहा कि एफ़टीआईआई छात्रों से प्रेरणा लेकर दूसरे छात्र भी अधिकारों के प्रति सजग हुए हैं और उन्होंने भी अपनी मांगें उठानी शुरू की हैं.

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