शौचालय में 'भूत-प्रेत' का डर!

पटरी किनारे शौच करते लोग
    • Author, सुरंजना तिवारी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

क्या आप जानते हैं पूरी दुनिया में लगभग एक अरब से ज़्यादा लोग खुले में शौच करते हैं क्योंकि उनके पास शौचालय की सुविधा नहीं हैं.

भारत में भी आबादी का एक बड़ा हिस्सा शौचालयों से वंचित और खुले में शौच के लिए मजबूर है.

लेकिन जहां सार्वजनिक शौचालय की सुविधा है, वहां भी लोगों में खुले में शौच की आदत देखी गई है.

खुले में शौच से बच्चों के स्वास्थ्य पर बेहद बुरा असर पड़ सकता है क्योंकि मल-मूत्र के ज़रिए कई तरह की बीमारियां फैलती हैं.

इन्हीं बीमारियों की वजह से भारत में हर साल हज़ारों बच्चे मारे जाते हैं.

इस समस्या के निजात पाने के लिए गुजरात के अहमदाबाद में एक अनूठी पहल की गई है.

इस पहल के तहत बच्चों को भुगतान किया जाता है ताकि वे खुले में शौच करने के बजाए सार्वजनिक शौचालयों का इस्तेमाल करें.

अहमदाबाद के चांदलोड़िया इलाके में झुग्गी-बस्तियों में रहने वाले लोग शौच के लिए रेल लाइन के आसपास जाते हैं.

'शौचालय में भूत-प्रेत'

सार्वजनिक शौचालय

गुजरात सैनिटेशन डेवेलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन के अध्यक्ष अनिल प्रजापति कहते हैं, ''हमने यहां सार्वजनिक शौचालय बनाए हैं लेकिन लोग उनका इस्तेमाल नहीं करते.''

अनिल प्रजापति बताते हैं, ''कुछ लोगों को लगता है कि उनमें भूत-प्रेत हैं या उनके बच्चे को कोई अगवा कर लेगा.''

ये गांव-देहात से आए हुए लोग हैं जिनकी शौचालयों का इस्तेमाल करने की आदत आमतौर पर नहीं होती है.

शौच के बदले एक रूपया

भूमि अपने परिवार के साथ
इमेज कैप्शन, अहमदाबाद में भूमि जैसी कई ग़रीब महिलाएं हैं जो अपने घरों में शौचालय नहीं बनवा सकतीं.

अहमदाबाद नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारियों ने बच्चों को शौचालयों तक लाने के लिए अभिनव प्रयोग किया.

डॉक्टर भाविन सोलंकी कहते हैं, ''कुल 320 सार्वजनिक शौचालय हैं और हम 143 शौचालयों में कोई शुल्क नहीं ले रहे हैं. बच्चों को शौचालय इस्तेमाल के बदले हर दिन एक रूपया दे रहे हैं.''

इन बच्चों को चॉकलेट देकर भी लुभाया जा रहा है ताकि वे खुले में शौच करना बंद कर दें.

कई बच्चे इस प्रयास की वजह से सार्वजनिक शौचालयों तक पहुंचने लगे हैं. अधिकारियों को उम्मीद है कि जब बच्चे खुले में शौच बंद कर देंगे तो इससे बड़ों को भी प्रेरणा मिलेगी.

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