बैंक नहीं तो क्या 'पेमेंट बैंक' तो है

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भारतीय रिज़र्व बैंक ने 11 'पेमेंट बैंकों' के लिए लाइसेंस जारी करने की मंज़ूरी दे दी है.
पेमेंट बैंक की सुविधा देने वालों में भारतीय डाक विभाग के अलावा रिलायंस इंडस्ट्रीज और आदित्य बिड़ला नुवो जैसी कंपनियां शामिल होंगी.
साथ ही एयरटेल और वोडाफ़ोन जैसी टेलीकॉम कंपनियों को भी पेमेंट बैंक का लाइसेंस मिला है.
रिज़र्व बैंक को पेमेंट बैंक लाइसेंस के लिए 41 अर्जियां मिली थीं, जिनमें से 11 को लाइसेंस के योग्य पाया गया.
क्या है पेमेंट बैंक

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पेमेंट बैंक में हर खाताधारक अधिकतम एक लाख रुपए तक की राशि जमा कर सकता है.
इसके माध्यम से पैसे का लेन-देन किया जा सकता है. ये बैंक ग्राहकों को एटीएम/डेबिट कार्ड जारी कर सकते हैं.
पेमेंट बैंक इंटरनेट बैंकिंग के ज़रिए लेन-देन की सुविधा भी देंगे.
पेमेंट बैंक से बैंकिंग सिस्टम में कैशलेस ट्रांजेक्शन को बढ़ावा मिलेगा.
पेमेंट बैंक नियमित बैंकों की तरह कर्ज़ नहीं दे सकते. क्रेडिट कार्ड भी जारी नहीं कर सकते.
ये बैंक अपने पास नक़दी या सरकारी प्रतिभूतियां ही रख सकते हैं.
कहाँ से आया ख़्याल

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पेमेंट बैंक के लिए रिज़र्व बैंक ने 2013 में डिस्कशन पेपर जारी किया था. इसके बाद नचिकेत मोर कमेटी का गठन किया गया.
बाद में रिज़र्व बैंक ने पेमेंट बैंक के लाइसेंस जारी करने के लिए नियम-क़ायदे तय किए.
दिलचस्प ये है कि मोर कमेटी ने पेमेंट बैंक के लिए कीनिया में 2007 में वोडाफ़ोन द्वारा शुरू की गई एम-पैसा सर्विस का उदाहरण दिया था. एम-पैसा को अफ्रीका में हाथों-हाथ लिया गया.
आंकड़ों के अनुसार कीनिया की जीडीपी में एम-पैसा की बड़ी भागीदारी है.
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