निजी कंपनी चलाएगी राशन की दुकान

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- Author, आभा शर्मा
- पदनाम, जयपुर से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
राजस्थान में जनवितरण प्रणाली और राशन की दुकानों को चलाने का समझौता एक निजी कंपनी को दे दिया गया है.
समझौते के तहत राज्य की सरकारी राशन की दुकानों पर ब्रांडेड सामान भी बिक्री के लिए उपलब्ध होंगे.
गुरुवार को राजस्थान सरकार के उपक्रम राजस्थान राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम और फ़्यूचर कंज़्यूमर इंटरप्राइजेज लिमिटेड के बीच इस योजना का क़रार हुआ. अब इस तरह की दुकानोंं को 'अन्नपूर्णा भंडार' बुलाया जाएगा.
राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने इस मौक़े पर कहा, “अन्नपूर्णा भंडार राजस्थान के गांवों के लिए 'ग्रामीण मॉल' की तरह काम करेंगे.”
इन दुकानों पर तेल, घी, दालें, गुड़, मसाले, बेसन, मैदा, रवा, अचार, सॉस और टेलकम पाउडर, शैम्पू, क्रीम, टूथब्रश, रेज़र इत्यादि सभी चीज़ें मिलेंगी.
इसके अलावा घरेलू उपयोग की अन्य वस्तुएं जैसे फिनाइल, डिटर्जेंट साबुन, पेन, पेंसिल, नोटबुक जैसे स्टेशनरी उत्पाद और बिस्किट, चोकलेट, वेफर्स, नूडल्स सहित अनेक उत्पाद बिक्री के लिए उपलब्ध होंगे.
पहले चरण में 5000 हज़ार दुकानें

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सरकार के फ़ैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए सामाजिक कार्यकर्ता निखिल डे ने बीबीसी से कहा, “जो राज्य का एकाधिकार है उसे निजी हाथों में नहीं दिया जा सकता."
उन्होंने हैरानी ज़ाहिर कि यह कैसा प्रदेश होता जा रहा है जहाँ शिक्षा, स्वास्थ्य और अब पीडीएस(जनवितरण प्रणाली) तक निजी हाथों में दिया जा रहा है?
राजस्थान सरकार को इसकी प्रेरणा डूंगरपुर के टमटिया गाँव से मिली जहाँ एक ही स्थान पर राशन की दुकान, बैंक, खाद-बीज भण्डार और परचून की दुकान चल रही थी.
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के शासन सचिव सुबोध अग्रवाल ने बताया, “योजना के पहले चरण में प्रदेश की 5,000 उचित मूल्य की दुकानों में इसे लागू किया जाएगा. इस समय एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में जयपुर में पांच और उदयपुर में एक अन्नपूर्णा भण्डार चलाये जा रहे हैं.”
'उचित मूल्य पर'

फ़्यूचर कंज़्यूमर इंटरप्राइजेज समूह के सीईओ किशोर बियानी ने कहा कि आधुनिक रिटेल के फायदे उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से जनता तक पहुंचेंगे.
हालांकि सामाजिक कार्यकर्ता सरकार के निजी कंपनी को यह ठेका देने का विरोध करने की तैयारी कर रहे हैं.
निखिल डे ने बीबीसी से कहा, "इस फ़ैसले का प्रबल विरोध किया जाएगा. छत्तीसगढ जैसे राज्य का उदाहरण हमारे सामने हैं जहाँ यही काम सरकारी या स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से सफलतापूर्वक किया जा रहा है.”
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