'सोनिया के इशारे पर नगा समझौते का विरोध'

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- Author, दिलीप कुमार शर्मा
- पदनाम, गुवाहाटी से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
नगा अलगाववादी संगठन एनएससीएन(आईएम) के साथ हुए समझौते को केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरेन रिजिजू ने सिर्फ़ एक ‘फ्रेम वर्क’ समझौता बताया है.
गुवाहाटी में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के एक कार्यक्रम में हुई मुलाकत में रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर बेवजह की राजनीति कर रही है जबकि एनएससीएन(आईएम) के साथ अभी अंतिम समझौता होना बाक़ी है.
उन्होंने आगे कहा कि मसौदे के भीतर की सामग्री को छिपाने का सवाल ही पैदा नहीं होता और अंतिम समझौता तैयार करने से पहले सभी को भरोसे में लेकर आगे के फैसले लिए जाएँगे.
रिजिजू ने आरोप लगाते हुए कहा कि जब प्रधानमंत्री मोदी ने एनएससीएन (आईएम) के साथ शांति समझौता करने की घोषणा की थी उस समय पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इसका स्वागत किया था, लेकिन अब पार्टी प्रमुख सोनिया गांधी के कहने पर ये लोग विरोध पर उतर आए है.
उनका कहना था कि यह पूरा मामला पूर्वोत्तर क्षेत्र की सुरक्षा और वहां शांति स्थापित करने की बात से जुड़ा हुआ है और इस मुद्दे पर कांग्रेस को राजनीति नहीं करनी चाहीए.
मुख्यमंत्रियों का विरोध

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असम, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर के मुख्यमंत्रियों ने केंद्र पर आरोप लगाते हुए शुक्रवार को कहा था कि नगा समझौते से पहले उनसे राय नहीं ली गई.
इसके जवाब में केंद्रीय वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि नगा समझौते से दो दिन पहले नगालैंड विधानसभा अध्यक्ष के नेतृत्व में सभी पार्टी के प्रतिनिधिमंडलों के साथ नगालैंड के मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से मुलाकात की थी.
इस बीच शनिवार को केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने मणिपुर के मुख्यमंत्री ओ इबोबी सिंह के साथ एक बैठक कर उन्हें आश्वासन दिया.
राजनाथ सिंह ने कहा कि अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर करने से पहले सभी लोगों से राय ली जाएगी और केंद्र सरकार पूर्वोत्तर राज्यों के हितों की पूरी रक्षा करेगी.
कांग्रेस का हमला

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केंद्र सरकार के तमाम जवाबों के बावजूद कांग्रेस नगा समझौते को लेकर लंबी राजनीतिक लड़ाई लड़ने की तैयारी में दिख रही है.
पहले कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने नगा समझौते को लेकर सरकार पर अहंकारी होने का आरोप लगाया था. अब पार्टी के मुख्यमंत्रियों को नई दिल्ली बुलवाकर सरकार पर हमले तेज़ कर दिए हैं.
केंद्र और एनएससीएन (आईएम) के बीच 3 अगस्त को समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे.
एनएससीएन (आईएम) की मुख्य मांग नगा आबादी वाले क्षेत्रों को मिलाकर ‘वृहत्त नगालिम’ बनाए जाने की है और शुरू से ही इस बात का मणिपुर, नगालैंड और असम विरोध करते आ रहे हैं.
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