'न खाता न बही, जो केजरीवाल कहें, वही सही'

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आम आदमी पार्टी की मौजूदा अंदरूनी कलह ने विपक्षी राजनीतिक दलों को उस पर हमला बोलने का एक और मौका दे दिया है.
शनिवार को आप की राष्ट्रीय परिषद की बैठक के अंदर और बाहर जमकर बवाल हुआ. योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण को राष्ट्रीय कार्यकारिणी से हटा दिया गया.
योगेंद्र यादव ने इसे अलोकतांत्रिक और शर्मनाक़ बताया.

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कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी ने इस घटना को अपनी भविष्यवाणी से जोड़ा है तो शांति भूषण और अन्ना हज़ारे ने कोई राय ज़ाहिर करने से इंकार कर दिया.
वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने ट्वीट किया, "मेरे शब्दों को याद रखिए, वो आखिरकार आप से सभी सेक्युलर और उदार लोकतांत्रिक लोगों को निकाल बाहर करेंगे."

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दिग्विजय ने लिखा, "न खाता न बही, जो केजरीवाल कहें वही सही! क्या मैंने केजरीवाल की कार्यशैली के बारे में सही अनुमान नहीं लगाया था."
'कल जनता उनके साथ यही करेगी'
वरिष्ठ भाजपा नेता और वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा, "इस सरकार को लोगों ने बड़ी उम्मीद से वोट दिया था, इस मौके को राजनीतिक अनुभवहीनता के कारण जाया नहीं होने देना चाहिए."

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कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने कहा, "आज जो कुछ वो अपने सदस्यों के साथ कर रहे हैं, कल जनता उनके साथ करेगी."
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, "पहले आप को अपना घर ठीक करना चाहिए और फिर दिल्ली में अपने किए वादे पूरे करने चाहिए. हमारी यही मुख्य चिंता है."
दिल्ली प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष सतीश उपाध्याय ने कहा, "इसमें कुछ भी नया नहीं है. आप सुप्रीमो के ख़िलाफ़ जो भी आवाज उठाता है, उसे बाहर का रास्ता दिखाया दिया जाता है."
'मेरी समझ से बाहर है'

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आप से भाजपा में गईं शाज़िया इल्मी कहती हैं, "आप कुछ समय के लिए कुछ लोगों को मूर्ख बना सकते हैं, कभी-कभी सभी लोगों को कुछ समय के लिए मूर्ख बना सकते हैं, लेकिन सभी लोगों को हमेशा ही मूर्ख नहीं बना सकते."
सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने पार्टी की प्राथमिक सदस्याता छोड़ने की घोषणा करते हुए कहा, "मैंने पार्टी में किसी भी पद को स्वीकार नहीं किया, लेकिन एक सदस्य के रूप में वहां निराशा थी."
केजरीवाल के राजनीतिक गुरु कहे जाने वाले अन्ना हज़ारे ने कहा, "यह आप का आंतरिक मामला है, मैं इसमें क्यों पड़ूं. यह मेरी समझ से बाहर है."
'यह लोकतंत्र की मौत है'

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इस पूरे हंगामे को लेकर शांति भूषण ने प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया.
उधर योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण की प्रेस कांफ्रेंस में आप नेता धर्मवीर गांधी ने कहा, "यह गुंडागीरी थी. यह लोकतंत्र की मौत है, न कि उस पार्टी की जिसके लिए हमने काम किया."
इस दौरान प्रशांत भूषण ने कहा, "आज वही हुआ जो अरविंद केजरीवाल ने कल कहा था. हमें धक्के देकर बाहर निकाल दिया गया."
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