प्रशांत-योगेंद्र को निकालने के मूड में 'आप'?

प्रशांत भूषण, अरविंद केजरीवाल और योगेंद्र यादव

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    • Author, ज़ुबैर अहमद
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

भारतीय टीवी चैनलों पर मनोरंजन और धारावाहिकों की कमी नहीं है. पिछले कुछ सप्ताह से आम आदमी पार्टी (आप) भी इसमें अपना भरपूर योगदान दे रही है.

इसका पहला मनोरंजक चरण दिल्ली विधानसभा में इसकी भारी जीत के बाद ही देखने को मिला, जो आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल के खिलाफ योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण की खुली बग़ावत के रूप में सामने आया.

केजरीवाल के क़रीबी समझे जाने वाले पार्टी नेता आशुतोष ने एक ट्वीट के ज़रिए इसे विचारों का टकराव कहा था. योगेंद्र यादव की 'लेफ्ट विचारधारा' और अरविंद केजरीवाल की 'व्यावहारिक कार्य प्रणाली' के बीच एक तकरार है.

विचारों की लड़ाई

अरविंद केजरीवाल, योगेंद्र यादव, मनीष सिसोदिया और प्रशांत भूषण

लेकिन ताज़ा मनोरंजक धारावाहिक के दूसरे चरण में अब ये साफ़ हो गया है कि ये विचारों के टकराव से अधिक शायद अहम की लड़ाई है.

पार्टी के अधिकतर कार्यकर्ताओं को अब ये लगने लगा है कि यादव और भूषण को केवल केजरीवाल से समस्या है.

पार्टी के एक नेता ने कहा कि गुरुवार को दोनों खेमों में सुलह सफाई के लिए बैठक हुई. बैठक में यादव और भूषण ने मांग की कि केजरीवाल को संयोजक के पद से हटाया जाए. जबकि केजरीवाल के समर्थकों ने साफ़ कह दिया कि ये संभव नहीं है.

आप के समर्थक

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पार्टी प्रवक्ता संजय सिंह ने कहा कि बैठक इस तरह से ख़त्म हुई कि लगा कि पार्टी की स्थिति से ‘अहम’ अधिक महत्वपूर्ण था

खुद केजरीवाल बाहर से इस्तीफा देने को तैयार नज़र आते हैं. लेकिन पार्टी के ख़ास नेताओं को उन्होंने साफ़ कह दिया है कि उन्हें पार्टी और दिल्ली सरकार के फैसलों को लागू करने के लिए 'फ्री हैंड' चाहिए.

बाहर का रास्ता

दिल्ली विधानसभा चुनाव में मिली जीत के बाद अरविंद केजरीवाल और अन्य नेता.

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शनिवार को 'आप' की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की एक अहम बैठक होने वाली है. अटकलें लगाई जा रही हैं कि इसमें योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाए.

'आप' की वेबसाइट पर पार्टी के आम कार्यकर्ताओं की टिप्पणियां छापी जाती हैं. उन्हें पढ़ कर ऐसा लगता है कि पार्टी के अंदर अब यादव और भूषण को इससे निकाले जाने का मूड बन गया है. अधिकतर टिप्पणियां दोनों को निकाले जाने के पक्ष में हैं.

प्रशांत भूषण

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केजरीवाल खेमे का भी यही मूड है. यादव और भूषण के साथ केजरीवाल के मतभेद इतने गहरे हो चुके हैं कि सुलह-सफाई के रास्ते जैसे बंद हो चुके हैं.

अब सबकी निगाहें शनिवार को होने वाली पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक पर लगी हुई हैं.

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