'सरकार बदली, भारत की विदेश नीति नहीं'

- Author, रोहित जोशी
- पदनाम, बीबीसी हिन्दी डॉटकॉम के लिए
नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री और एनेकपा माओवादी के वरिष्ठ नेता बाबू राम भट्टराई का मानना है कि भारत में कोई भी सरकार आए उसकी विदेश नीति नहीं बदलती.
उन्होंने बीबीसी से एक मुलाक़ात में कहा, "भारत में दक्षिणपंथी भाजपा के सरकार में आने के बाद भी नेपाल के साथ भारत के रिश्ते पहले जैसे ही हैं और इससे नेपाल में दक्षिणपंथ को कोई मदद नहीं मिली. वहां वामपंथी विचारधारा ही अब भी मज़बूत है."
हालांकि उन्होंने माना कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछली दो नेपाल यात्राओं का वहां 'सकारात्मक असर' हुआ है.
'भारत से सहयोग'

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भारत-नेपाल संबंधों में आए गतिरोध को 'ख़त्म' करने के लिए भारत सरकार और इसके राजनीतिक दलों के साथ बातचीत के लिए बाबूराम भट्टाराई नई दिल्ली के दौरे पर हैं.
उन्होंने कहा है कि इस दौरे में अलग-अलग पार्टी नेताओं और बुद्धिजीवियों से हुई उनकी बातचीत में सबका रवैया सहयोगपूर्ण रहा है.
'हथियार नहीं उठाएंगे'

दूसरी संविधान सभा के गठन के एक साल गुज़र जाने के बाद भी नेपाल में संविधान लिखने का काम पूरा नहीं हुआ है, इस पर बना गतिरोध बरक़रार है.
असहमति उन्हीं मुद्दों पर बनी हुई है जिन पर पिछली बार भी सहमति नहीं बन पाई थी. लेकिन एनेकपा (माओवादी) हथियार उठाकर फिर से जन युद्ध शुरू करने पर नहीं सोच रही है.
भट्टराई ने कहा है, "नेपाल की जनता की राजनीतिक चेतना जिस ऊंचाई तक पहुँच गई है, ऐसे में शांतिपूर्ण ढंग से ही प्रतिगामी ताकतों को पीछे धकेला जा सकता है और इस गतिरोध को तोड़ा जा सकता है."
उन्होंने कहा कि ऐसे में एक बार फिर जन युद्ध शुरू करने की अभी कोई ज़रूरत भी नहीं है.
गतिरोध की वजह

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भट्टराई ने कहा है कि गतिरोध इस वजह से बरकरार है कि सत्तारूढ़ यूएमएल और नेपाली कांग्रेस ‘पुराने ढर्रे की वेस्टमिंस्टर संसदीय प्रणाली को लागू कराना चाहते हैं जबकि माओवादी एक ‘व्यापक सर्व समावेशी लोकतंत्र’ स्थापित करना चाहते हैं.

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भट्टराई कहते हैं कि ‘अगर ‘पुराने ढर्रे की वेस्टमिंस्टर संसदीय प्रणाली’ ही लागू हो जाती है तो उनके लिए ‘क्रांति के पहले चरण की’ कोई उपलब्धि नहीं रह जाएगी.
वे कहते हैं कि ‘इसलिए उनके पास समझौता करने का कोई विकल्प नहीं है.’
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