जेल में मीडिया को दिए गए 5 चर्चित इंटरव्यू

अफ़ज़ल गुरु

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    • Author, ज़ुबैर अहमद
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

दिल्ली गैंगरेप के दोषियों में से एक मुकेश सिंह के इंटरव्यू वाली लेज़्ली उडविन की डॉक्यूमेंट्री 'इंडियाज़ डॉटर' से भारत में हुए विवाद के पीछे कई तर्क दिए जा रहे हैं जिनमें से एक ये है कि जघन्य अपराध वाले कैदियों का इंटरव्यू करना और उसे दिखाना सही नहीं है. उडविन ने मुकेश सिंह का इंटरव्यू दिल्ली स्थित तिहाड़ जेल के भीतर किया था.

उडविन की डॉक्यूमेंट्री में शामिल इस इंटरव्यू से पहले ऐसी कई मिसालें मिलती हैं जिनमें हाई-प्रोफाइल अपराधियों और दोषियों का जेल में इंटरव्यू किया गया है. किरण बेदी जब तिहाड़ की जेलर थीं तब उन्होंने मुझे खुद जेल बुलाकर कई कैदियों से मिलवाया था जिनमें सजा काटने वाले कैदी भी शामिल थे.

इसी तरह 1990 के दशक की शुरुआत में बॉर्डर सिक्योरिटी फ़ोर्स प्रमुख के अनंतचारी से इजाज़त लेकर मैंने कश्मीर की वादी के क़ैदख़ानों में कई कश्मीरी अभयुक्तों के इंटरव्यू किए थे. मुझे सिर्फ ये कहा गया था कि राष्ट्रीय हित का मैं ख़्याल रखूं.

पेश है ऐसे पाँच चर्चित उदाहरण जब पत्रकारों को जेल के अंदर कैदियों के इंटरव्यू का मौका मिला था.

अफ़ज़ल गुरु का इंटरव्यू

अफ़ज़ल गुरु की फांसी का विरोध करते लोग

अफज़ल गुरु को दिसंबर 2001 में संसद पर आतंकी हमले में अहम भूमिका निभाने का दोषी पाया गया था. उन्हें नौ फ़रवरी 2013 को फांसी दे दी गयी थी. लेकिन उन्होंने वर्ष 2006 में कारवां पत्रिका को तिहाड़ जेल में <link type="page"><caption> एक घंटे का इंटरव्यू</caption><url href="http://www.caravanmagazine.in/reportage/mulakat-afzal" platform="highweb"/></link> दिया था. तब तक उन्हें मौत की सजा सुना दी गई थी.

अफज़ल गुरु ने पुलिस कस्टडी में भी कई इंटरव्यू दिए थे जिसका इंतज़ाम खुद पुलिस अधिकारियों ने किया था.

स्वामी असीमानंद के इंटरव्यू

असीमानंद, समझौता एक्सप्रेस धमाके के अभिुयक्त

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कारवां मैगज़ीन ने ही समझौता एक्सप्रेस और मक्का मस्जिद बम विस्फोट मामलों के अभियुक्त स्वामी असीमानंद का अम्बाला सेंट्रल जेल में दो साल में चार बार इंटरव्यू किया था जिसे रिकॉर्ड भी किया गया था.

वो केवल अभियुक्त थे लेकिन इसके बावजूद दो साल के अंदर जेल अधिकारियों ने इस मैगज़ीन को चार बार <link type="page"><caption> स्वामी असीमानंद का इंटरव्यू</caption><url href="http://www.caravanmagazine.in/swami-aseemanand-interviews" platform="highweb"/></link> करने की इजाज़त दी. इसे मैगज़ीन ने फ़रवरी 2014 में छापा था.

रंगा बिल्ला रेप और हत्याकांड

भारतीय मीडिया

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30 जनवरी 1982 के दिन रंगा और बिल्ला को तिहाड़ जेल में फांसी दी गयी थी. उसके पहले पत्रकार प्रभा दत्त ने सुप्रीम कोर्ट से दोनों दोषियों का इंटरव्यू करने की इजाज़त मांगी थी.

उसके तुरंत बाद टाइम्स ऑफ़ इंडिया, इंडिया टुडे के अलावा पीटीआई और यूएनआई जैसी एजेंसियों ने भी इंटरव्यू की इजाज़त मांगी थी. उस वक़्त के चीफ जस्टिस वाई चंद्रचूड़ ने जेल मैनुअल रूल 549(4) का हवाला देते हुए इसकी इजाज़त दे दी थी.

इस नियम के अंतर्गत दोषी की इसमें रज़ामंदी अनिवार्य थी. रंगा और बिल्ला ने वर्ष 1978 में युवा संजय चोपड़ा और उनकी बहन को अग़वा करके दोनों की हत्या कर दी थी. बहन का बलात्कार भी हुआ था. इस कांड से देश भर में कोहराम मच गया था

ऑटो शंकर की आत्मकथा के प्रकाशन का मामला

भारत में बलात्कार का विरोध करते लोग

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तमिलनाडु में ऑटो शंकर को रेप और हत्या के कई मामलों में मौत की सजा सुनाई गयी थी. जेल में उन्होंने अपनी आत्मकथा लिखी थी जिसमें उन्होंने कई अधिकारियों के अपने अपराधों में शामिल होने का पर्दाफाश किया था.

उनकी इस आत्मकथा को तमिल साप्ताहिक पत्रिका 'नक्कीरन' छापना चाहती थी लेकिन प्रशासन इसे रोक रहा था. पत्रिका ने सुप्रीम कोर्ट से इजाज़त लेकर इसे छापा. अपने फैसले में अदालत ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 32 का हवाला देते हुए कहा कि इसके प्रकाशन को रोकना 'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता' पर प्रहार है.

उमेश रेड्डी का इंटरव्यू

रेप, बलात्कार

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तीन साल पहले एक अमरीकी पत्रकार को बेलगाम सेंट्रल जेल में फांसी की सजा सुनाये जाने वाले कैदियों से इंटरव्यू के लिए भरपूर सहयोग मिला. पत्रकार ने उमेश रेड्डी नामक <link type="page"><caption> एक दोषी का लम्बा इंटरव्यू</caption><url href="http://blogs.wsj.com/indiarealtime/2012/02/21/the-great-wait-indias-death-row-prisons/" platform="highweb"/></link> किया.

उसने वर्ष 1998 में एक महिला का बलात्कार करके हत्या कर दी थी जिसके बाद उसे फांसी की सजा सुनाई गयी थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी क़ायम रखा था. अमरीकी पत्रकार ने रेड्डी के इंटरव्यू के अलावा उस जेल में और भी कैदियों से बात की थी.

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