मीडिया में छाई निर्भया डॉक्यूमेंट्री

दिल्ली में दो साल पहले हुए सामूहिक बलात्कार कांड पर बनी बीबीसी4 की डॉक्यूमेंट्री भारतीय मीडिया छाई है.
समाचार चैनल टाइम्स नाउ के अर्णव गोस्वामी ने कहा, "पत्रकारिता को एकदम उलट दिया गया है. यह अनैतिक है."
ज़ी न्यूज़ ने हेडलाइन लगाई, "भारत निर्भया के अपमान पर चुप नहीं रहेगा."
बलात्कार पीड़िता का नाम छुपाने के लिए निर्भया के काल्पनिक नाम का इस्तेमाल किया गया था.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने लिखा, "असल मामला यह नहीं है कि दोषी के इंटरव्यू की इजाज़त कैसे दी गई. मामला तो यह है कि महिलाओं का अवमूल्यन करने वाली विचारधारा किस तरह भारतीय समाज में फैली है."
ग़लत दिशा में गुस्सा

हिंदुस्तान टाइम्स का मानना है, "दोषी के विचार दूसरे कई तरह के लोगों में भी पाए गए हैं. पुलिस प्रमुखों, महिला आयोग की सदस्यों और राजनेताओं को इस तरह की बात कहते पाया गया है कि बलात्कार के लिए ख़ुद महिलाएं ज़िम्मेदार हैं."
द इंडियन एक्सप्रेस का कहना है, "सरकार का गुस्सा निहायत ही ग़लत दिशा में है और इससे साफ़ होता है कि इसकी चमड़ी कितनी मोटी हो गई है."
सोशल मीडिया

इमेज स्रोत, AP
स्तंभकार अशोक मलिक कहते हैं कि दोषी का इंटरव्यू करना बिल्कुल निजी फ़ैसला है. पर ये कहना ग़लत है कि इस फ़िल्म से भारत की प्रतिष्ठा या इसके पर्यटन को धक्का लगेगा.
सोशल मीडिया पर भी बीबीसी डॉक्यूमेंट्री छाई रही और लोगों ने इस पर बढ़ चढ़ कर प्रतिक्रिया जताई है.
सोशल मीडिया पर #IndiasDaughter, #justiceforNirbhaya, #NirbhayaInsulted, और #banBBC ट्रेंड कर रहे हैं.
सबसे ज़्यादा लोगों ने #Indiasdaughtersupportthefilm का इस्तेमाल किया है.
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