पुलिस कमिश्नर ने भूत से पूछा हत्यारे का पता

नरेंद्र दाभोलकर

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    • Author, देवीदास देशपांडे
    • पदनाम, पुणे से बीबीसी हिन्दी डॉटकॉम के लिए

पुणे के पूर्व पुलिस कमिश्नर ने एक भूत से हत्यारे का पता पूछने की कोशिश की थी जिस कारण उन्हें पद से हटा दिया गया था.

ये मामला अंधविश्वास और कुरीतियों से लड़ने वाले डॉ नरेंद्र दाभोलकर की हत्या का था जिसके हत्यारे का पता लगाने के लिए कमिश्नर गुलाब राव पोल ने प्लेनचेट का प्रयोग किया था.

अब महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस नेता अजित पवार ने माना है कि पुणे के पूर्व पुलिस कमिश्नर को इसी कारण हटाया गया था.

अंधविश्वास विरोध आंदोलन के नेता डॉ. नरेंद्र दाभोलकर की हत्या के मामले में दोषियों को ढूंढने के लिए गुलाबराव पोल पर यह तरीक़ा अपनाने का आरोप था.

माना जाता है कि प्लेनचेट के ज़रिए मृत आत्माओं से सीधा संपर्क किया जा सकता है.

अजित पवार ने बुधवार को पुणे में बताया कि "डॉ. <link type="page"><caption> दाभोलकर</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/08/130821_narendra_dabholkar_pune_ap" platform="highweb"/></link> की हत्या की जांच के लिए हमारी सरकार ने 19 टीमें बनाई थीं लेकिन कुछ लोगों ने प्लेनचेट जैसे दकियानूसी तरीके का इस्तेमाल करके हमलावरों को खोजने की कोशिश की. हमें यह बिल्कुल नहीं जंचा. इसलिए हमने उन्हें हटा दिया.'

पुणे के पूर्व कमिश्नर गुलाबराव पोल

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अंधविश्वास विरोधी कार्यकर्ता कॉमरेड गोविंद पानसरे की हाल में हुई हत्या की जांच राज्य सरकार को शीघ्र करनी चाहिए, यह मांग करते हुए पवार ने सारी बात बताई.

काला जादू

काले जादू के ख़िलाफ़ मुहिम चलाने वाले 71 साल के नरेंद्र दाभोलकर की 20 अगस्त 2013 को पुणे में हत्या हो गई थी.

अजित पवार

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महाराष्ट्र के सतारा ज़िले के दाभोलकर <link type="page"><caption> सामाजिक कुप्रथाओं</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/08/130821_narendra_dabholkar_murder_protests_dil" platform="highweb"/></link> और अंधविश्वास के ख़िलाफ क़ानून लाने के लिए महाराष्ट्र विधानसभा में एक विधेयक लाने का प्रयास कर रहे थे पर कुछ लोग उनकी मुहिम के ख़िलाफ थे.

एक साल बाद भी जब हमलावर नहीं पकड़े गए, तब पोल ने अपने दो पुलिसकर्मियों की मदद से प्लेंचेट का सहारा लिया था.

पत्रकार आशीष खेतान ने एक स्टिंग ऑपरेशन के ज़रिए इसका खुलासा किया था. उसके बाद उन्हें स्थानांतरित कर दिया गया था. बाद में उन्होंने समयपूर्व अवकाश ले लिया.

इस बीच गुलाबराव पोल के वकील हर्षद निंबालकर ने दावा किया है कि पोल के प्लेंचेट का प्रयोग करने का कोई सबूत नहीं है.

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