दाभोलकर की हत्या के बाद एंटी ब्लैक मैजिक अध्यादेश पारित होगा

महाराष्ट्र सरकार ने एंटी ब्लैक मैज़िकअध्यादेश को पारित करने का फ़ैसला लिया है.
महाराष्ट्र सरकार इस अध्यादेश को राज्यपाल को मंज़ूरी के लिए भेजेगी. ये फ़ैसला राज्य सरकार की कैबिनेट की बैठक में लिया गया.
महाराष्ट्र सरकार के इस फ़ैसले के बाद राज्य में काले जादू और अंध विश्वास के चलते नर बलि देने की प्रथा पर अंकुश लगाना संभव होगा.
यह फ़ैसला इस कानून को पारित कराने के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र दाभोलकर की हत्या के एक दिन के बाद लिया गया है.
मंगलवार को नरेंद्र दाभोलकर की हत्या कर दी गई थी. अज्ञात हमलावरों ने दाभोलकर को उस वक्त गोली मारी जब वे पुणे में टहलने के लिए निकले थे.
दाभोलकर ने दो सप्ताह पहले ही राज्य के मुख्यमंत्री पृथ्वी राज चव्हाण सरकार की इस बात के लिए आलोचना की थी कि सरकार इस कानून को पारित करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रही है.
राज्य सरकार की ओर से पहले से ये भरोसा दिया जाता रहा है कि कानून बनने के बाद इस तरह की धार्मिक पूजा कराने वाले वरकरी समुदाय के लोगों का उत्पीड़न नहीं किया जाएगा.
इस अध्यादेश के पारित होने के बाद अंध विश्वास और अंध श्रद्धा को बढ़ावा देने वाले विज्ञापनों पर भी रोक लगेगी. अख़बार और टीवी चैनलों पर अब ऐसे विज्ञापनों का दिखाया जाना अपराध के दायरे में आएगा.
दो दशक से लंबा संघर्ष
इस हत्या के ख़िलाफ़ पुणे में बुधवार को भारी पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है. महाराष्ट्र सरकार ने हत्यारों के बारे में कोई भी सूचना देने वालों को दस लाख रुपये का इनाम देने की घोषणा की है.
इसके अलावा पुणे पुलिस प्रशासन ने प्रत्यक्षदर्शियों से मिली जानकारी के आधार पर हत्यारों का स्केच भी जारी किया है.
69 साल के दाभोलकरने महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति का गठन किया था और अंधविश्वास और अंधश्रद्धा के ख़िलाफ़ कानून बनाने की मांग कर रहे थे.
दाभोलकर दकियानूसी परंपरा के ख़िलाफ़ दो दशक से भी ज़्यादा समय से संघर्ष कर रहे थे. चिकित्सा विज्ञान में डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने समाज में अंधविश्वास मिटाने के लिए अपने अभियान की शुरुआत 1983 में की थी.
1989 में उन्होंने एकसमान सोच वाले लोगों के साथ मिलकर अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति का गठन किया था.
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