खजुराहो में शास्त्रीय नृत्य का मेला

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- Author, प्रीति मान
- पदनाम, फ़ोटो पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल खजुराहो में उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत और कला अकादमी का 41वें खजुराहो नृत्य समारोह हुआ.
इसका आग़ाज़ हुआ दीप्ति ओमचेरी भल्ला के मोहिनीअट्टम नृत्य से.

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भारतीय शास्त्रीय नृत्य शैलियों के साथ-साथ इस वर्ष भी रूपंकर कलाओं का मेला 'आर्ट मार्ट', आन्ध्र प्रदेश के कला वैभव की प्रदर्शनी 'नेपथ्य', देशज जनोपयोगी कला परंपरा से साक्षात्कार 'हुनर' और कलावार्ता गतिविधि हो रही है.
मोहिनीअट्टम एक कौसिकी वृत्ति का भारतीय नृत्य है. इसके स्त्रैण गुण इसे नारीत्व का प्रतीक बनाते हैं.

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नृत्यांगना दीप्ति ओमचेरी भल्ला ने महज़ चार साल की उम्र से संगीत और नृत्य की तालीम लेनी शुरू कर दी थी और कलामंडलम कलकुट्टी अम्मा और गुरु सदनम् बालकृष्णन से मोहिनीअट्टम का प्रशिक्षण लिया.

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सुविख्यात भरतनाट्यम और कुचिपुड़ी नृत्यांगना द्रौपदी प्रवीण एवं पद्मिनी कृष्णन की जोड़ी ने अपनी सुंदर और लावण्यमयी प्रस्तुतियों से दर्शकों का दिल जीत लिया.
अभिनय और नृत्य में पारंगत द्रौपदी प्रवीण में तीन वर्ष की आयु से ही नृत्य शुरू कर दिया था.

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कुचिपुड़ी नृत्यांगना पद्मिनी कृष्णन ने नृत्य की बारीकियां गुरु शैलजा से सीखीं. वह नृत्य के अलावा कर्नाटक संगीत में शिक्षा ले रही हैं.
जयपुर घराने की विख्यात कथक नृत्यांगना मोनिसा नायक ने ख़ुद को इसकी बारीकियाँ सीखने में समर्पित किया है.

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अपनी नृत्य प्रवीणता से उन्होंने देश-विदेश में दर्शकों का मन जीत लिया है.
ऐश्वर्या सिंह को नृत्य में आगे बढ़ने की प्रेरणा उनके माता पिता से मिली.

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उन्होंने सृजन से ओडिसी नृत्य का प्रशिक्षण लिया और इस शैली की बारीकियों को आत्मसात कर रही हैं.
उन्होंने धौली महोत्सव, नादाम महोत्सव जैसे प्रतिष्ठित महोत्सवों में प्रस्तुतियां दी हैं.

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सुप्रसिद्ध भरतनाट्यम नृत्यांगना अरूपा लाहिरी की नृत्य प्रतिभा को विख्यात नृत्य गुरु चित्रा विश्वेश्वरमन ने संवारा.
वह कार्यशालाओं के ज़रिए नृत्य के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं.

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प्रतिभाशाली, समर्पित और ऊर्जावान युवा कलाकार सुरश्री भट्टाचार्य ने कत्थक की तालीम बचपन से ली थी.
उन्हें पंडित बिरजू महाराज से यह नृत्य शैली सीखने का अवसर मिला.
खजुराहो नृत्य समारोह का समापन 26 फ़रवरी को कुमुदिनी लखिया की कत्थक प्रस्तुति से होगा.
इसका आयोजन मध्यप्रदेश शासन संस्कृति विभाग पिछले 40 साल से कर रहा है.
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