जब ताल से सुर मिले और कदम थिरके

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- Author, प्रीति मान
- पदनाम, फ़ोटो पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
हाल ही में सोपोरी अकादमी का दसवां 'सा मा पा संगीत सम्मलेन' नई दिल्ली के कमानी ऑडिटोरियम में सम्पन्न हुआ.
इस तीन दिवसीय संगीत समारोह में वादन, नृत्य और संगीत के दिग्गज कलाकारों ने शिरकत की.
प्रख्यात संतूर वादक अभय रुस्तम सोपोरी ने अपनी अद्भुत गतें और बंदिशें प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया.

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स्वर, लय और संवाद के माध्यम से अंजनी मिश्रा, समीर भालेराव और नितिन शर्मा ने पंडित विजय शर्मा के समन्वय में पंचतत्व की चतुरंग प्रस्तुति दी.
जिस संगीत में तीन रंग होते हैं, उसे 'त्रिवट' और जिसमें चार रंग होते हैं, उसे 'चतुरंग' कहा जाता है.

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रेखा नादगौड़ा और कीर्ति कला मंदिर नृत्य समूह ने तबले की ख़ास बंदिशों के जरिए कत्थक नृत्य की परंपरा को कायम रखते हुए विलम्बित, मध्य और द्रुत में प्रस्तुति दी.

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प्रसिद्ध बांसुरी वादक अजय प्रसन्ना ने सुगतो भादुड़ी (मैन्डोलिन) और रफीउद्दीन साबरी (तबला) के साथ राग मिश्र शिवरंजनी की मनमोहक जुगलबंदी पेश की.
अजय प्रसन्ना ने बांसुरी का प्रशिक्षण अपने पिता गुरु पंडित भोलानाथ प्रसन्ना से लिया है. उनके पिता बनारस घराने से संबंधित हैं.

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उस्ताद रफ़ीउद्दीन साबरी मशहूर तबला वादक हैं.
उन्होंने तबले का प्रशिक्षण उस्ताद अब्दुल वहीद ख़ां और उस्ताद नज़ीर अहमद ख़ां से प्राप्त किया है.
उस्ताद रफीउद्दीन साबरी मशहूर गायक उस्ताद साघिर अहमद साबरी के पुत्र और उस्ताद ग़ुलाम अब्बास ख़ान के पोते हैं.

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पंडित सुगतो भादुड़ी ने अपना संगीत प्रशिक्षण बचपन से ही आरंभ किया. उन्होंने आकाशवाणी में चाइल्ड आर्टिस्ट से अपने करियर की शुरुआत की थी.
सुगतो भादुड़ी ने सुविख्यात सरोद कलाकार पंडित टीएन मजूमदार से संगीत में शिक्षा ग्रहण की और मैन्डोलिन पर अपना अभ्यास जारी रखा.
उन्हें गायकी और साज़ पर बेहतरीन तालमेल के लिए जाना जाता है.

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पंडित देबू चौधरी पद्मभूषण और पद्मश्री से सम्मानित प्रख्यात सितार वादक और गुरु हैं.
उन्होंने छह पुस्तकें लिखी हैं और आठ नए रागों का निर्माण किया है. वे सेनिया घराना के संगीताचार्य उस्ताद मुश्ताक़ अली ख़ान के शिष्य हैं.
पंडित चौधरी ने चार वर्ष की छोटी उम्र से ही सितार बजाना शुरू कर दिया था.
1953 में मात्र 18 साल की उम्र में ऑल इंडिया रेडियो पर अपना पहला कार्यक्रम प्रस्तुत किया था.

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पंडित प्रतीक चौधरी युवा पीढ़ी के लोकप्रिय सितार वादक और पंडित देबू चौधरी के सुपुत्र हैं.
उन्होंने अपने पिता के साथ सितार पर संगत की है. सादगी और स्पष्टता उनकी शैली की ख़ास पहचान हैं.

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पंडित शुभेन्द्र राव जाने माने सितार वादक और पंडित श्री रविशंकर के शिष्य हैं.
कहते हैं कि सितार उनके पिता एनआर रामाराव के प्रभाव से छोटी उम्र से ही उनके जीवन में प्रवेश कर गया.
पंडित शुभेन्द्र राव के पिता एनआर रामाराव खुद भी सितार वादक और पंडित रविशंकर के शिष्य थे.
सा मा पा संगीत सम्मेलन में पंडित शुभेन्द्र राव ने आलाप, जोड़ झाला और राग गावती में प्रस्तुत दी.

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विदुषी सास्किया राव डे हास भारतीय वाइलिन चेलो में प्रशिक्षित हैं. वे पंडित शुभेन्द्र राव की पत्नी भी हैं.
पंडित शुभेन्द्र राव सितार पर और विदुषी सास्किया राव डे हास चेलो पर जब साथ जुगलबंदी करते हैं तो स्वतः ही पूरब से पश्चिम के मिलन का अहसास होता है.

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पद्मश्री पंडित भजन सोपोरी कश्मीर के सूफ़ियाना घराने से संबंध रखते हैं.
युवाओं को शास्त्रीय संगीत की ओर प्रेरित करने के लिए उन्होंने 2006 में सा मा पा संगीत सम्मलेन का आयोजन शुरू किया था.
उन्होंने तीन नए राग, राग लालेश्वरी, राग पतवंती और राग निर्मलरंजिनी की रचना की है.
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