मोटापा भी ख़ूबसूरत हो सकता है?

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सिडनी महोत्सव में एक नया डांस प्रोडक्शन मोटापे से जुड़ी वर्जनाएं तोड़ता हुआ, प्रचलित धारणाओं को चुनौती दे रहा है.
एक डांसर के शरीर पर लटके मांस पर लिपटी रस्सी, जैसे एक स्कल्पचर बनती है. और, जो पहले विचित्र सा सूजा हुआ शरीर दिखता था, वह सुंदर दिखने लगता है.
'नथिंग टु लूज़' नाम से सिडनी महोत्सव में इस नृत्य का प्रदर्शन हुआ.
इसके ज़रिए, न केवल मोटे शरीर के बारे में हमारी सोच, बल्कि इन्हें देखने के हमारे नज़रिए को चुनौती देने की कोशिश की गई है.
इस महोत्सव के आयोजक चाहते हैं कि दर्शक मोटापे को लेकर अपनी धारणाएं बदलें और ख़ुद को इसके प्रति मोहित होने दें.
लेकिन दुनिया में साइज़ ज़ीरो फ़ैशन मॉडल्स के दबदबे, चमकदार विज्ञापनों और अरबों डॉलर की डाइट इंडस्ट्री के रहते क्या ऐसा संभव है?
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प्रोडक्शन से जुड़ी कैली जीन ड्रिंकवाटर कहती हैं, “हम बड़े शरीरों की अनूठी नृत्य अदाओं को सामने लाना चाहते हैं.”

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इस शो का आयोजन करने वाली ऑस्ट्रेलियाई कंपनी की डायरेक्टर केट चैंपियन कहती हैं, “शरीर बहुत कुछ कहता है. आप इन थिरकते शरीरों से चकित हो जाएंगे. भारी-भरकम शरीर को मंच पर उतारना अपने आप में एक स्टेटमेंट है.”
मोटापे को दिखाने का तरीका

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ब्रितानी मनोचिकित्सक शॉर्लेट कूपर बताती हैं कि मुख्यधारा के मीडिया में मोटापे को जिन तस्वीरों के ज़रिए दिखाया जाता है, वो अजब है, इसमें सिर से नीचे का हिस्सा यानी धड़ दिखाया जाता है, जो इसे शरीर नहीं, बल्कि मात्र एक वस्तु की तरह पेश करता है - शरीर, पेट, खाना.
न्यूज़ीलैंड की मैसी यूनिवर्सिटी में मोटापे पर शोध करने वाली कैट पॉज कहती हैं, "मोटे शरीर को आलसी, निष्क्रिय, बदसूरत, अस्वस्थ, असफल और दुखी होने की निशानी मान लिया जाता है."
1960 के दशक में मोटापे को लेकर भेदभाव कम करने और बराबरी के अधिकारों की मांग को लेकर ‘फ़ैट एक्टिविज़्म’ शुरू हुआ.
39 वर्षीय ड्रिंकवाटर ऑस्ट्रेलिया के एक छोटे से शहर में पैदा हुईं, जहाँ तैराकी के दौरान उनके शरीर को देखने पर उनका मज़ाक उड़ाया जाता था. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपना ही स्वीमिंग ग्रुप एक्वापोर्को बनाया और जो एक साथ स्विमिंग करता था और उस पर 2013 में उसने डॉक्यूमेंट्री बनाई.
वैसे तो नृत्य पतले, छरहरे, फिट और प्रशिक्षित शरीर से जुड़ा है. लेकिन यह बदल रहा है. ऐसा नहीं कि मोटे लोगों के बदन में कोई लय ही नहीं होती.
'नथिंग टु लूज़' किसी बिकिनी पहनने या रियलिटी टीवी में हिस्सा लेने जैसा नहीं है. यह कला के बारे में है.
मोटापे पर नज़रिया
कोरियोग्राफ़र केट चैंपियन कहती हैं, “सवाल यह भी नहीं है कि मोटे लोगों को बैले, बूट कैंप या नृत्य कक्ष तक कैसे लाया जाए?”

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दरअसल, वे नृत्य के मौजूदा नियमों को फिर से लिखना चाहती हैं. चैंपियन इससे पहले बुज़ुर्ग और विकलांग लोगों को डांस फ़्लोर पर ला चुकी हैं.
अब बतौर कोरियोग्राफर वो मोटे लोगों से ऐसे डांस स्टेप्स करवाना चाहती हैं, जो कोई भी दुबला-पतला व्यक्ति नहीं कर सकता.
रिहर्सल में इन डांसर्स की ताक़त और शरीर के लचीलेपन ने चैंपियन को हैरान कर दिया. लेकिन इन डांसर्स को घुटनों में ताकत देने के लिए उन्हें अतिरिक्त सपोर्ट भी देना पड़ा.
मोटापे को लेकर पुरुषों और महिलाओं के नज़रिए में भी अंतर देखने को मिला.
'नथिंग टु लूज़'

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'नथिंग टु लूज़' के लिए जब आवेदकों से अपने वीडियो भेजने को कहा गया तो कुछ ही पुरुषों ने इसमें दिलचस्पी दिखाई. प्रोडक्शन के सात डांसर्स में से सिर्फ़ दो ही पुरुष हैं.
ड्रिंकवाटर कहती हैं, “पुरुषों को बताया ही नहीं जाता कि वे मोटे हैं, उनसे कहा जाता है कि वे भारी-भरकम और ताक़तवर हैं. पुरुषों को कभी-कभार ही अपने शरीर को लेकर शर्म महसूस होती है, जबकि महिलाएं इस बात को लेकर काफी सतर्क रहती हैं कि वे कैसी दिखती हैं.”
ऑस्ट्रेलिया में मोटापे की दर दुनिया में सबसे अधिक है. ताज़ा अध्ययन में पता चला है कि ऑस्ट्रेलिया की 63 प्रतिशत वयस्क आबादी और हर चौथा बच्चा मोटापे का शिकार है.
चुनौतियां
'नथिंग टु लूज़' और इसमें भाग ले रहे प्रतिभागियों के लिए ये किसी चुनौती से कम नहीं है.

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'नथिंग टु लूज़' को कई घृणा से भरे ई-मेल भी मिले हैं, जिनमें कहा गया है, “ओह, तुम मोटे लोग डांस करना चाहते हो, तो तुम क्या करने जा रहे हो?”
'नथिंग टु लूज़' की प्रतिभागी 26 वर्षीय एली गारेट जिन्हें सार्वजनिक स्थानों पर ‘मोटी वेश्या’ तक कहकर पुकारा गया, साबित करना चाहती हैं कि ‘मोटापे के बावजूद फिट रहा जा सकता है.’
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