'आईएस के ख़िलाफ़ ज़मीनी फ़ौज भेजे अमरीका'

इस्लामिक विद्वानों ने आईएस की निंदा की है

इमेज स्रोत, AFP

फ़्रांस के एक मुस्लिम धर्मगुरु ने चेतावनी दी है कि सिर्फ़ हवाई हमलों से इस्लामिक स्टेट को नहीं हराया जा सकता.

पेरिस की जामा मस्जिद के प्रमुख दलील अबूबकर ने कहा है कि जब तक अमरीका अपनी सेना सीरिया और इराक़ नहीं भेजता, वहां के चरमपंथी संगठन को रोकना मुमकिन नहीं है.

अमरीका की अगुवाई में कई देशों का एक गठबंधन सीरिया और इराक़ के इस्लामिक स्टेट के ठिकानों पर लगातार हवाई हमले कर रहा है. अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि वह आईएस से ज़मीन पर लड़ने के लिए वहां सेना नहीं भेजेंगे.

अमरीकी लड़ाकू जहाज कर रहे हैं हवाई हमले

इमेज स्रोत, Getty

पेरिस में पिछले महीने हुए अलग-अलग चरमपंथी हमलों में 17 लोग मारे गए थे. तमाम मुस्लिम धर्मगुरुओं ने इस हमले की निंदा की थी.

अबूबकर ने कहा कि पश्चिमी देशों ने ख़ुद कट्टरता को बढ़ावा दिया है. जिन व्यवहारों और विचारों को अरब देशों तक ने बर्दाश्त नहीं किया, पश्चिमी देश उन्हें सहते रहे. इससे इन देशोें में कट्टरता में इज़ाफ़ा हुआ है.

उन्होंने ने कहा कि इस्लामिक उग्रपंथ एक तरह की बड़ी बीमारी है, जिसे अमरीका के बड़े डंडे से ही ठीक किया जा सकता है.

पेरिस की जामा मस्जिद के इस प्रमुख के विचार देश के दूसरे इस्लामिक नेताओं और धर्मगुरुओं से अलग हैं. मोटे तौर पर वहां यह माना जाता है कि ग़ैर बराबरी ओर पूर्वाग्रहों की वजह से पश्चिमी देशों में लोगों में अलगाव की भावना बढ़ी है और वे कट्टरवाद की ओर बढ़े हैं.

<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> कर सकते हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>