महाराष्ट्रः गठबंधन का 'बिग ब्रदर' कौन?

भारतीय संसद

इमेज स्रोत, Reuters

    • Author, कुमार केतकर
    • पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार

लोकसभा में सीटों के लिहाज़ से देश की राजनीति में भले ही महाराष्ट्र एक अहम राज्य हो लेकिन इसे कभी भी किसी राजनीतिक पार्टी ने उतनी तवज्जो नहीं दी जितनी कि दी जानी चाहिए थी.

उत्तर प्रदेश (80) के बाद महाराष्ट्र (48) में लोकसभा की सबसे अधिक सीटें हैं.

झारखंड के अलग होने से पहले बिहार के पास 54 सीटें थीं जो अब 40 रह गई हैं.

पढ़िए कुमार केतकर का विश्लेषण

42 सीटों वाले पश्चिम बंगाल और 39 सीटों वाले तमिलनाडु को अधिक राजनीतिक अहमियत दी जाती है.

यहां तक कि आंध्र प्रदेश चाहे तेलंगाना के बिना हो या फिर उसके साथ, लेकिन उसकी ओर लोगों का ध्यान अधिक जाता है.

संयुक्त आंध्र प्रदेश में लोकसभा की 42 सीटें थीं.

मीडिया में छवि

बालासाहेब ठाकरे

इमेज स्रोत, SHIVSENA.ORG

टेलीविज़न पर होने वाली बहसों को अगर देखें तो पाएंगे कि इस महाराष्ट्र के बारे में ज़्यादातर चर्चाएं ठाकरे परिवार के इर्द-गिर्द ही सिमटी रहती हैं.

या तो ठाकरे भाइयों का झगड़ा हो या फिर राज्य में शिवसेना की ओर से बुलाया गया कोई बंद हो.

मुंबई के बाहर ज़्यादातर लोग ये समझते रहे हैं कि मराठी बोलने वाले सभी मुंबईकर या तो शिवसैनिक हैं या फिर उससे जुड़े लोग.

शायद यही वजह थी कि स्वर्गीय बाला साहेब ठाकरे की मीडिया में छवि एक कद्दावर नेता की थी.

साठ, सत्तर और फिर अस्सी के दशक में किसी को 'ब्रेकिंग न्यूज़' की भूख नहीं रहती थी.

इसलिए शिव सेना के आलोचक तब उसे अकसर 'कागज़ी शेर' कहकर संबोधित करते थे.

विरासत की जंग

इमेज स्रोत, PTI

लेकिन प्राइवेट न्यूज़ चैनलों के आते ही शिव सेना 'टीवी का टाइगर' बन गई.

जब उद्धव ठाकरे और उनके चचेरे भाई राज ठाकरे अलग हुए और उद्धव को विरासत की कमान मिली तो राज को एक तरह मजबूर होकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना बनानी पड़ी.

उनकी जुबानी जंग तकरीबन हर रोज़ सुर्ख़ियां बटोरने लगी.

उनके झगड़े 'एनिमल प्लैनेट' चैनल पर दिखाए जाने वाले शावकों की लड़ाई की तरह ही रोचक थे.

लेकिन ये किसी भी तरह से नहीं कहा जा सकता कि यह सब कुछ किसी सार्थक का हिस्सा था.

'मीडिया टाइगर'

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

इमेज स्रोत, Sanjay Gupta

इसलिए यह एक तरह से अपरिहार्य सा बन गया है कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को भी शिव सेना के संदर्भों में ही देखा जा रहा है.

मीडिया में नरेंद्र मोदी को लेकर जब से दीवानगी का आलम बना है, तभी से उद्धव और राज ठकरे समाचार माध्यमों में कुछ हद तक हाशिये पर गए हैं.

टेलीविज़न और अख़बारों के इस नए और अधिक आक्रामक 'मीडिया टाइगर' की ख़बरों से सराबोर होने के बाद अब भाजपा और शिव सेना का गठजोड़ मुश्किल में पड़ता दिख रहा है.

समाचार माध्यमों में गढ़ी गई छवि के सहारे जिनका कद बड़ा होता है, उनके पतन का गवाह भी यही मीडिया बनता है.

उपचुनाव के नतीजे

राज ठाकरे

बिहार और उत्तर प्रदेश से होते हुए उत्तराखंड से लेकर कर्नाटक तक के उपचुनावों के नतीजे देखने के बाद भाजपा अब ज़मीनी हकीकत से रूबरू होती दिख रही है.

लोकसभा चुनावों में मनसे ने दस सीटों पर चुनाव लड़ा और सभी पर <link type="page"><caption> ज़मानत गंवाई</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/news/2012/02/120217_bmc-elections_adg.shtml" platform="highweb"/></link>. इससे राज ठाकरे की छवि को गहरा धक्का लगा है.

16वीं लोकसभा में शिव सेना को 18 सीटें मिली हैं और बीजेपी को लगता है कि यह मोदी लहर की वजह से हुआ, लेकिन शिव सेना इससे सहमत नहीं है.

उसका कहना है कि मराठी मानुष के लिए 48 सालों के उसके संघर्ष की वजह से बीजेपी को इस राज्य में सियासी ज़मीन और जीत हासिल हुई है.

बिग ब्रदर?

नरेंद्र मोदी, अमित शाह

इमेज स्रोत, AFP

बहस अब इस बात पर आकर अटक गई है कि गठबंधन की राजनीति में आख़िर बिग ब्रदर कौन है?

मोदी की अगुवाई में केंद्र में अपने बूते बहुमत पाने वाली बीजेपी या फिर 48 साल पुरानी शिव सेना.

राज ठाकरे की मनसे ने भी शिव सेना के लिए राजनीतिक हालात कुछ हद तक बदल दिए हैं.

अमित शाह ने इशारों में ही उद्धव के सामने यह साफ़ कर दिया है कि भाजपा राज ठाकरे के साथ भी इन चुनावों में जा सकती है.

नियम क़ायदे

नरेंद्र मोदी के समर्थक

इमेज स्रोत, AFP

इमेज कैप्शन, भाजपा मोदी की छवि के दम पर विधानसभा चुनाव लड़ने के मूड में लगती है.

दोनों भाइयों की प्रतिस्पर्द्धा और ईर्ष्या के मद्देनज़र ये सियासी दांव चला गया है.

शिव सेना के उदय के पहले 30 सालों तक महाराष्ट्र के राजनीतिक फलक पर केवल एक आवाज गूंजती रही.

लेकिन अब राज ठाकरे की भी एक 'समानांतर शिव सेना' है जिनकी गुर्राहट में कम शोर नहीं है.

और अब महाराष्ट्र के सियासी अखाड़े में मोदी और शाह भी उतर चुके हैं जिससे इस राज्य की राजनैतिक लड़ाई के नियम क़ायदे फिर से लिखे जा रहे हैं.

<bold>(बीबीसी हिन्दी के <link type="page"><caption> एंड्रॉएड ऐप</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtml" platform="highweb"/></link> के लिए आप <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> कर सकते हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>