तीस्ता सीतलवाड पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज

तीस्ता सीतलवाड
इमेज कैप्शन, तीस्ता सीतलवाड और उनके पति पर गबन का मामला दर्ज हुआ है.
    • Author, अंकुर जैन
    • पदनाम, बीबीसी हिन्दी डॉट कॉम के लिए, अहमदाबाद से

गुजरात दंगों के पीड़ितों को न्याय दिलाने में मदद कर रही सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड के ख़िलाफ़ पुलिस ने धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है.

अहमदाबाद की क्राइम ब्रांच शाखा ने तीस्ता, उनके पति जावेद आनंद और स्वर्गीय कांग्रेस सांसद एहसान जाफ़री के बेटे तनवीर के खिलाफ एफ़आईआर दर्ज की है.

गुजरात पुलिस इसे धोखाधड़ी का एक सामान्य मामला बता रही है. वहीं सामाजिक कार्यकर्ता इस केस के दर्ज होने के समय पर सवाल उठा रहे हैं.

तीस्ता सीतलवाड ने इस मामले को गुलबर्ग सोसाइटी दंगा मामले में चल रही उनकी न्यायिक लड़ाई को पटरी से उतारने की कोशिश बताया है.

क्या है मामला?

गुलबर्ग सोसाइटी दंगा
इमेज कैप्शन, गुलबर्ग सोसाइटी दंगे में अपने परिवार के तीन लोगों को खोने वाले फिरोज ख़ान ने ये शिकायत दर्ज कराई है.

वर्ष 2002 के दंगा पीड़ितों ने तीस्ता सीतलवाड और अन्य के ख़िलाफ़ उनके नाम पर विदेशी चंदा लेने और उसके दुरुपयोग का आरोप लगाया है.

साल 2002 में हुए गुलबर्ग सोसाइटी दंगे में अपने परिवार के तीन व्यक्तियों को खोने वाले फ़िरोज़ सईद ख़ान पठान की शिकायत पर क्राइम ब्रांच ने यह मामला दर्ज किया है.

तीस्ता एवं अन्य लोगों पर भरोसा तोड़ने, धोखाधड़ी, और आपराधिक षड्यंत्र के आरोप लगे है. इस मामले की जाँच अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ़ पुलिस एनके पटेल कर रहे हैं.

उन्होंने बीबीसी को बताया, “तीस्ता और अन्य पर आरोप है कि उन्होंने गुलबर्ग सोसाइटी और दूसरे दंगों में प्रभावित व्यक्तियों की तस्वीरें और वीडियो अपनी वेबसाइट पर लगाकर लोगों से उन्हें दान देने की अपील की.”

पटेल के अनुसार, पठान ने अपनी शिकायत में कहा है कि इन तस्वीरों और वीडियो से तीस्ता की संस्था सिटीजंस फॉर जस्टिस एंड पीस (सीजेपी) और सबरंग को करोड़ों रुपये का दान मिला था.

पटेल ने बताया, “पठान ने आरोप लगाया है कि इस दान में से एक करोड़ 51 लाख रुपये को तीस्ता और अन्य अभियुक्तों ने वर्ष 2007 से 2011 के बीच अपने निजी कामों के लिए इस्तेमाल किया है.

"पठान के मुताबिक यह रुपया दंगा पीड़ितों की मदद के लिए और गुलबर्ग सोसाइटी में एक संग्रहालय बनाने के लिए इकट्ठा किया गया था.”

अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने कहा है कि वे इस मामले में गुलबर्ग सोसाइटी के बाकी निवासियों का बयान लेंगे और इसके बाद तीस्ता और अन्य को गिरफ़्तार करने के बारे में फैसला लेंगे.

'इस बार भी कामयाब नहीं होंगे'

साल 2002 का गुजरात दंगा (फ़ाइल)
इमेज कैप्शन, साल 2002 में गुजरात में हुए दंगों में करीब 1200 लोग मारे गए थे.

गुजरात सरकार पर आरोप लगाते हुए तीस्ता सीतलवाड ने कहा कि धोखाधड़ी का यह मामला फर्जी है और यह दंगा पीड़ितों को न्याय दिलाने की लड़ाई को रोकने की एक और कोशिश है.

बीबीसी से बात करते हुए तीस्ता ने कहा कि उन पर लगे सभी आरोप झूठे हैं और यह मामला उन्हें एसआईटी मामले में मोदी को दी गई क्लीन चिट को चुनौती देने से रोकने की कोशिश है.

एक बयान में तीस्ता सीतलवाड ने कहा, "13 मार्च, 2013 को हमने अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के ज्वाइंट कमिश्नर ऑफ़ पुलिस एके शर्मा को एक पत्र में हमारे खिलाफ चल रही एक साज़िश के बारे में अवगत कराया था."

"अब पुलिस ने उसी फ़र्ज़ी मामले में हमारे ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की है,”

तीस्ता ने कहा कि इस से पहले भी गुजरात सरकार में कुछ लोगों ने उन पर आरोप लगाने की कोशिश की थी पर उन्हें सफलता नहीं मिली थी और इस बार भी नहीं मिलेगी.

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