गुजरात: सही होंगे चुनावी सर्वेक्षण?

गुजरात विधानसभा चुनाव की मतगणना से एक दिन पहले राज्य के सबसे बड़े शहर अहमदाबाद में सुरक्षा का कोई भारी ताम-झाम नज़र नहीं आता.
राजनीतिक पार्टियों के मैनेजर तमाम मतगणना केंद्रों पर अपने कार्यकर्ताओं को तैनात करने की रणनीति बनाने में जुटे हुए हैं.
इसके साथ-साथ आज ये भी तय किया जाएगा कि 20 दिसंबर को नतीजे आने के बाद पार्टी का कौन नेता किस टेलीविज़न चैनल पर बहस में हिस्सा लेने के लिए जाएगा.
भारतीय जनता पार्टी के एक पूर्व विधायक ने कहा, “इतने ज़्यादा टीवी चैनल हो गए हैं कि अब हमें पहले से ये तय करना पड़ता है कि किस चैनल में पार्टी का कौन नेता जाएगा”.
हालांकि, अभी भारतीय जनता पार्टी और काँग्रेस के कार्यालयों में खामोशी है पर लगभग सभी लोग मान रहे हैं कि विजय जुलूस बीजेपी का ही निकलेगा.
मतदान के अगले दिन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने अहमदाबाद में भारतीय जनता पार्टी के दफ़्तर से निकलते समय टीवी कैमरों के सामने इसी के संकेत दिए.
सिर्फ़ दो मिनट के लिए वो वहाँ रुके और कहा कि गुजरात की जनता हैट-ट्रिक बना चुकी है.
उन्होंने पत्रकारों के सभी सवालों को नज़रअंदाज़ कर दिया और आगे बढ़ गए.
मीडिया के सवालों का कब जवाब देना है और कब उन्हें नज़रअंदाज़ कर देना है ये नरेंद्र मोदी को अच्छी तरह आता है.
चुनावी सर्वेक्षण
सर्वेक्षण एजेंसियों का अनुमान है कि इस बार वो 2007 के मुकाबले कहीं ज़्यादा सीटें हासिल करेंगे.
ऐसे अनुमानों से टेलीविज़न के पर्दे पर तो तीखी बहसें हो गईं मगर भारतीय जनता पार्टी के नेता इन पर तुरंत खुशी जताने की गलती नहीं कर रहे हैं.
उन्हें मालूम है कि ऐसे सर्वेक्षण 2004 के आम चुनावों में मुँह के बल गिर पड़े थे और मतदाता ने बीजेपी के इंडिया शाइनिंग की हवा निकाल दी थी.
इस बार गुजरात में ये कोई नहीं कह रहा है कि मोदी सत्ता से बाहर हो जाएँगे, लेकिन सौराष्ट्र पर सबकी नज़र है जहाँ बीजेपी के बाग़ी केशुभाई पटेल की नई गुजरात परिवर्तन पार्टी ने काँग्रेस और बीजेपी की सीधी टक्कर को त्रिकोणीय संघर्ष में बदल दिया.
टीवी कंपनियों के सर्वेक्षण इस क्षेत्र में गुजरात परिवर्तन पार्टी को सिर्फ एक या दो सीटें दे रहे हैं.
भारतीय जनता पार्टी के एक विधायक ने इन सर्वेक्षणों पर बहुत उत्साह नहीं दिखाया.
उन्होंने कहा, “हमें असल नतीजों का इंतज़ार है.”












