बाबा रामदेव और केजरीवाल के मतभेद मंच पर

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भ्रष्टाचार और काले धन के खिलाफ मुहिम के समर्थन में चल रहे आंदोलन में भले ही रामदेव और अन्ना की टीम रविवार को साथ दिखें हो लेकिन दोनों में मतभेद अभी भी बरकरार हैं.
दिन में अरविंद केजरीवाल के भाषण के दौरान कुछ नेताओं का नाम लिए जाने पर रामदेव ने केजरीवाल को रोका जिसके कारण वो मंच छोड़कर चले गए.
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक केजरीवाल ने कहा कि मतभेद हैं लेकिन वो बाबा रामदेव से बात करेंगे और उन्हें समझाएंगे कि भ्रष्ट नेताओं के नाम लेना ज़रुरी है.
हालांकि किरन बेदी का कहना था कि अरविंद केजरीवाल स्वास्थ्य कारणों से मंच छोड़कर गए.
इससे पहले बाबा रामदेव ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री व्यक्तिगत ईमानदारी के साथ साथ लोकतांत्रिक और संवैधानिक जिम्मेदारी भी निभाएं.
रामदेव ने कहा कि प्रधानमंत्री ईमानदार होंगे लेकिन उन्हें अपनी कैबिनेट को भी ईमानदार रखना चाहिए.
उनका कहना था, '' विदेशों में बहुत काला धन पड़ा है. ये वापस आना चाहिए और आगे ऐसा न हो इसके लिए आगे मजबूत लोकपाल की ज़रुरत है. प्रधानमंत्री बार बार कहते हैं कि वो ईमानदार हैं लेकिन उन्हें अपनी लोकतांत्रिक और संवैधानिक जिम्मेदारी निभानी चाहिए. उन्हें अपने कैबिनेट को भी ईमानदार करना चाहिए.''
पिछले साल के आंदोलन के बाद अब पहली बार अन्ना हजारे भी रामदेव के साथ एक ही मंच पर आए हैं और सरकार का विरोध कर रहे हैं.
बाबा रामदेव के बयान पर कांग्रेस पार्टी ने आपत्ति जताई है और कहा है कि लोकपाल को लेकर प्रदर्शनों का रवैया बचकाना है. कांग्रेस नेता केशव राव का कहना था, '' ये रवैया बचकाना है. देश में सबको पता है कि भ्रष्टाचार से लड़ना जरुरी है और सरकार इस मामले में पूरे प्रयास कर रही है.''
उधर सपा के नेता शाहिद सिद्दीकी ने भी अन्ना आंदोलन की आलोचना की है और कहा है कि रामदेव के पैसे और अन्ना की विश्वसनीयता के ज़रिए ये लड़ाई जा रही है लेकिन ये आंदोलन लोग सिर्फ टीवी पर देखते हैं. इसका कोई असर नहीं होता.
उल्लेखनीय है कि अन्ना टीम में बाबा रामदेव के साथ जाने को लेकर मतभेद भी रहे हैं. पिछले हफ्ते पहली बार अन्ना टीम ने प्रधानमंत्री समेत कैबिनेट के कई मंत्रियों के ख़िलाफ घोटालों में शामिल होने के आरोप लगाए थे.
इसके जवाब में प्रधानमंत्री ने कहा था कि अगर उनके ख़िलाफ़ कोई भी आरोप सिद्ध होता है तो वो सार्वजनिक जीवन से संन्यास ले लेंगे.
शाम के समय अन्ना ने भी लोगों को संबोधित किया और कहा कि वो मरते दम तक लोकपाल के लिए लड़ते रहेंगे और अब उनकी लड़ाई में रामदेव भी साथ आ गए हैं.
हालांकि एक बार फिर भ्रष्टाचार और लोकपाल को लेकर मुहिम जोर पकड़ रही है और अब देखना है कि सरकार आगे क्या करती है.
तीन जून के एक दिन के अनशन के बाद अन्ना टीम 25 जुलाई से अनिश्चितकालीन आंदोलन करने वाली है ताकि मानसून सत्र में लोकपाल बिल पारित करने के लिए दबाव बने.
अनशन की तैयारी
अनशन के स्थान पर जाने से पहले रामदेव और अन्ना हजारे दोनो राजघाट पहुंचे जहां उन्होंने महात्मा गांधी की समाधि पर श्रद्धांजलि दी.
अन्ना से साथ किरण बेदी और अरविंद केजरीवाल समेत कई समर्थक भी थे.
पिछले बार के अनशन के स्थान जंतर मंतर से संसद मार्ग काफी करीब है. सुबह से ही लोगों ने यहां जुटना शुरु कर दिया था.
पिछले एक साल में ये पहला मौका है जब अन्ना हजारे और रामदेव एक साथ किसी मंच पर होंगे. ऐसी खबरें हैं कि इस अनशन के दौरान रामदेव 2014 के आम चुनावों के लिए अपनी रणनीति का भी एलान कर सकते हैं.
ये अनशन ऐसे समय में हो रहा है जब टीम अन्ना ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और उनकी सरकार के कई सदस्यों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं और उनकी स्वतंत्र रूप से जांच कराने की भी मांग की है.
सीबीआई पहले ही कोयला खनन आवंटन में धांधली के आरोपों की शुरुआती जांच शुरू कर चुकी है.
प्रधानमंत्री पर निशाना
अनशन से पहले अन्ना हजारे और रामदेव ने प्रधानमंत्री पर हमले तेज कर दिए हैं. अन्ना हजारे ने जहां कहा कि उन्हें मनमोहन सिंह पर भरोसा नहीं है, वहीं रामदेव ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ‘राजनीतिक रूप से ईमानदार’ नहीं हैं.
हालांकि अन्ना हजारे पहले प्रधानमंत्री को ईमानदार बताते रहे थे लेकिन हाल में अपनी टीम के खुले बयान के बात उनके नजरिए में तबदीली देखी गई.
दिल्ली पुलिस ने अनशन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखने के लिए व्यापाक इंतजाम किए हुए थे. रामदेव का भारत स्वाभिमान आंदोलन राज्यों की राजधानियों में भी इस तरह के प्रदर्शनों का आयोजन कर रहा है.












