एक रूपया किलो चावल योजना पर विवाद

- Author, उमर फ़ारूक़
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, हैदराबाद
आंध्र प्रदेश में शुरू हुए एक रूपया प्रति किलो चावल की योजना विवादों के घेरे में आ गई है. यह योजना दो दिन पहले मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी ने शुरू की थी.
लोगों की शिकायत है कि इस योजना के अंतर्गत दिए जाने वाले चावल की गुणवत्ता बहुत खराब है.
इस नई योजना के अंतर्गत राज्य के करीब दो करोड़ 25 लाख़ परिवारों को प्रति परिवार चार किलो के हिसाब से चावल उपलब्ध करवाया जा रहा है.
लेकिन इस परियोजना को इसके शुरूआती दौर में ही न केवल आम लोगों की आलोचना सामना करना पड़ रहा है बल्कि कई मंत्री और सत्ता पक्ष के नेता भी इस पर सवाल उठा रहे है.
इस योजना के तहत चावल लेने पहुँचे आम लोगो का कहना है कि उन्हे सड़ा हुआ चावल दिया जा रहा है जिसमें कीड़े भी पड़ चुके है.
आम लोगो की दूसरी शिकायत यह है कि इतनी महंगाई में केवल चार किलो चावल से उनको कोई ख़ास फ़ायदा नही पहुँचेगा.
हालांकि मुख्यमंत्री ने इस योजना को प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया है लेकिन खुद उनके मंत्रीमंडल के सदस्य इस योजना से संतुष्ट नहीं हैं.
विरोध
राज्य सरकार के दो मंत्री डी एल रविन्द्र रेड्डी और श्रीधर बाबू के मुताबिक खाने पीने की चीज़ों के दाम में बेतहाशा वृध्दि होने के कारण चार किलो चावल की इस योजना से आम आदमी को कोई खास फ़ायदा नहीं होगा.
इन दोनों मंत्रियों के अलावा कांग्रेस के कई दूसरे नेता भी इस योजना का विरोध कर रहे है.
आंध्र प्रदेश सरकार पहले ही दो रुपए प्रति किलो चावल योजना पर हर वर्ष दो हज़ार करोड़ रुपये खर्च कर रही है. चार किलो चावल एक रुपये के हिसाब से देने पर सरकार पर छह सौ करोड़ रुपए का अतिरिक्त खर्च आएगा.
आम विचार यह है की मुख्यमंत्री ने अपना जनाधार बढ़ाने और लोकप्रियता प्राप्त करने के लिए यह योजना शुरू की है.
दूसरा विचार यह है की यह योजना उन अनेक क़दमों का हिस्सा है जिनका उद्देश्य तेलंगाना क्षेत्र में जारी अलग राज्य के आन्दोलन पर से ध्यान हटाना है.
श्रीधर बाबू ने लोगों को सड़ा हुआ चावल उपलब्ध कराने पर अपनी गहरी नाराज़गी व्यक्त की है.
इसी बीच इस योजना ने भ्रष्टाचार का भी एक नया दरवाज़ा खोल दिया है. योजना शुरू होने के तीसरे दिन ही हैदराबाद में बांटने के लिए रखे गए 50 कुंतल चावल को चोरबाज़ार में बेचने गए दो लोगो को गिरफ़्तार कर लिया गया.












