गुजरात मामले पर भिड़े भाजपा-कांग्रेस

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गुजरात में आईपीएल अधिकारियों और राज्य सरकार में चल रही तनातनी के बीच गृह मंत्री पी चिदंबरम के बयान पर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच तकरार शुरू हो गई है.
भाजपा ने जहाँ केंद्र सरकार को संघीय ढाँचे का सम्मान करने की चेतावनी दी है, तो वहीं कांग्रेस ने पलटवार करते हुए कहा है कि भाजपा को कोई हक़ नहीं कि वो पुलिस अधिकारियों के मामले में केंद्र को चेतावनी दे.
राज्य सभा में विपक्ष के नेता और वरिष्ठ भाजपा नेता अरुण जेटली ने चेतावनी वाले लहजे में केंद्र सरकार को सलाह दे डाली कि वो संघीय ढाँचे का सम्मान करे.
उन्होंने कहा, "पी चिदंबरम का ये विचार संघीय ढाँचे के लिए विनाशकारी है. " अरुण जेटली ने आरोप लगाया कि इन पुलिस अधिकारियों की कांग्रेस के साथ साँठ-गाँठ है.
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को ये सोचना बंद करना चाहिए कि वो बिग ब्रदर है.
आश्चर्य
दूसरी ओर केंद्रीय क़ानून मंत्री सलमान ख़ुर्शीद ने अरुण जेटली के बयान पर आश्चर्य व्यक्त किया.
सलमान ख़ुर्शीद ने कहा, "मोदी सरकार के ख़िलाफ़ बोलने वाले पुलिस अधिकारियों को निशाना क्यों बनाया जा रहा है." उन्होंने कहा कि सही सोच रखने वाले हर भारतीयों को इन पुलिसवालों का समर्थन करना चाहिए.
दरअसल गृह मंत्री पी चिदंबरम ने एक संवाददाता सम्मेलन में ये कहा था कि गुजरात में राज्य सरकार और पुलिस अधिकारियों के बीच जो भी कुछ हो रहा है, वो चिंता का विषय है.
एक सवाल के जबाव में उन्होंने कहा था कि अगर पुलिसवाले केंद्र से मदद मांगेगे तो केंद्र दख़ल कर सकता है.
उन्होंने कहा, "नियमों में इसका प्रावधान है कि केंद्र सरकार एक ख़ास मौक़े पर ख़ास निर्णय ले. लेकिन इस नियम के लिए कोशिश आईपीएस अधिकारियों को करनी होगी."
पिछले कुछ समय से गुजरात के तीन आईपीएस अधिकारी और राज्य सरकार में ठनी हुई है.
ताज़ा शिकायत उप महानिरीक्षक (डीआईजी) रजनीश राय ने मुख्यमंत्री मोदी के क़रीबी सहयोगी पूर्व पुलिस महानिदेशक पीसी पांडे के ख़िलाफ़ की है.
शिकायत
उन्होंने अपनी शिकायत में मोदी के एक और क़रीबी सहयोगी ओपी माथुर का भी नाम लिया है.

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रजनीश राय ने नरेंद्र मोदी के एक क़रीबी अधिकारी के ख़िलाफ़ शिकायतें की हैं और कहा है कि उन्होंने तुलसी प्रजापति 'फ़र्ज़ी मुठभेड़ मामले' का षडयंत्र रचा.
इससे पहले वरिष्ठ पुलिस अधिकारी संजीव भट्ट ने नरेंद्र मोदी सरकार के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में एक हलफ़नामा दायर किया था और इसके बाद सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया है.
इसके बाद गुजरात में डीआईजी रहे राहुल शर्मा के ख़िलाफ़ सरकार ने एक आरोप पत्र जारी कर दिया था.
उन्होंने गुजरात दंगों की जाँच के लिए वर्ष 2004 में बने नानावती आयोग और वर्ष 2010 में सुप्रीम कोर्ट की बनाई हुए विशेष जांच दल को गुजरात दंगों से जुड़ी कई अहम सूचनाएं व दस्तावेज़ सौंपे थे.












