'वार्ताकारों ने मतभेद से इनकार किया'

- Author, दिव्या आर्य
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
भारत प्रशासित कश्मीर के विभिन्न गुटों से बातचीत करने के लिए बनाई गई वार्ताकारों की तीन सदस्यीय समिति ने कहा है कि उनके बीच मतभेद नहीं है.
पूर्व सूचना आयुक्त एमएम अंसारी, शिक्षाविद राधा कुमार और जाने-माने पत्रकार दिलीप पडगांवकर को क़रीब एक साल पहले भारत सरकार ने वार्ता के लिए नियुक्त किया था.
अक्तूबर में उन्हें गृह मंत्रालय को पिछले एक साल के दौरान जुटाई जानकारी के आधार पर सुझावों के सहित एक रिपोर्ट देनी है.
मीडिया में छपी ख़बरों से एमएम अंसारी और राधा कुमार के बीच मतभेदों के चलते वार्ताकार की भूमिका से उनके इस्तीफे की अटकलें तेज़ हो गईं थी.
लेकिन बीबीसी से बातचीत में राधा कुमार ने कहा, "मैं इस्तीफा नहीं दूंगी. मैं बाक़ी वार्ताकारों के साथ हमारी वार्षिक रिपोर्ट पर काम कर रही हूं. लेकिन एमएम अंसारी ने जो आरोप लगाए हैं उनसे बातचीत का माहौल ज़रूर ख़राब हुआ है."
एमएम अंसारी ने राधा कुमार और दिलीप पडगांवकर के विवादित संस्थानों की ओर से कश्मीर मुद्दे पर आयोजित कार्यक्रमों में हिस्सा लेने पर आपत्ति जताई थी.
दिलीप पडगांवकर ने अमरीका में कथित तौर पर आईएसआई की वित्तीय सहायता से चलाए जा रहे एक संस्थान और राधा कुमार ने यूरोप में आईएसआई से कथित तौर पर जुड़े हुए एक संस्थान के कार्यक्रम में हिस्सा लिया था.
अब राधा कुमार ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है और कहा है कि उन्होंने सरकार की अनुमति के साथ ही इन कार्यक्रमों में शिरकत की.
अनुभव
बीबीसी से बातचीत में एमएम अंसारी ने कहा कि उन्होंने दोनों वार्ताकारों से ये जानकारी इसलिए मांगी थी ताकि उनकी साख़ पर बट्टा ना लगे. उन्होंने कहा, "राधा कुमार और दिलीप पडगांवकर ने सारी जानकारी दे दी है और हमारे बीच कोई मतभेद नहीं है."
उन्होंने बताया कि पिछले साल में उनकी समिति की कोशिशें रंग लाई हैं, जिसकी बदौलत कश्मीर में सूचना आयोग और जवाबदेही तय करने के लिए एकाउंटेबिलिटी आयोग का गठन किया गया और अब युवाओं के लिए नौकरियों के नए आयाम बनाए जा रहे है.
एमएम अंसारी के मुताबिक़ पंचायत चुनाव और सैलानियों की बढ़ती संख्या भी कश्मीर में बेहतर हालात का सूचक हैं.
राधा कुमार ने कहा कि वार्ताकारों से कश्मीर, जम्मू और लद्दाख सभी जगह लोगों ने सहर्ष बातचीत की.
पिछले वर्ष सितंबर में घाटी में शांति बहाल करने के इरादे से भारत सरकार ने एक आठ सूत्री कार्यक्रम का ऐलान किया था. इसके तहत ही एक महीने बाद जम्मू कश्मीर के विभिन्न गुटों से बातचीत करने के लिए इस समिति की घोषणा की गई थी.
जम्मू में सत्ताधारी गठबंधन में नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस को छोड़ सभी दलों ने केंद्र के इन वार्ताकारों के चयन की आलोचना की थी.
वार्ताकार पीपुल्स डेमोक्रैटिक पार्टी, भारतीय जनता पार्टी औऱ पैंथर्स पार्टी से नहीं मिल पाए हैं. कश्मीर के अलगाववादी भी वार्ताकारों के बातचीत के प्रस्ताव को ठुकरा चुके हैं.
हालांकि वार्ताकार, विस्थापित कश्मीरी पंडितों और विभिन्न सामाजिक और व्यापारिक संगठनों से मुलाकात कर चुके हैं.












