जस्टिस दिनाकरन के ख़िलाफ़ महाभियोग प्रस्ताव

कर्नाटक हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति पी डी दिनाकरन पर महाभियोग चलाने को लेकर राज्यसभा के 75 सांसदों ने सभापति हामिद अंसारी को पत्र सौंपा है. न्यायमूर्ति दिनाकरन पर आरोप है कि उन्होंने तमिलनाडु के तिरूवल्लूर ज़िले में काफ़ी जमीन हथियाई है.
उच्चतम न्यायालय के चयन मंडल ने इससे पहले तिरूवल्लूर के जिला कलेक्टर की रिपोर्ट पर विचार किया था.
उच्चतम न्यायालय या किसी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के ख़िलाफ़ महाभियोग लाने के लिए संबंधित ज्ञापन पर राज्यसभा के कम से कम 50 अथवा लोकसभा के कम से कम 100 सांसदों के हस्ताक्षर होना अनिवार्य है.
ज्ञापन
न्यायमूर्ति दिनाकरन के ख़िलाफ़ महाभियोग लाने के लिए भारतीय जनता पार्टी और वाम दलों के सांसदों ने ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं.
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सचिव और राज्यसभा सदस्य डी राजा से जब पत्रकारों ने पूछा कि क्या उनकी पार्टी इस महाभियोग प्रस्ताव का समर्थन कर रही है, तो उनका जवाब था कि वो इस प्रस्ताव का समर्थन कर रहे हैं.
याचिका मिलने के बाद राज्यसभा के सभापति तीन सदस्यीय समिति गठित करते हैं जिसमें एक सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश, एक उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश और एक न्यायविद् शामिल होता है.
ये समिति आरोपों की जांच करती है और अपनी रिपोर्ट सदन को सौंप देती है. यदि ये समिति दिनाकरन को दोषी पाती है और उन्हें पद से हटाने की सिफारिश करती है तो मामले को संसद में मतदान के लिए पेश किया जाएगा.
दोनों सदनों में ये प्रस्ताव दो तिहाई बहुमत से पारित होने पर दिनाकरन के पद से हटाया जा सकता है.












