उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव: भाजपा ने सभी महापौर के चुनाव जीते, योगी ने बताया जीत को ऐतिहासिक

यूपी निकाय चुनाव

इमेज स्रोत, ANI

    • Author, अनंत झणाणें
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, लखनऊ

उत्तर प्रदेश के निकाय चुनावों में भाजपा ने अपने प्रदर्शन को ऐतिहासिक जीत बताया है.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि, "नगर निकाय चुनाव में भाजपा ने अब तक की सबसे बड़ी जीत प्राप्त की है. 17 नगर निगमों में पहली बार पार्टी पूर्ण बहुमत के साथ विजय प्राप्त करने में सफल हुई है."

इन चुनावों को 2024 लोक सभा चुनावों के पहले एक महत्वपूर्ण मिनी चुनाव के रूप में देखा जा रहा है जो भाजपा को विपक्षी पार्टियों की तुलना में और ताकतवर बनाने का काम कर रहा है.

बीबीसी हिंदी

सीएम योगी आदित्यनाथ ने क्या कहाः-

  • बीजेपी ने 199 नगर पालिकाओं में से 60 में जीत हासिल की थी. लेकिन इस बार पार्टी आंकड़े दोगुने हैं.
  • साथ ही 545 नगर निकायों में पार्टी पिछली बार की तुलना में ढाई गुना अधिक सीटें जीती है.
  • नगर निगम में 1,420 वार्ड में से बीजेपी ने 2017 में 596 पर अब तक के 794 नतीजों में से 438 सीटें जीत चुकी है.
  • पार्टी मान कर चले कि पिछली बार से दुगने पार्षद नगर निगमों में जीत रहे हैं.
  • नगर पालिका के 5,327 पार्षद पदों में से 1,366 के परिणाम आ चुके हैं, जिनमें से भाजपा 638 सीटें जीत चुकी है.
  • नगर पंचायतों में भी 7,177 पार्षद के चयन होने थे और अभी तक 2,457 सीटों में से भाजपा 933 जीत चुकी है.
बीबीसी हिंदी

इस जीत का श्रेय योगी ने, "शासन, विकास और सुरक्षा के वातावरण" को दिया और कहा कि चुनाव में बेहतर समन्वय को पार्टी की सबसे मज़बूत ताकत बताया.

पार्टी के सहयोगी दल अपना दल (इसके) ने प्रदेश में दो विधान सभा के स्वार और छानबे सीटों के उप चुनाव जीतने की बात भी कही.

आपको यह भी बता दें कि इस बार निकाय चुनाव में कई सारे निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में उतरे और जीते भी हैं.

यूपी में 17 नगर निगम हैं- अयोध्या, झांसी, बरेसी, मथुरा-वृंदावन, मुरादाबाद, सहारनपुर, प्रयागराज, अलीगढ़, शाहजहांपुर, ग़ाज़ियाबाद,आगरा, लखनऊ, कानपुर, मेरठ, फ़िरोज़ाबाद, वाराणसी और गोरखपुर हैं.

उधर, समाजवादी पार्टी ने वोटों की गिनती में धांधली करने का आरोप लगाया है.

शहरी स्थानीय निकायों में 17 मेयर और 1,401 पार्षदों के लिए दो चरणों चार मई और 11 मई को चुनाव हुए थे. प्रदेश चुनाव आयोग के अनुसार, 19 पार्षद निर्विरोध चुने गए.

प्रदेश चुनाव आयोग की वेबसाइट पर निकाय चुनाव के नतीजों को देखने के लिए यहां क्लिक करें.

यूपी निकाय चुनाव

इमेज स्रोत, ANI

भाजपा का व्यापक प्रचार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 50 से अधिक जनसभाएं कर पार्टी के लिए चुनावी ज़मीन तैयार की थी.

वरिष्ठ पत्रकार सुमन गुप्ता कहती हैं, "इसमें तो कोई दो राय नहीं है कि इस चुनाव में जितनी मेहनत योगी आदित्यनाथ ने की है, उतनी मेहनत विपक्षी दल के किसी नेता ने नहीं की है. सारी सीटों को योगी आदित्यनाथ ने प्रतिष्ठा का प्रश्न बना रखा था."

"उदाहरण के तौर पर अयोध्या की सीट उनके लिए बहुत मायने रखती थी. अयोध्या में विकास कार्यक्रमों के लिए हुई तोड़ फोड़ तो की वजह से थोड़ा लग रहा था कि कहीं ऐसा ना हो की वो चूंक जाएं. मैं समझती हूँ की अयोध्या की ऐसा नगर निगम था जहां वो दो बार चुनाव के प्रचार के लिए गए."

योगी आदित्यनाथ ने ट्रिपल इंजन की सरकार का नारा भी दिया था जिसमे उन्होंने देश, प्रदेश और शहर तीनों जगह भाजपा के शासन का मॉडल जनता के सामने रखा था.

लखनऊ में भाजपा को लम्बे समय से कवर करते आ रहे पत्रकार रतिभान त्रिपाठी कहते हैं कि, "विपक्ष भाजपा को दोष भी नहीं दे सकती है. भाजपा सरकार में रह कर बूथ लेवल पर घर घर जा रही थी और यह लोग विपक्ष में रह कर भी ऐसा कुछ नहीं कर रहे थे."

अलीगढ़ में एक चुनावी सभा में अखिलेख यादव

इमेज स्रोत, ANI

इमेज कैप्शन, बीते 9 मई को अलीगढ़ में एक चुनावी सभा में अखिलेख यादव और अन्य सपा नेता.

विपक्ष के प्रचार में कमी

जानकार मानते हैं कि इन चुनावों में विपक्ष ने भाजपा को चुनौती देने में कमी कर दी.

पत्रकार रतिभान त्रिपाठी कहते हैं, "अखिलेश यादव ने कम चुनाव प्रचार किया. मायावती ने कह दिया था कि वो प्रचार नहीं करेंगी, जबकि वो चुनाव पूर्ण रणनीतिक रूप से लड़ रही थीं क्योंकि उन्होंने 11 मेयर के टिकट मुसलमानों को दिए थे ताकि समाजवादी पार्टी का वोट डैमेज हो."

कांग्रेस के प्रचार के बारे में वो कहते हैं, "कांग्रेस का कोई नेतृत्व प्रदेश में मौजूद ही नहीं था जो चुनाव प्रचार करता. जब विपक्ष ने खुद ही अपनी गेंद भाजपा के पाले में दाल दी, और भाजपा इतनी मेहनत कर रही है, तो फिर परिणाम तो उसके पक्ष में आना स्वाभाविक है."

अखिलेश यादव के प्रचार के बारे में वरिष्ठ पत्रकार सुमन गुप्ता कहती हैं, "अखिलेश यादव तो अपने ख़ास लोगों के लिए ही प्रचार में उतरे. इस पूरे चुनाव में नहीं लगा की समाजवादी पार्टी बतौर पार्टी यह चुनाव लड़ रही है."

बसपा के प्रचार न करने के बारे में वो कहती हैं, "बसपा का वैसे भी कैडर आधारित राजनीतिक सिस्टम रहा है. वोट चुनावों में घट रहा है, लेकिन एक आधार वाला वोट है, वो उनके पास रहता है."

बसपा सुप्रीमो मायावती
इमेज कैप्शन, बसपा सुप्रीमो मायावती

कितने स्थानीय निकाय?

वैसे तो यह चुनाव नगर निकाय के हैं, लेकिन 2024 में आम चुनावों से पहले यूपी की 80 लोकसभा सीटों का ये लिटमस टेस्ट या कहें सेमीफाइनल भी है.

इस चुनाव के रिजल्ट से राजनीतिक दल उत्तर प्रदेश में 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए अपनी-अपनी तैयारी को परखेंगे.

बीजेपी ने इस चुनाव में अपनी पूरी ताक़त लगाई है और अपने हक़ में बेहतर नतीजों की उम्मीद कर रही है.

इन निकाय चुनावों में मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने अपने चुनाव चिह्न पर उम्मीदवार उतारे हैं. दूसरी तरफ़ अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी भी अपने पक्ष में रुझान आने की उम्मीद कर रही है.

उत्तर प्रदेश के 75 ज़िलों में कुल 17 नगर निगम यानी महापालिका हैं जबकि 199 नगर पालिका परिषद और 544 नगर पंचायत हैं.

इन सभी के लिए ये स्थानीय निकाय चुनाव हुए हैं. नगर निगम सबसे बड़ी स्थानीय निकाय होती है, उसके बाद नगर पालिका और फिर नगर पंचायत.

उत्तर प्रदेश में हुए निकाय चुनाव में दो चरणों में वोटिंग हुई थी. पहले चरण की वोटिंग 04 मई को हुई थी जिसमें 37 ज़िलों के 10 नगर निगम, 104 नगर पालिका और 276 नगर पंचायतों में वोट डाले गए थे.

पहले चरण में कुल 52 प्रतिशत के आसपास वोटिंग हुई थी.

दूसरे चरण की वोटिंग 11 मई को हुई थी जिसमें 38 ज़िलों के 7 नगर निगम, 95 नगर पालिका और 267 नगर पंचायत में कुल 53 फ़ीसदी मतदान हुआ था.

योगी मोदी

इमेज स्रोत, ANI

इमेज कैप्शन, बीते फ़रवरी में लखनऊ में यूपी ग्लोबल इनवेस्टर समिट 2023 के मौके पर यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और पीएम नरेंद्र मोदी.

यूपी निकाय चुनाव क्यों हैं अहम?

आबादी के लिहाज़ से यूपी क़रीब 20 करोड़ की आबादी के साथ देश का सबसे बड़ा राज्य है.

लोकसभा की 80 और विधानसभा की 404 सीटें हैं. यहां से अधिकतम सीटें हासिल करने का मतलब केंद्र में सत्ता की दावेदारी का प्रबल होना है.

बीजेपी की नज़रें आगामी लोकसभा चुनावों पर हैं और उसकी कोशिश होगी कि अधिक से अधिक सीटें हासिल करे.

निकाय चुनावों के रुझान से यूपी सरकार के पास अपनी नीतियों में और सुधार लाने का मौका होगा.

ये असल में कार्यकर्ताओं का चुनाव होता है जो पार्टियों को लोकसभा और विधानसभा जिताने में अहम भूमिका अदा करते हैं.

निकाय चुनावों में जिस पार्टी का दबदबा होता है, लोकसभा या विधानसभा चुनावों में उसके अच्छे प्रदर्शन की संभावना भी बढ़ जाती है.

वीडियो कैप्शन, एनकाउंटर, बुलडोज़र की रणनीति-राजनीति यूपी को किस दिशा में ले जा रही है?

योगी का आक्रामक प्रचार अभियान

इस चुनाव में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने लगभग 17 नगर निगम वाले ज़िलों में चुनाव प्रचार की कमान अपने हाथ में ले रखी थी.

ये चुनाव गैंगस्टर से राजनेता बने पूर्व सांसद अतीक़ अहमद की हत्या के बाद के माहौल में हुए. योगी ने आक्रामक चुनाव प्रचार करते हुए सुदृढ़ शासन व्यवस्था को अपने प्रचार अभियान का प्रमुख मुद्दा बनाया.

उन्होंने अयोध्या में एक, गोरखपुर और बनारस में दो-दो रैलियां कीं. पूर्वांचल के ये तीन प्रमुख सत्ता केंद्र हैं जहां बीजेपी के लिए काफ़ी कुछ दांव पर है. गोरखपुर योगी आदित्यनाथ का क्षेत्र है जबकि बनारस से खुद पीएम मोदी सांसद हैं. अयोध्या में अगले साल तक राम मंदिर बनकर पूरा होने वाला है जो कि बीजेपी का सालों पुराना वादा रहा है.

योगी ने अपनी सभाओं में मतदाताओं से डबल इंजन सरकार के अलावा अब शहरों की बागडोर भी देने की अपील की. बीजेपी ने बेहतर प्रशासन के लिए जनता से 'ट्रिपल इंजन सरकार' बनाने को कहा.

जबकि प्रमुख विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव प्रदेश में क़ानून व्यवस्था पर लगातार सवाल खड़ा करते रहे हैं.

मुस्लिम वोटर

इमेज स्रोत, ANI

भाजपा: 395 मुसलमानों को दिए थे टिकट

भाजपा के उत्तर प्रदेश के अल्पसंख्यक मोर्चे के अध्यक्ष बासित अली की मानें तो निकाय चुनावों में पार्टी ने अलग अलग स्तर पर 395 मुसलमान उम्मीदवारों को टिकट दिए.

बासित अली के मुताबिक़ पार्टी ने प्रदेश के रामपुर, मोरादाबाद, संभल, मेरठ, बदायूं, बरेली, अलीगढ़, लखनऊ, अम्बेडकरनगर, आज़मगढ़ में उम्मीदवारों को चुनाव लड़वाया. और इसमें सबसे बड़ी तादात मुस्लिम बाहुल्य वाले पश्चिम उत्तर में रही है.

2017 में पार्टी के मुस्लिम उम्मीदवारों का आंकड़ा 70 से 80 के आस पास था.

भाजपा पसमांदा मुसलमानों को पार्टी के साथ राजनीतिक तौर पर और अपनी योजनाओं से जोड़ने की कोशिशों में भी लगी हुई है.

अभी फिलहाल नतीजों का इंतज़ार है लेकिन इन प्रयासों के बारे में पत्रकार सुमन गुप्ता कहती हैं, "यह एक रणनीति का हिस्सा है. वो यह है कि मुसलमानों को थोड़ा बेअसर कर दो और इन्हे थोड़ा लाभ दे दो. और इनको बाँट दो. यह कोई प्रेम नहीं है. और लोग अवसर का लाभ उठाने के लिए उनके उम्मीदवार भी बनते हैं और उनके साथ प्रचार भी करते हैं"

वो बसपा की पश्चिम उत्तर प्रदेश में मुसलमानों को जोड़ने की कोशिशों के बारे कहती हैं, "जहाँ पर मुस्लमान वोट होता है तो फिर बसपा का आधार वोट और मुस्लिम कैंडिट का वोट यह मायने रखता है. अगर ऐसा मेल होता है तो पश्चिमित उत्तर प्रदेश में उनकी स्थिति काफी मज़बूत हो जाती है."

भाजपा पर रिपोर्टिंग करने वाले रतिभान त्रिपाठी कहते हैं, "99 प्रतिशत मुसलमान भाजपा को वोट नहीं देते हैं. लेकिन अब विपक्ष यह नहीं कह पाएगा की भाजपा मुसलामानों को टिकट नहीं देती है या उनसे परहेज़ करती है."

अंत में वो कहते हैं कि, "विपक्ष के पास विरोध की कोई गहरी रणनीति नहीं है."

कानपुर में समाजवादी पार्टी सांसद डिंपल यादव ने पार्टी उम्मीदवार के पक्ष में प्रचार किया था.

इमेज स्रोत, ANI

इमेज कैप्शन, कानपुर में समाजवादी पार्टी सांसद डिंपल यादव ने पार्टी उम्मीदवार के पक्ष में प्रचार किया था.

क्या है समाजवादी पार्टी का कहना

पार्टी के प्रवक्ता अब्बास हैदर कम मतदान को इन नतीजों की वजह बताते हैं.

वो कहते हैं, "उत्तर प्रदेश में जब भी मतदान होता था तो डर और भय का माहौल बनाया जाता था."

चुनाव के दोनों चरणों में लगभग पचास प्रतिशत के आसपास मतदान हुआ. मुख्यमंत्री योगी के प्रचार के बारे में वो कहते हैं, "यह अप्रत्याशीत है कि जो चुनाव नाली, खड़ंजा, कूड़ा करकट, साफ़ सफाई के मुद्दों का होता है, वो हेलीकाप्टर से लड़ा गया."

अब्बास हैदर का दावा है कि, "जहाँ पोलिंग प्रतिशत ज़्यादा रहा वहां सपा की जीत हुई है और जहाँ पोलिंग प्रतिशत गिरा है वहां भाजपा की जीत हुई है."

फिलहाल यह तभी साबित हो पाएगा जब पूरी तरह से जीत के आंकड़े सामने आ जाएंगे.

ये भी पढ़ेंः-

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहाँ क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)