अतीक़ अहमद हत्याकांड: विपक्षी नेताओं ने लगाया क़ानून व्यवस्था की नाकामी का आरोप

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उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में शनिवार की रात क़रीब 10.30 बजे पूर्व सांसद अतीक़ अहमद और उनके भाई अशरफ़ की गोली मारकर हत्या कर दी गई.
हमलावरों ने गोली तब चलाई जब पुलिस अतीक अहमद और अशरफ़ को मेडिकल चेक-अप के लिए प्रयागराज के काल्विन अस्पताल लेकर जा रही थी.
पत्रकार बनकर आए हमलावरों ने अस्पताल के ठीक सामने, पुलिस के घेरे में दोनों पर बेहद नज़दीक़ से गोलियां चलाईं. हमलावरों ने गोली चलने के बाद वहां पर धार्मिक नारेबाज़ी भी की.
ये पूरी घटना लाइव कैमरों में कैद भी हुई. वारदात के वक्त अतीक़ और अशरफ़ पैदल चलते हुए मीडिया से बात कर रहे थे.
पुलिस ने तीनों हमलावरों को गिरफ्तार कर लिया है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना का संज्ञान लेते हुए उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं और तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग के गठन की घोषणा भी की है.
इस घटना के बाद राजनीतिक बयानबाज़ी शुरू हो गई है. विपक्षी नेताओं ने उत्तर प्रदेश में क़ानून व्यवस्था पर सवाल खड़ा किए.
वहीं बीजेपी नेताओं ने इसे आसमानी फैसला बताया.
बीजेपी नेताओं ने क्या कहा?
उत्तर प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने अतीक अहमद हत्याकांड को 'आसमानी फ़ैसला' बताया है.
समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए उन्होंने कहा, "जब ज़ुल्म की इंतहा होती है या अपराध की पराकाष्ठा होती है तो कुछ फ़ैसले आसमान से होते हैं. मैं समझता हूं कि ये कुदरत का फ़ैसला है."

उत्तर प्रदेश सरकार में जलशक्ती मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने एक ट्वीट में तंज कसते हुए लिखा है, "पाप-पुण्य का हिसाब इसी जन्म में होता है…"
पाप-पुण्य का हिसाब इसी जन्म में होता है…
किस विपक्षी नेता ने क्या कहा?
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस हत्याकांड पर सवाल उठाए हैं.
उन्होंने ट्वीट कर लिखा, "उप्र में अपराध की पराकाष्ठा हो गयी है और अपराधियों के हौसले बुलंद है. जब पुलिस के सुरक्षा घेरे के बीच सरेआम गोलीबारी करके किसी की हत्या की जा सकती है तो आम जनता की सुरक्षा का क्या."
"इससे जनता के बीच भय का वातावरण बन रहा है, ऐसा लगता है कुछ लोग जानबूझकर ऐसा वातावरण बना रहे हैं."
उप्र में अपराध की पराकाष्ठा हो गयी है और अपराधियों के हौसले बुलंद है. जब पुलिस के सुरक्षा घेरे के बीच सरेआम गोलीबारी करके किसी की हत्या की जा सकती है तो आम जनता की सुरक्षा का क्या.
लोकसभा सांसद और एआईएमआईएम के नेता असदउद्दीन ओवैसी ने भी यूपी सरकार को निशाने पर लिया है.
एक ट्वीट में ओवैसी ने कहा, "अतीक़ और उनके भाई पुलिस की हिरासत में थे. उने हाथों में हथकड़ियां लगी हुई थीं. JSR (जय श्री राम) के नारे भी लगाए गये. दोनों की हत्या योगी के क़ानून व्यवस्था की नाकामी है. एनकाउंटर राज का जश्न मनाने वाले भी इस हत्या के ज़िम्मेदार हैं."
दोनों की हत्या योगी के क़ानून व्यवस्था की नाकामी है. एनकाउंटर राज का जश्न मनाने वाले भी इस हत्या के ज़िम्मेदार हैं.
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, "हमारे देश का क़ानून संविधान में लिखा गया है, यह क़ानून सर्वोपरि है. अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए, मगर देश के क़ानून के तहत होनी चाहिए."
"जो भी ऐसा करता है, या ऐसे करने वालों को संरक्षण देता है, उसे भी ज़िम्मेदार ठहराया जाना चाहिए और उस पर भी सख्ती से क़ानून लागू होना चाहिए."

उत्तर प्रदेश एनकाउंटर प्रदेश बनाः मायावती
उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने इसे लेकर उत्तर प्रदेश की क़ानून व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं और सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में खुद से संज्ञान लेकर कार्रवाई करने की मांग की है.
उन्होंने ट्वीट किया है, "गुजरात जेल से अतीक़ अहमद व बरेली जेल से लाए गए उनके भाई अशरफ़ की प्रयागराज में कल रात पुलिस हिरासत में ही खुलेआम गोली मारकर हुई हत्या, उमेश पाल जघन्य हत्याकाण्ड की तरह ही, यूपी सरकार की कानून-व्यवस्था व उसकी कार्यप्रणाली पर अनेकों गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े करती है."
"देश भर में चर्चित इस अति-गंभीर व अति-चिन्तनीय घटना का माननीय सुप्रीम कोर्ट अगर स्वंय ही संज्ञान लेकर उचित कार्रवाई करे तो बेहतर. वैसे भी उत्तर प्रदेश में ''कानून द्वारा कानून के राज'' के बजाय, अब इसका एनकाउंटर प्रदेश बन जाना कितना उचित? सोचने की बात."
देश भर में चर्चित इस अति-गंभीर व अति-चिन्तनीय घटना का माननीय सुप्रीम कोर्ट अगर स्वंय ही संज्ञान लेकर उचित कार्रवाई करे तो बेहतर.
यूपी में अपराधियों को पुलिस और मीडिया का भी डर नहींः ममता बनर्जी
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ट्वीट किया है, "उत्तर प्रदेश में क़ानून व्यवस्था के पूरी तरह ध्वस्त होने और खुलेआम अराजकता से मैं सदमे में हूं."
"ये शर्मनाक है कि अपराधी अब क़ानून व्यवस्था को अपने हाथ में ले रहे हैं और पुलिस और मीडिया की मौजूदगी से भी नहीं डर रहे. इस तरह की ग़ैरक़ानूनी करतूत की हमारे संवैधानिक लोकतंत्र में कोई जगह नहीं है."
तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने हत्याकांड पर सवाल उठाते हुए कहा कि वे इस बात को भी मान सकती हैं कि सत्यपाल मलिक के इंटरव्यू से नरेंद्र मोदी की छवि खराब हो रही है और इससे ध्यान भटकाने के लिए उत्तर प्रदेश में शूटिंग करवाई गई है.
हाल ही में 'द वायर' के साथ इंटरव्यू में जम्मू-कश्मीर के पूर्व उपराज्यपाल सत्यपाल मलिक ने पुलवामा हमले से लेकर भ्रष्टाचार तक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाए थे.
मैं तो इस बात पर भी यकीन कर सकती हूं कि सत्यपाल मलिक के इंटरव्यू के नतीजों से ध्यान भटकाने के लिए बीजेपी ने यूपी में शूटिंग करवाई है.
राष्ट्रीय लोकदल के और राज्यसभा सांसद जयंत चौधरी ने इस हत्याकांड को उत्तर प्रदेश में जंगलराज बताया है.
उन्होंने ट्वीट कर लिखा, "क्या ये लोकतंत्र में संभव है?"
क्या ये लोकतंत्र में संभव है?
संविधान का एनकाउंटरः पप्पू यादव
जन अधिकार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व सांसद पप्पू यादव का कहना है कि संविधान का एनकाउंटर किया जा रहा है.
उन्होंने ट्वीट कर लिखा, "जब गैंग सत्ता पर काबिज़ हो जाता है, तो रामराज नहीं आता, गैंगवार होता है. संविधान का एनकाउंटर कर पुलिस को राजनीति के लिए सुपारी किलर बना दिया जाता है तो वही नंगा नाच होता है जो इलाहाबाद में अभी हुआ है!"
जब गैंग सत्ता पर काबिज हो जाता है, तो रामराज नहीं आता, गैंगवार होता है.
राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने अतीक अहमद हत्याकांड पर सवाल उठाते हुए कहा कि यूपी में दो हत्याएं हुई हैं.
उन्होंने लिखा पहली हत्या अतीक़ अहमद और अशरफ़ की हुई और दूसरी क़ानून के शासन की.

बड़ी साज़िश की बूः राशिद अल्वी
कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने कहा, "अतीक़ बार-बार कहते थे कि वो यूपी जाएंगे तो उनका क़त्ल कर दिया जाएगा. ये बात तो सच साबित हो गई. जब सारी पुलिस उसे घेरे हुए है. वीडियो कैमरे नज़र आ रहे हैं."
उन्होंने लिखा "एक फ़ुट, डेढ़ फ़ुट के फासले से वो लड़का आकर पिस्तौल से गोली मारता है. ये कैसे मुमकिन है? इसमें मुझे बड़ी साजिश की बू नज़र आती है."
मुझे नहीं लगता है कि इस हालात में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री वहां की कानूनी व्यवस्था ठीक रख सकते हैं, ज्यादा बेहतर है कि उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए
सांसद कुंवर दानिश अली ने ट्वीट कर लिखा, "संवैधानिक न्याय व्यवस्था की मीडिया के सामने धज्जियाँ उड़ी और लोग तमाशा देख रहे हैं. यह अविश्वसनीय घटना एक बड़ी साज़िश के तहत हुई है."
किसी भी अन्य लोकतंत्र में कानून के शासन के ख़िलाफ़ ऐसा जघन्य अपराध होने पर राज्य सरकार बर्ख़ास्त होती लेकिन आज के 'नये भारत' में यह मुमकिन नहीं है.
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि उत्तर प्रदेश में जो हो रहा है वो पूरा देश देख रहा है. क़ानून का राज नहीं रहेगा तो ऐसी घटनाएं किसी के साथ भी हो सकती हैं.
उन्होंने कहा, "यूपी में जो कुछ हुआ वो आसान है लेकिन राज्य में क़ानून व्यवस्था बनाए रखना मुश्किल है."
चश्मदीद की ज़ुबानी
इस घटना को क़रीब से देखने वाले अतीक़ अहमद के वकील रहे विजय मिश्रा ने गोली चलने के समूचे घटनाक्रम को बताया.
उन्होंने कहा, "पुलिस उनको गाड़ी से निकाल कर मेडिकल चेक-अप के लिए ले जा रही थी. जैसे ही मेडिकल कैंपस के गेट से दो क़दम आगे बढ़े गोलियों की आवाज़ आई. मेरे बगल में विधायक को गोली लगी और फिर सांसद जी को गोली लगी दोनों वहीं गिर गए और फ़िर भगदड़ मच गई."
जब उनसे पूछा गया कि क्या पुलिस ने बचाने की कोशिश नहीं की तो उन्होंने कहा, "पुलिस ने गोली चलाने वालों को तुरंत पकड़ लिया."
क्या पुलिस ने कोई गोली चलाई? इस सवाल पर वो बोले, "नहीं उसे कोई देख नहीं पाया क्योंकि भगदड़ मच गई थी."

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दो दिन पहले बेटे का एनकाउंटर
गुरुवार को अतीक़ अहमद के बेटे असद और उसके सहयोगी गु़लाम मोहम्मद का उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स ने झांसी में कथित एनकाउंटर कर दिया था.
असद और ग़ुलाम का अंतिम संस्कार शनिवार को ही प्रयागराज में हुआ है.
यूपी पुलिस के मुताबिक़ असद और ग़ुलाम उमेश पाल की हत्या के मामले में वांछित थे और दोनों पर पांच-पांच लाख रुपए का इनाम घोषित था.

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अतीक़ अहमद का आपराधिक रिकॉर्ड
- अतीक़ अहमद के आपराधिक इतिहास में 100 से भी अधिक मुक़दमे दर्ज हैं.
- मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, साल 1979 में पहली बार हत्या का मुक़दमा दर्ज हुआ. उस वक्त अतीक़ अहमद नाबालिग़ थे.
- 1992 में इलाहाबाद पुलिस ने बताया कि अतीक़ के ख़िलाफ़ बिहार में भी हत्या, अपहरण, जबरन वसूली आदि के क़रीब चार दर्जन मामले दर्ज हैं.
- प्रयागराज के अभियोजन अधिकारियों के मुताबिक़, अतीक़ अहमद के ख़िलाफ़ 1996 से अब तक 50 मुक़दमे विचाराधीन हैं.
- अभियोजन पक्ष का कहना है कि 12 मुक़दमों में अतीक़ और उनके भाई अशरफ़ के वकीलों ने अर्ज़ियां दाख़िल की हैं जिससे केस में चार्जेज़ फ़्रेम नहीं हो पाए हैं.
- अतीक़ अहमद बसपा विधायक राजू पाल ही हत्या के मुख्य अभियुक्त थे. मामले की जांच अब सीबीआई के पास थी.
- अतीक़ अहमद 24 फरवरी को हुए उमेश पाल हत्या मामले के मुख्य अभियुक्त हैं.
- उमेश पाल, राजू पाल हत्याकांड के शुरुआती गवाह थे, लेकिन बाद में मामले की जांच संभाल रही सीबीआई ने उन्हें गवाह नहीं बनाया था.
- 28 मार्च को प्रयागराज की एमपीएमएलए अदालत ने अतीक़ अहमद को उमेश पाल का 2006 में अपहरण करने के आरोप में दोषी पाया और उम्र कै़द की सज़ा सुनाई.


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अशरफ़, अतीक़ के भाई
अतीक़ के भाई अशरफ़ उर्फ़ खालिद आज़मी के ख़िलाफ़ 52 मुक़दमे दर्ज हैं. इसमें हत्या, हत्या का प्रयास, बलवा (उपद्रव) और अन्य धाराओं के तहत मामले दर्ज हैं.
आपको बता दें की अशरफ़ को उमेश पाल की हत्या के मामले में भी अभियुक्त बनाया गया है.
ग़ौर करने वाली बात यह है कि अशरफ़ उमेश पाल के अपहरण वाले मामले के फै़सले में निर्दोष पाया गया था. इसी मुक़दमे में अतीक़ और दो अन्य को दोषी पाया गया और 6 अभियुक्त बरी हुए.
अशरफ़ बसपा विधायक राजू पाल की 2005 में हुई हत्या के भी अभियुक्त हैं और इनका मुक़दमा लखनऊ की सीबीआई अदालत में चल रहा है.
अशरफ को बरेली जेल में रखा गया था और उन्हें पेशी के लिए प्रयागराज लाया गया था.
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