तिहाड़ जेल में हत्या: 15 मिनट में टिल्लू ताजपुरिया पर 90 वार

टिल्लू तेजपुरिया

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    • Author, नितिन श्रीवास्तव
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

24 सितंबर, 2021. कोर्टरूम:207, दिल्ली का रोहिणी कोर्ट कॉम्प्लेक्स.

गैंगस्टर जितेंद्र मान गोगी की अदालत में पेशी थी और कोर्टरूम में कई वक़ील मौजूद थे.

सुनवाई शुरू होने के पहले ही वकीलों वाला काला कोट पहने हुए दो लोगों ने पिस्तौल निकाल कर गोगी पर फ़ायरिंग शुरू कर दी.

कोर्टरूम के भीतर और बाहर भगदड़ मच गई और दिल्ली पुलिसकर्मियों ने जवाबी गोलियाँ चलाईं. कुल 27 गोलियाँ चलने के बीच जितेंद्र मान गोगी और उस पर हमला करने वाले दोनों हमलावर मर चुके थे.

भारत की राजधानी दिल्ली की इस अदालत परिसर में दिन-दहाड़े एक गैंगस्टर की हत्या ने खलबली मचा दी थी क्योंकि उस समय कोर्ट परिसर में 68 दूसरे मामलों की सुनवाई जारी थी.

2 मई, 2023. ग्राउंड फ़्लोर बैरक, जेल नंबर 8, तिहाड़ जेल, दिल्ली

दिल्ली पुलिस के एक कर्मचारी ने नाम न लिए जाने की शर्त पर बताया, "सुबह के छह बजे के आसपास तिहाड़ जेल की अपनी बैरक में मौजूद थे गैंगस्टर सुनील बालयान उर्फ़ टिल्लू ताजपुरिया जब उन पर जानलेवा हमला हुआ."

खबरों के मुताबिक़, हमलावरों ने पहली मंज़िल वाली अपनी बैरक से ग्राउंड फ़्लोर पहुँचने के लिए बेडशीट बांध कर रस्सी की तरह इस्तेमाल किया. उन्होंने लोहे की जाली और जेल से ही तोड़ी गईं सलाख़ों से मार-मार कर टिल्लू ताजपुरिया के शरीर पर महज़ 15 मिनट में 90 घाव कर दिए.

इस बीच जेल के सुरक्षा गार्डों को टिल्लू की चीखें सुनाई दीं और उन्होंने खून में लथपथ पड़े टिल्लू को पहले तिहाड़ जेल के अस्पताल और उसके बाद एम्बुलेंस से दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल पहुँचाया. लेकिन देर हो चुकी थी.

दरअसल, रोहिणी कोर्ट परिसर में जितेंद्र गोगी पर हुए हमले के पीछे कथित तौर पर टिल्लू ताजपुरिया का ही हाथ बताया गया था.

और अब तिहाड़ में हुए इस हमले के पीछे जितेंद्र गोगी की मौत का बदला बताया जा रहा है.

जितेंद्र गोगी के सहयोगी कहे जाने वाले गोल्डी बरार- जिन्हें कनाडा में छुपा हुआ बताया जा रहा है- ने कथित तौर पर एक फ़ेसबुक पोस्ट में इस हमले की ज़िम्मेदारी लेते हुए इस बात को माना है.

हालांकि इस बात की पुष्टि नहीं हो सकी है कि ये गोल्डी बरार का ही फ़ेसबुक अकाउंट है या क्या ये पोस्ट उन्होंने ही लिखी है.

लेकिन गोल्डी बरार ने जिन लोगों का नाम लिख कर उन्हें इसे 'गोगी की हत्या का बदला लेने की तारीफ़ की है', पुलिस सूत्रों ने भी उन चारों के नाम की पुष्टि की है.

तिहाड़ जेल

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हत्या पर सवाल

ज़ाहिर है, एशिया के सबसे बड़े कहे जाने वाले तिहाड़ जेल में खुलेआम हुई इस हत्या पर सवाल तो उठेंगे ही.

पहला सवाल

जब ये जगज़ाहिर था कि टिल्लू और गोगी गैंग के बीच खून-खराबा और रंजिश पिछले एक दशक से ज़्यादा से जारी थी तब भी टिल्लू और गोगी गैंग के कथित सदस्यों को क़ैद में एक दूसरे से इतना क़रीब क्यों रखा गया?

टिल्लू और गोगी दोनों दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र थे, जहां श्रद्धानंद कॉलेज के चुनावों में दोनों में पहला टकराव हुआ था.

जबकि हक़ीक़त ये है कि ताजपुरिया को तो सिर्फ़ दो हफ़्ते पहले ही मंडोली जेल से तिहाड़ शिफ़्ट किया गया था.

दूसरा सवाल

वार्ड में दर्जनों सीसीटीवी कैमरे और चौबीसों घंटे की पहरेदारी मौजूद थी तब भी गोगी गैंग के कथित सदस्य लोहे की ग्रिलें काटते रहे और किसी का ध्यान तक कैसे नहीं गया? साथ ही उनके पास तेज़ धार के ये औज़ार कहाँ से और कैसे पहुंचे?

तीसरा और सबसे अहम सवाल

अगर पूरे पंद्रह मिनट तक टिल्लू पर हमलावर वार करते रहे तो क्या वहां एक भी गार्ड या असलहे वाला पहरेदार नहीं था? गार्डों को मोर्चा सम्भालने में इतना समय कैसे और क्यों लगा?

कई साल पहले दिल्ली पुलिस के एसीपी और एंकाउंटर स्पेशलिस्ट माने जाने वाले राजबीर सिंह ने मुझे बताया था कि, "कई मौक़े आते हैं जब हम पुलिस वाले इस बात पर लाचारी महसूस करते हैं कि कोई क्रिमिनल या गैंगस्टर जेल पहुंच कर अपने गैंग को फिर से चलाने लगेगा. जेलों में अपने को सुरक्षित भी महसूस करते हैं और इसी फ़िराक़ में रहते हैं कि उनके चेले भी उस दौरान वहां रह कर उनकी सुरक्षा और सेवा दोनों करें."

तिहाड़ जेल

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तिहाड़ में हत्याएं

वैसे दिल्ली की तिहाड़ जेल पहले जितनी मशहूर हुआ करती थी अब उसे उससे कहीं ज़्यादा सफ़ाइयाँ देनी पड़ रहीं हैं. पिछले महीने ही तिहाड़ जेल में गैंगस्टर प्रिंस तेवतिया की हत्या हो गई थी और उनके शरीर पर किसी चाकू-नुमा चीज़ के आठ पार घोंपे जाने के निशान मिले थे.

2021 में द प्रिंट न्यूज़ वेबसाइट ने रिपोर्ट किया था कि दिल्ली के तिहाड़ जेल से एक दो नहीं बल्कि सात ख़तरनाक गैंगस्टर अपने-अपने गैंग चलाते रहे हैं.

2021 में ही तिहाड़ जेल के भीतर गैंगस्टर अंकित गुज्जर का शव मिला था और सीबीआई जांच में एक जेल अधिकारी के ख़िलाफ़ चार्ज भी लगाया गया था.

पूर्व आइपीएस अधिकारी यशोवर्धन आज़ाद का मानना है कि, "जब तक सिस्टम से भ्रष्टाचार नहीं हटेगा इस तरह के मामले होते रहेंगे."

उन्होंने कहा, "कितने मामले प्रकाश में आ चुके हैं जहां जेल में अमीर क़ैदियों की कथित मदद के लिए अधिकारी-कर्मचारी सस्पेंड होते रहते हैं. लेकिन उसके बाद क्या होता है? छोटी-मोटी कार्रवाई या फ़ाइन या सस्पेंशन के बाद उनकी बहाली हो जाती है या तो ट्रांसफ़र हो जाता है, बस."

बीबीसी की कई कोशिशों के बावजूद तिहाड़ जेल के महानिदेशक (कारागार) संजय बेनीवाल से संपर्क नहीं हो सका लेकिन उनके दफ़्तर ने मामले की जांच के आदेश जारी कर दिए हैं जबकि दिल्ली सरकार भी एक मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में जांच करने का फ़ैसला ले चुकी है.

वैसे इसी साल फ़रवरी में संजय बेनिवाल ने कहा था कि दिल्ली की तीन बड़ी जेलों में से उस महीने, "348 मोबाइल फ़ोन और उनके चार्जर वग़ैरह बरामद किए गए थे."

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