राजस्थान कांग्रेस का संकट टालने के लिए 'दिल्ली चलने' का प्रस्ताव पायलट ने ठुकराया- प्रेस रिव्यू

सचिन पायलट

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राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के ख़िलाफ़ लंबे समय से बग़ावती तेवर अख़्तियार करने वाले कांग्रेस नेता सचिन पायलट की नाराज़गी दूर करने के लिए पार्टी की कोशिशें जारी हैं.

अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू के अनुसार, पार्टी की मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष कमलनाथ अब इस विवाद में मध्यस्थता कर रहे हैं. कमलनाथ ने राजस्थान कांग्रेस का मौजूदा संकट टालने के लिए गुरुवार शाम सचिन पायलट से मुलाक़ात की. इस दौरान उनके साथ पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल भी थे.

अख़बार ने सूत्रों के हवाले से जानकारी दी है कि इन नेताओं ने सचिन पायलट को पार्टी में केंद्रीय स्तर पर अहम ज़िम्मेदारी सौंपने की पेशकश की है. बताया गया है कि पायलट को केंद्रीय कार्यसमिति में जगह देने का प्रस्ताव भी रखा गया है.

कांग्रेस की सर्वोच्च नीति नियामक संस्था कांग्रेस कार्यसमिति है. कर्नाटक विधानसभा चुनाव के बाद मई में इस समिति का पुनर्गठन होने की उम्मीद है.

हालांकि अख़बार का यह भी कहना है कि सचिन पायलट ने पार्टी से मिले इस प्रस्ताव में कोई ख़ास रुचि नहीं दिखाई. पायलट राज्य की राजनीति में ही सक्रिय रहने के अपने रुख़ पर कायम दिखे.

बताया गया है कि कमलनाथ और केसी वेणुगोपाल ने सचिन पायलट का पक्ष गौर से सुना और उन्हें समझाया कि यदि उनका रुख़ यही रहा तो इस कारण अगले चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है. इसलिए उनके सामने प्रस्ताव रखा गया कि वे दिल्ली चलें और वहां रहकर राज्य में अनुकूल राजनीतिक माहौल का इंतज़ार करें.

अख़बार के अनुसार, राजस्थान विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारों के चयन के लिए बनने वाली स्क्रीनिंग कमेटी में पायलट को एक अहम भूमिका देने का प्रस्ताव भी दिया गया है, जिससे कि उन्हें अपनी बात रखने का मौक़ा मिल सके.

हालांकि दावा किया गया है कि सचिन पायलट 'नेतृत्व में बदलाव' के अपने पुराने रुख़ पर ही कायम रहे. पायलट ने याद दिलाया कि 2018 के विधानसभा चुनाव के वक़्त प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए उनसे नेतृत्व बदलने का वादा किया गया था.

चुनाव

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केसीआर का दावा- केंद्र में अगली सरकार उनकी ही होगी

अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव के पहले विपक्षी दलों को एकजुट करने की नीतीश कुमार की मुहिम को तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव के ताज़ा बयान से ठेस पहुंच सकता है.

हिंदी दैनिक दैनिक जागरण के अनुसार, तेलंगाना के सीएम और भारत राष्ट्र समिति (BRS) के अध्यक्ष चंद्रशेखर राव ने शुक्रवार को कहा कि केंद्र की अगली सरकार उनकी पार्टी की बनेगी.

आंबेडकर जयंती के मौक़े पर शुक्रवार को हैदराबाद में बाबा साहेब की देश की सबसे ऊंची (125 फ़ीट) प्रतिमा के अनावरण के मौक़े पर आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने यह दावा किया है. उन्होंने कहा है कि बीआरएस को महाराष्ट्र में ज़बरदस्त समर्थन मिल रहा है और बंगाल, बिहार एवं उत्तर प्रदेश में भी ऐसे ही समर्थन की उम्मीद है.

उन्होंने कहा कि वो जब 2014 में दिल्ली के लिए रवाना हुए थे, तो कहकर गए थे कि आंध्र प्रदेश छोड़ रहे हैं, अब तेलंगाना में लौटेंगे. राव ने कहा कि अब फिर उसी आत्मविश्वास से कह रहा हूं कि देश में अगली सरकार हमारी बनेगी.

इससे पहले बिहार के सीएम नीतीश कुमार और राजद नेता तेजस्वी यादव ने विपक्ष को एकजुट करने के इरादे से इसी हफ़्ते दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी से मुलाक़ात की थी.

शक्तिकांत दास

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पूरी तरह सुरक्षित हैं हमारे बैंक: आरबीआई गवर्नर

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को कहा कि हाल के दिनों में कई विकसित देशों के बैंकिंग सिस्टम में आई उथल पु​थल से भारत का फाइनेंशियल ​सिस्टम 'पूरी तरह सुरक्षित' है.

बिज़नेस स्टैंडर्ड के अनुसार, वॉशिंगटन डीसी में भारत की अध्यक्षता में आयोजित जी20 देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंकों के गवर्नरों की दूसरी बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए दास ने ये बातें कही हैं.

उन्होंने कहा, "भारत का बैंकिंग सिस्टम, भारत का फाइनैंशियल सिस्टम, अभी तक उन घटनाओं से पूरी तरह बचे हुए हैं, जो अमेरिका या स्विट्जरलैंड में हुए हैं. हमारा बैंकिंग सिस्टम लचीला, स्थिर और स्वस्थ है."

ये बैठक तीन सत्रों में आयोजित की गई, जिसमें दुनिया की अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय फाइनैंशियल ढांचे, सस्टेनेबल फाइनैंस, वित्तीय सेक्टर और वित्तीय समावेशन, अंतरराष्ट्रीय कराधान जैसे मामलों पर विचार किए गए.

दास ने कहा है कि पिछले कुछ सालों के दौरान, आरबीआई ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) सहित पूरे बैंकिंग सिस्टम के रेगुलेशन और मॉनिटरिंग में काफी सुधार लाते हुए इसे सख़्त बनाया है.

अमित शाह

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क्रिमिनल मामले जल्दी निपटाने के लिए सरकारी वकीलों पर लगेगी लगाम

आपराधिक मामलों का समय पर निपटारा करने के लिए केंद्र सरकार सरकारी वकीलों की जवाबदेही तय करने जा रही है. इसके लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय अपनी 'ई-प्रोसिक्यूशन' वेबसाइट पर एक नई सुविधा जोड़ी है.

द हिंदू ने एक सीनियर अधिकारी के हवाले से बताया है कि किसी आपराधिक मामले में कोई भी सरकारी वकील जब अदालत से दो से अधिक बार 'स्टे' मांगेगा, तो यह नई सुविधा सीनियर अधिकारियों को एक अलर्ट भेजेगा.

उन्होंने कहा, ई-प्रोसिक्यूशन मॉडल, इंटरऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) का एक हिस्सा है.

ICJS के तहत, क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम के विभिन्न हिस्सों जैसे अदालतें, पुलिस, जेल और फॉरेंसिक साइंस प्रयोगशालाओं को एक प्लेटफॉर्म के ज़रिए जोड़ा गया है. ऐसा करके इन संस्थाओं के बीच डेटा और सूचनाएं बिना किसी रोकटोक के हस्तांतरित होती हैं.

ई-प्रोसिक्यूशन मॉडल को अभी तक देश के 751 ज़िलों में लागू किया जा चुका है और शेष 153 ज़िलों के लिए सॉफ्टवेयर विकसित करने का काम प्रगति पर है.

इससे पहले, ICJS के मुख्य अंगों को 'क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (CCTNS)' के रूप में स्वतंत्र तरीक़े से वि​कसित किया गया था. ये प्रमुख अंग ई-पुलिस, ई-कोर्ट, ई-जेल, ई-फोरेंसिक और ई-प्रोसेक्यूशन हैं.

सीसीटीएनएस देश के 16,000 से अधिक ​थानों को जोड़ती है और इसमें क़रीब 29 करोड़ पुलिस रिकॉर्ड का डेटाबेस मौजूद है. इसे केवल कानून प्रवर्तन एजेंसियों और अदालतों द्वारा ही एक्सेस किया जा सकता है.

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