तथागत अवतार तुलसी: 22 साल में बने IIT के प्रोफ़ेसर, पर अब बेरोज़गार क्यों?

- Author, चंदन कुमार जजवाड़े
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, पटना से
यह जानकर किसी को भी हैरानी होगी कि बचपन से पढ़ाई में कई कीर्तिमान बनाने वाले तथागत अवतार तुलसी आजकल बेरोज़गार क्यों हैं.
पांच साल की उम्र से ही सुर्ख़ियों में रहे तथागत के साथ आख़िर क्या हुआ जो आज वो इस हालत में पहुंच गए हैं?
"मैंने अपना सारा बचपन फ़िज़िक्स को दे दिया, इस उम्मीद में कि एक दिन मैं कोई बड़ा आविष्कार करूंगा और नोबेल प्राइज़ जीतूंगा. मैं देश का नाम रोशन करूंगा. अगर मैं कुछ नहीं कर पाया तो यह मेरे बचपन के साथ नाइंसाफ़ी होगी."
ये शब्द हैं तथागत अवतार तुलसी के.
तुलसी ने अपनी प्रतिभा के दम पर केवल नौ साल की उम्र में मैट्रिक की परीक्षा पास कर ली थी. पीएचडी करने के बाद महज़ 22 साल की उम्र में वो आईआईटी बॉम्बे में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर बन गए थे.
आजकल सेहत की वजहों से वो बेरोज़गार हैं. तथागत को मुंबई की हवा रास नहीं आई और उन्हें एलर्जी की बीमारी हो गई. इसी वजह से उनकी आईआईटी बॉम्बे की नौकरी चली गई.

आईआईटी की नौकरी क्यों गई?
अपनी ज़िंदगी में तथागत ने कई मुकाम हासिल किए, लेकिन जिस तरह की उनकी पढ़ाई हुई, उनका कोई मित्र नहीं बन पाया. सब उनसे उम्र में काफ़ी बड़े थे. जिस उम्र में लोगों के पास मित्रों की मंडली होती है, उस उम्र में तथागत आज अकेले हैं और अपने दुःखों से लड़ रहे हैं.
अपनी नौकरी वापस पाने के लिए अब वो क़ानून का सहारा लेना चाहते हैं. इसके लिए वो ख़ुद क़ानून की पढ़ाई कर रहे हैं. उन्होंने इसके लिए एक तरीका ढूंढा है- 'वर्चुअल ट्रांसफ़र' का. इसी के आधार पर अब वो दिल्ली हाई कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं.
तथागत अवतार तुलसी को 31 जुलाई, 2019 को आईआईटी बॉम्बे ने नौकरी से निकाल दिया. इससे पहले 18 अगस्त, 2021 को भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उनकी अर्ज़ी नामंज़ूर कर दी थी.
तथागत ने मुंबई से अपना ट्रांसफ़र किसी और आईआईटी में कराने के लिए अर्ज़ी डाली थी. लेकिन देश के अलग-अलग आईआईटी के अंदर इस तरह से अंदरूनी तबादले का कोई नियम नहीं है.
तथागत अवतार तुलसी ने साल 2010 में आईआईटी बॉम्बे में फ़िज़िक्स के असिस्टेंट प्रोफ़ेसर के तौर पर नौकरी शुरू की थी. उन्हें अगस्त 2011 में तेज़ बुख़ार हुआ. उसके बाद उन्होंने डॉक्टर से संपर्क किया, लेकिन उनका सारा टेस्ट नॉर्मल आया.
तथागत के मुताबिक़, उन्हें मुंबई में समंदर के किनारे हवा में सांस लेने में लगातार परेशानी होने लगी और शरीर के जोड़ों में दर्द रहने लगा.
तथागत ने सेहत की समस्या की वजह से आईआईटी से चार साल के लिए छुट्टी ले ली और दिसंबर 2013 में मुंबई शहर छोड़ दिया. उसके बाद पटना आकर तथागत ने अपनी रिसर्च जारी रखी और पेपर्स लिखते रहे.
दिसंबर 2017 में चार साल ख़त्म होने के बाद भी तथागत मुंबई नहीं जा सके. उन्होंने अपनी एलर्जी को इसकी वजह बताया.
उसके बाद, ग़ैर-हाज़िर रहने की वजह से आईआईटी बॉम्बे में उनके ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू हो गई. आख़िरकार, 2019 में आईआईटी बॉम्बे ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए तथागत को नौकरी से निकाल दिया.
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- नाम: तथागत अवतार तुलसी
- जन्म: पटना(बिहार)
- उम्र: 35 साल
- कीर्तिमान: 9 साल की उम्र में मैट्रिक पास
- 12 साल की उम्र में एमएससी पास
- दो बार गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज
- साल 1997 का राष्ट्रीय बाल पुरस्कार
- 21 साल की उम्र में मिली पीएचडी की डिग्री
- 22 की उम्र में बने आईआईटी बॉम्बे में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर
- वर्तमान में: बेरोज़गार

सेहत की वजह से बदल गई ज़िंदगी
तथागत अवतार तुलसी के मामले को समझने के लिए हमने इंडियन इस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) के एक पूर्व निदेशक से बात की.
नाम न छापने की शर्त पर उन्होंने बताया कि किसी शिक्षक को छुट्टी देने के कई आधार होते हैं. यह मूल रूप से निदेशक के विवेक और आईआईटी के बोर्ड पर निर्भर करता है.
वे कहते हैं, "कई बार शिक्षक अपनी छुट्टी का दुरुपयोग भी कर सकते हैं. ऐसी स्थिति में शिक्षक के ख़िलाफ़ एक्शन भी लिया जा सकता है. शिक्षक को अपनी छुट्टी के समर्थन में ज़रूरी दस्तावेज़ देने होते हैं. तथागत के पास अपनी बीमारी से जुड़ा कोई मेडिकल सर्टिफ़िकेट नहीं था. इसलिए आईआईटी बॉम्बे की तरफ़ से उन्हें लंबे समय तक मदद नहीं मिल सकी."
दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर मोहसीन वली कहते हैं, "समंदर की हवा से एलर्जी हो, ऐसा कहीं मेडिकल की किताब में नहीं लिखा है. उसमें कोई ज़हरीला धुआं हो सकता है या कहीं पास में कोई रिफ़ाइनरी हो सकती है या फिर हो सकता है कि मनोवैज्ञानिक वजहों से उनकी तबीयत बिगड़ी हो. कई बार कई लोगों को किसी जगह की क्लाइमेट सूट नहीं करती."
तथागत बताते हैं कि आईआईटी बॉम्बे के निदेशक ने उनकी बहुत मदद की, लेकिन वे नियमों से बंधे थे. इस तरह से छुट्टी ख़त्म होने के दो साल बाद आईआईटी बॉम्बे ने उन्हें नौकरी से हटा दिया.
उसके बाद, कोविड-19 का भी दौर आया जिसने हर किसी को प्रभावित किया. हालांकि आईआईटी से निकाले जाने के बाद तथागत ने देश के कई आईआईटी में नौकरी की कोशिश की, लेकिन इसमें उनको सफलता नहीं मिली.
तथागत ने कई विदेशी संस्थानों में नौकरी और रिसर्च के लिए भी आवेदन भेजा, लेकिन हर जगह से उन्हें निराशा ही हाथ लगी. हालांकि कुछ जगहों से पहले उन्हें ऑफ़र मिले थे. तथागत के मुताबिक़, सेहत की वजह से उनके करियर में एक बड़ा ब्रेक लग गया.
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बचपन से ही मिली सुर्ख़ियां
तथागत अवतार तुलसी का जन्म बिहार की राजधानी पटना में 9 सितंबर, 1987 को हुआ था. इनका परिवार मूल रूप से बिहार के गया ज़िले से ताल्लुक रखता है.
बुद्ध की धरती से रिश्ता होने की वजह से तथागत को यह नाम मिला. महज़ पांच साल की उम्र में ही तथागत गणित के बड़े-बड़े समीकरण पलक झपकते ही हल कर देते थे.
अपनी इस क़ाबिलियत की वजह से तथागत पहली बार चर्चा में तब आए, जब मई 1994 में हिन्दी अख़बार 'जनसत्ता' ने उन पर एक ख़बर छापी. इसमें तथागत के बारे में बताया गया था कि कैसे वो कम उम्र में ही गणित के मुश्किल सवालों को हल कर देते थे.
इस ख़बर के बाद बाद, 3 जून को बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने तथागत को खाने पर बुलाया. लालू ने उन्हें कुछ नकद प्रोत्साहन राशि और एक कंप्यूटर देने का वादा दिया जो बाद में उन्हें मिला भी.
सुर्ख़ियों में आने के बाद तथागत को एक एनजीओ ने आर्थिक मदद दी और दिल्ली बुला लिया. यहां उन्हें एक निजी स्कूल में दाख़िला मिल गया.
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पहली बार गिनीज़ बुक में नाम
तथागत ने महज़ 9 साल की उम्र में मैट्रिक की परीक्षा पास कर विश्व कीर्तिमान बनाया. इसके लिए उनका नाम गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया.
हालांकि उनका यह सफ़र आसान नहीं था. 14 साल से कम की उम्र में मैट्रिक की परीक्षा देने के लिए उन्हें लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी.
तथागत उस वक्त दिल्ली के सीबीएसई बोर्ड के एक स्कूल में पढ़ रहे थे. स्कूल की तरफ़ से 14 साल से कम उम्र में उन्हें मैट्रिक की परीक्षा देने के लिए अनुमति मांगी गई थी. लेकिन इसे नामंज़ूर कर दिया गया.
उसके बाद, 1996 में तथागत अवतार तुलसी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से मुलाक़ात की. तथागत के मुताबिक़, वाजपेयी के सहायक सचिव टीएन माकन ने भी कैलकुलेटर लेकर आधे घंटे तक उनकी जांच की और हैरान हो गए.
तथागत के मुताबिक़, प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें केवल इतना कहा कि 'देखते हैं हम इसमें क्या कर सकते हैं'.
उसके कुछ महीने बाद 5 नवंबर, 1996 को दिल्ली के तत्कालीन लेफ़्टिनेंट गवर्नर पीके दवे ने तथागत के पक्ष में आदेश सुनाया. साथ ही मानव संसाधन विकास मंत्री एसआर बोम्मई ने अपने विशेष अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए तथागत अवतार तुलसी को केवल नौ साल की उम्र में मैट्रिक परीक्षा देने की छूट दे दी.
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लेकिन जब सीबीएसई ने इसे मानने से इंकार कर दिया तो तथागत अवतार तुलसी ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया. इसके लिए उन्होंने वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी से संपर्क किया.
राम जेठमलानी ने भी 17 साल की उम्र में एलएलबी की डिग्री हासिल की थी, जबकि उस वक़्त वकालत की प्रैक्टिस शुरू करने के लिए 21 साल की उम्र ज़रूरी थी.
जेठमलानी ने तथागत के मामले में रुचि ली और उन्हें मदद करने का भरोसा दिया. जेठमलानी ने उन्हें उस समय के जाने-माने वकील मुकुल रोहतगी से मुलाक़ात कराई. बाद में मुकुल रोहतगी ने ही सीबीएसई के ख़िलाफ़ तथागत का केस दिल्ली हाईकोर्ट में लड़ा.
दिल्ली हाईकोर्ट ने तथागत अवतार तुलसी को नौ साल की उम्र में मैट्रिक परीक्षा देने की छूट दे दी और फिर 30 मई, 1997 को सभी बच्चों के साथ तथागत का रिज़ल्ट भी जारी करने का आदेश दिया. बिहार बोर्ड ने वो रिज़ल्ट 3 जून, 1997 को जारी किया.
इस उपलब्धि पर तथागत अवतार तुलसी का नाम पहली बार 'गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' में दर्ज किया गया.
इस रिकॉर्ड के बाद, भारत के सरकारी चैनल दूरदर्शन ने आज़ादी के 50 साल पूरा होने के मौक़े पर बनाए गए अपने गीत 'विजयी विश्व तिरंगा प्यारा' में भी तथागत को शामिल किया.

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12 साल में एमएससी करने का विश्व रिकॉर्ड
तथागत को 9 साल की उम्र में मैट्रिक परीक्षा देने के दिल्ली हाईकोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ सीबीएसई ने सुप्रीम कोर्ट में एक विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) भी दाख़िल की. इस बीच, तथागत ने वापस बिहार आकर पटना यूनिवर्सिटी के साइंस कॉलेज में इंटरमीडिएट में दाख़िला ले लिया.
उसके बाद, तथागत ने 6 सितंबर, 1997 को बिहार के तत्कालीन राज्यपाल और पटना यूनिवर्सिटी के चांसलर एआर किदवई से मुलाक़ात की. उन्होंने उनसे बिना इंटर की परीक्षा दिए ग्रेजुएशन करने की छूट देने की मांग की.
फिर पटना यूनिवर्सिटी के एकेडमिक काउंसिल ने तथागत का इंटरव्यू लिया और 26 फ़रवरी, 1998 को इंटरमीडिएट की परीक्षा पास किए बिना ग्रेजुएशन करने की मंज़ूरी उन्हें मिल गई.
लेकिन उस वक्त भी ग्रेजुएशन के तीनों सालों की परीक्षा एक साथ देने के लिए वे पटना हाईकोर्ट पहुंच गए. कोर्ट ने 1 अप्रैल, 1998 को एक साथ ग्रेजुएशन के तीनों साल की परीक्षा देने का आदेश दे दिया.
इस तरह, साल 1998 में ही 11 साल की उम्र में तथागत ने ग्रेजुएशन की डिग्री पूरी कर ली. तुलसी ने 68.5 फीसदी अंक के साथ फ़ीज़िक्स ऑनर्स की परीक्षा पास कर ली.
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तथागत का दावा है कि लिखने की रफ़्तार कम होने की वजह से उन्हें अच्छे अंक नहीं मिले.
वो कहते हैं, "अगर मुझे आधे घंटे का अतिरिक्त समय मिला होता तो कम से कम मैथ्स में मैं 100 फ़ीसदी अंक लाता."
इस बीच, 24 अप्रैल,1998 को सीबीएसई की एसएलपी (स्पेशल लीव पिटीशन) को सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज़ कर दिया. उधर तथागत ने 1 जनवरी, 1999 को पटना यूनिवर्सिटी में ही एमएससी में दाख़िला ले लिया.
उसके बाद, तथागत ने पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और तब बिहार के कार्यवाहक राज्यपाल रहे बीएम लाल से मुलाक़ात कर एमएससी के दोनों साल की परीक्षा एक ही साल में देने की अनुमति मांगी.
इसके लिए दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) के फ़िज़िक्स के प्रोफ़ेसरों की एक टीम ने 20 मई, 1999 को तथागत अवतार तुलसी का इंटरव्यू लिया. उनकी अनुशंसा के बाद तथागत को यह छूट मिल गई.
तथागत ने 28 नवंबर, 1999 को 70 फ़ीसदी से ज़्यादा अंकों के साथ एमएससी की परीक्षा पास कर ली. उस समय उनकी उम्र महज़ 12 साल थी. इस उपलब्धि के बाद उनका नाम एक बार फिर से 'गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' में शामिल किया गया.
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इंडियन इन्स्टीट्यूट ऑफ़ साइंस से की पीएचडी
उसके बाद तथागत ने नेट की परीक्षा देनी चाही, लेकिन उस वक़्त इसके लिए न्यूनतम उम्र 19 साल थी. इस परीक्षा में शामिल होने से पहले तथागत का एक बार फिर से टेस्ट लिया गया.
इस बार 12 जनवरी, 2000 को तथागत का टेस्ट 'नेशनल फ़िज़िकल लेबोरेट्री (NPL)' के भौतिकी विशेषज्ञों ने लिया. उन्हीं की अनुशंसा पर तत्कालीन केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री मुरली मनोहर जोशी ने महज़ 12 साल की उम्र में तथागत को नेट परीक्षा देने की छूट दिला दी.
अगस्त 2001 में तुलसी को भारत सरकार ने जर्मनी भी भेजा. जर्मनी में नोबेल पुरस्कार विजेताओं के एक सम्मेलन में भारत ने पहली बार अपने युवा वैज्ञानिकों को भेजा था.
साल 2002 में तथागत ने बेंगलुरू के इंडियन इन्स्टीट्यूट ऑफ़ साइंस (IISc) में दाख़िला लिया. यहां से उन्होंने टेक्निकल क्वांटम कम्प्यूटिंग में रिसर्च शुरू किया.
IISc से पीएचडी करने के दौरान ही मशहूर वैज्ञानिक लव ग्रोवर के न्योते पर तथागत 17 साल की उम्र में अमेरिका गए. वहां उन्होंने 'बेल लैब्स' में काम किया.
20 साल की उम्र में तथागत ने अपना रिसर्च पेपर लिखा जो अमेरिका के फ़िज़िकल रिव्यू में छपा. उनका रिसर्च 'फ़ास्टर क्वांटम-वॉक अल्गोरिद्म फ़ॉर द टू डायमेंशनल स्पेशियल सर्च' पर था.
इस पर अब तक 113 साइटेशन आ चुके हैं. तथागत के मुताबिक़, इस रिसर्च के क्षेत्र में औसतन 10 साइटेशन ही मिलते हैं.
साल 2009 के अगस्त में तथागत अवतार तुलसी को पीएचडी की डिग्री भी मिल गई. उसके बाद उन्हें कनाडा के 'यूनिवर्सिटी ऑफ़ वाटरलू' से पोस्ट डॉक्टोरल फ़ेलो का भी ऑफ़र मिला.
लेकिन रिसर्च के लिए बेहतर सुविधाएँ और ज़्यादा समय पाने के लिए उन्होंने 19 जुलाई, 2010 में आईआईटी बॉम्बे में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर के तौर पर नौकरी जॉइन कर ली. उस समय उनकी उम्र महज़ 22 साल थी.
मई 2012 में गुजरात के सूरत में बिहार शताब्दी महोत्सव मनाया गया. उस समय तथागत को गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री और अब देश के प्रधानमंत्री बन चुके नरेंद्र मोदी ने भी सम्मानित किया था.
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बनाना चाहते हैं क्वांटम कम्प्यूटर
तथागत अवतार तुलसी अब ख़ुद क़ानून की पढ़ाई कर रहे हैं ताकि वो ख़ुद को नौकरी से हटाए जाने को कोर्ट में चुनौती दे सकें.
क़ानून की किताबें पढ़ने के बाद उन्होंने इसका एक तरीका निकाला है, 'वर्चुअल ट्रांसफ़र' का, यानी किसी भी जगह पर रहकर छात्रों को ऑनलाइन पढ़ाने का.
तथागत का मानना है कि वो आईआईटी दिल्ली जैसी अच्छी सुविधा वाले संस्थान से बच्चों को पढ़ा सकते हैं और वहीं पर अपना रिसर्च भी आगे बढ़ा सकते हैं.
उनका कहना है, "आईआईटी में आपको रिसर्च के लिए ज़्यादा समय मिल पाता है, बाक़ी जगहों पर बच्चों को पढ़ाने में ज़्यादा समय देना होता है. इसके अलावा वहां सुविधाएं भी ज़्यादा बेहतर हैं."
तथागत के मुताबिक़, उन्होंने बचपन से ही रिसर्च का सपना देखा है.
वो कहते हैं, "मैं एक क्वांटम कम्प्यूटर बनाना चाहता हूं. अगर मैं इसमें सफल रहा तो इससे बहुत सारी समस्या हल हो सकती है, जिसकी दुनिया को ज़रूरत है. इसकी कारोबार, रक्षा क्षेत्र और वैज्ञानिक शोध में बहुत उपयोगिता होगी."

आम भाषा में समझें तो किसी भी काम को ऑप्टिमाइज़ करने यानी किसी बड़े काम को कम ख़र्च में और कम समय में आसानी से पूरा करने में क्वांटम कम्प्यूटर मदद कर सकता है.
तथागत अवतार तुलसी इसके लिए भारत में 'कोविड टीकाकरण अभियान' का उदाहरण देते हैं. उनका मानना है कि अगर क्वांटम कम्प्यूटर होता, तो उसकी मदद से यह काम काफ़ी कम ख़र्च में हो सकता था.
तथागत के पिता एक निजी संगठन में नौकरी करते थे जो अब रिटायर हो चुके हैं. सरकारी स्कूल में शिक्षिका रही उनकी मां भी अब रिटायर हो चुकी हैं.
तथागत आजकल आईआईटी पटना (बिहटा) में नौकरी कर रहे अपने भाई के साथ ज़्यादा रहते हैं. कभी-कभी वो पटना अपने माता-पिता के पास भी आते हैं.
हैरानी की बात यह है कि कभी फ़िज़िक्स के प्रोफ़ेसर रहे तथागत आजकल क़ानून की किताबें पढ़ रहे हैं ताकि अपनी ज़िंदगी को अदालत के सहारे एक बार फिर से पटरी पर ला सकें.
उनका सपना है कि जिस फ़िज़िक्स के लिए उन्होंने अपना बचपन खो दिया, उस फ़िज़िक्स के क्षेत्र में कुछ हासिल कर सकें.
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