BBC Hindi: बीते हफ़्ते की वो ख़बरें जो शायद आप मिस कर गए

नमस्ते, उम्मीद है कि आप अच्छे होंगे और सकारत्मकता से भरे होंगे.

हमें मालूम है कि घर का काम, बाहर का काम करते हुए आपको ख़बरों पर नजर रखने का वक्त नहीं मिला होगा.

इस वजह से आप देश दुनिया की अहम ख़बरों को देख या पढ़ नहीं पाए होंगे.

इसी के चलते हम लाए हैं आपके लिए कुछ अहम ख़बरें. शायद इन ख़बरों में से कुछ पर आपकी नज़र नहीं गई होगी.

अगर आपने ये पांच ख़बरें पढ़ लीं तो समझिए कि आपको बीते हफ़्ते की ख़ास खबरें पता चल गईं.

वियतनाम युद्ध में इन सात कारणों से हुई थी अमेरिका की करारी हार

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका निर्विवाद रूप से दुनिया की सबसे प्रमुख आर्थिक ताक़त बन गया था और अपनी सेना को भी उतना ही ताक़तवर मानने लगा था.

फिर भी क़रीब आठ साल की लड़ाई में अकूत धन और सैन्य संसाधन झोंकने के बावजूद अमेरिका को उत्तरी वियतनाम की सेना और उनके गुरिल्ला सहयोगियों, वियतकांग, से मुंह की खानी पड़ी.

इस दौर में शीत युद्ध चरम पर था और साम्यवादी और पूंजीवादी विश्व शक्तियाँ एक-दूसरे के ख़िलाफ़ आमने-सामने थीं.

दुनिया के दूसरे छोर पर युद्ध लड़ना निश्चित तौर पर एक बहुत बड़ी कार्य योजना थी. युद्ध के चरम पर अमेरिका के वियतनाम में 5 लाख से ज़्यादा सैनिक थे.

इस युद्ध का ख़र्च हैरतअंगेज़ था. 2008 में अमेरिकी कांग्रेस की एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया था कि युद्ध पर कुल 686 अरब डॉलर खर्च हुआ था, जो आज के वक़्त 950 अरब डॉलर से ज़्यादा है. लेकिन इससे पहले अमेरिका ने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान इससे चार गुना से ज़्यादा खर्च किया और जीता.

उसने इससे ठीक पहले कोरिया जैसे दूरस्थ देश में लड़ाई की थी, इसलिए उसके आत्मविश्वास में कोई कमी नहीं थी. पढ़िए इस युद्ध में आगे क्या हुआ और अमेरिका को क्यों मिली करारी हार. पूरी स्टोरी यहां पढ़ें...

राजस्थान में 'राइट टू हेल्थ' बिल पर क्यों मचा है बवाल?

कोरोना काल में सड़कों पर सन्नाटा पसरा हुआ था. अस्पतालों में मरीज़ों की क़तारें थीं. डॉक्टर चौबीस घंटे मरीज़ों के इलाज में जुटे हुए थे. लेकिन अब राजस्थान की सड़कों पर आम दिनों की तरह वाहनों की क़तारें हैं. निजी अस्पतालों पर ताला है और डॉक्टर सड़कों पर उतर आए हैं.

राजस्थान विधानसभा में 21 मार्च को पास हुए 'राइट टू हेल्थ' बिल को लेकर डॉक्टर्स का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है.

राज्य में बुधवार को सभी निजी और सरकारी डॉक्टर्स एसोसिएशन ने एक दिन की हड़ताल बुलाई. राज्य के अधिकतर निजी अस्पताल बिल पेश होने के बाद से ही पूरी तरह बंद हैं.

राइट टू हेल्थ' बिल को लेकर राज्य सरकार और डॉक्टर्स के बीच मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, चिकित्सा मंत्री समेत कई स्तरों पर मीटिंग हुई है, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकाला जा सका है.

हालांकि, डॉक्टर्स अब बिल में बदलाव की जगह बिल ही वापस लेने की मांग कर रहे हैं. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के मीडिया चेयरमैन डॉ संजय गुप्ता ने बीबीसी से कहा, ''यह बिल डॉक्टर्स के ख़िलाफ़ है. बिल वापसी से पहले हड़ताल ख़त्म नहीं होगी. सरकार डॉक्टर्स के कान पर बंदूक लगा कर काम करवाना चाहती है, जो संभव नहीं है."

राजस्थान भारत का पहला राज्य है जहां 'राइट टू हेल्थ' यानी कि स्वास्थ्य का अधिकार अधिनियम विधानसभा में पारित हुआ है.

'राइट टू हेल्थ' बिल के ज़रिए आम नागरिक को स्वास्थ्य का अधिकार देने का प्रयास है. पढ़िए यह बिल क्या है और क्यों इसका विरोध हो रहा है. यहां पढ़ें.

IPL के बारे में इनमें से कितने सवालों के जवाब जानते हैं आप?

आईपीएल यानी इंडियन प्रीमियर लीग अपने 16वें साल में प्रवेश कर चुका है. 10 टीमों के क़रीब 243 क्रिकेटर आईपीएल की ट्रॉफ़ी हासिल करने के लिए 52 दिनों तक आपस में मुक़ाबला करेंगी.

बीते कुछ सालों में देखा गया है कि जब आईपीएल के मैच हो रहे होते हैं तो इससे जुड़ी ख़बरें न केवल मैदान में बल्कि टेलीविज़न, ओटीटी और सोशल मीडिया पर छाई रहती हैं.

आपको बता दें कि आईपीएल बीते कुछ वर्षों से भारत में गूगल पर सबसे अधिक सर्च किया जाने वाला कीवर्ड बन गया है.

वो हर चीज़ जो आईपीएल से जुड़ी है उसके बारे में लोग इंटरनेट पर केवल देखते पढ़ते हैं बल्कि बड़ी तादाद में उसे सर्च और शेयर भी किया जाता है.

गूगल पर आईपीएल के बारे में लोग क्या ढूंढते हैं हम उन कुछ सवालों और उनके जवाबों को आपके लिए यहां एक पन्ने पर ले कर आए हैं. पूरी स्टोरी पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.

रानी मुखर्जी की नई फ़िल्म 'मिसेज़ चैटर्जी वर्सेस नॉर्वे' पर नॉर्वे ने क्यों जताया विरोध?

भारत में 17 मार्च को रिलीज़ हुई फ़िल्म 'मिसेज़ चटर्जी वर्सेस नॉर्वे' को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है.

इस फ़िल्म के मुद्दे पर नॉर्वे और भारत के बीच एक किस्म का सांस्कृतिक टकराव पैदा हो गया है.

बॉलीवुड की इस फ़िल्म में जानी-मानी अदाकारा रानी मुखर्जी ने काम किया है. फ़िल्म क़रीब 12 साल पहले एक भारतीय दंपति के साथ नॉर्वे में हुई एक सच्ची घटना पर आधारित है.

भारत के लिए नार्वे के राजदूत हैन्स जैकब फ्रायडेन्लैंड ने बाकायदा अख़बार में लिखे अपने एक लेख में दावा किया है कि इस फ़िल्म में नॉर्वे से संबंधित कई तथ्यों में विसंगतियां हैं और उसमें दिखाई गई चीज़ें पूरी तरह झूठ हैं.

17 मार्च को किए गए इस ट्वीट को उन्होंने अपने ट्विटर प्रोफ़ाइल में सबसे ऊपर पिन किया है. वहीं सागरिका चक्रवर्ती जिनके जीवन की एक घटना के आधार पर 'मिसेज़ चटर्जी वर्सेस नार्वे' फ़िल्म बनी है, उनका दावा है कि नॉर्वे सरकार सच नहीं बता रही और आज तक इस घटना को लेकर झूठी अफ़वाह फैला रही है. यहां पढ़िए क्या है पूरा मामला

पाकिस्तानी फल और मसाले इसराइल के बाज़ार में कैसे पहुंचे?

"इसराइल के बाज़ार में पाकिस्तानी फल, खजूर और मसाले."

पाकिस्तानी नागरिक फिशेल बेन ख़ालिद ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो के साथ जब ये दावा किया तो पाकिस्तानियों के लिए ये हैरान करने वाली बात थी.

ख़ालिद के अनुसार, वो पाकिस्तान के एक यहूदी हैं और इसराइल के साथ पाकिस्तान के संबंधों की वकालत करते हैं.

हालाँकि, पाकिस्तान इसराइल को मान्यता नहीं देता है और वहाँ के पासपोर्ट पर लिखा है कि यह इसराइल को छोड़कर दुनिया के सभी देशों के लिए मान्य है.

हालांकि, ख़ालिद इसराइल का दौरा कर चुके हैं और ऐसा करने वाले वह अकेले पाकिस्तानी नहीं हैं. यहां पढ़िए क्या है पूरा मामला.

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