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घर की वो चार चीज़ें जिन्हें साफ़ नहीं रखा तो बढ़ेगा बीमारी का ख़तरा
हमारे घर आमतौर पर किसी दूसरे घर से अलग होते हैं, बनावट से लेकर कई चीज़ों में, लेकिन सफाई हर घर की प्राथमिकता होती है.
कुछ लोग हर दिन घर साफ़ करते हैं. कुछ लोग हर हफ़्ते, इसमें से रोज़ाना सफाई से इतर कुछ लोग छह महीने में या साल भर में एक बार पूरे घर की सफाई करते है.
अमेरिका के नेशनल क्लीनिंग इंस्टीट्यूट द्वारा किए गए एक सर्वे के मुताबिक़ 70% घरों में जहां लोग रहते हैं वहां सफाई की जाती है.
कम से कम साल भर में घर के भीतरी हिस्से में सफ़ाई की जाती है.
कई लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण जगह किचन यानी रसोईघर है और कुछ लोगों के लिए बाथरूम.
ओवन, शौचालय, मैट, ऐसी चीजें हैं, जहां हमें गंदगी और कीटाणु होने की सबसे ज़्यादा आशंका होती है. इसकी वजह ये है कि यहां रोगाणु, कवक, बैक्टीरिया और घुन जमा होते हैं.
अब बात घर की उन चार चीज़ों की जिन्हें शायद आप साफ़ नहीं करते लेकिन आपको इन चीजों की सफ़ाई ज़रूर करनी चाहिए.
1. कॉफ़ी मेकर
अमेरिका की ऑर्गनाइजेशन फ़ॉर पब्लिक हेल्थ एंड सेफ्टी (NSF) के शोध से जानकारी मिली है कि किचन में सबसे ज़्यादा कीटाणु वाले सामानों में से एक है कॉफ़ी मेकर.
शोधकर्ताओं को कॉफ़ी के बर्तन के अंदर 67 अलग-अलग प्रकार के कीटाणु मिले.
सच ये है कि कॉफी बनाने की प्रक्रिया में दो समस्याएं आती हैं. एक तो ये कि गर्म पानी सभी कीटाणुओं को दूर नहीं कर सकता और कैफ़ीन बैक्टीरिया के पनपने के लिए सबसे मुफ़ीद है.
इसके अलावा पूरी प्रक्रिया के दौरान खनिज़ जमा होता है जो मशीन के रख रखाव में दिक्कतें खड़ी कर देता है.
इसी वजह से विशेषज्ञ कम से कम तीन महीने में एक बार कॉफ़ी मेकर की सफाई की सलाह देते हैं.
2. गद्दा
मैट्रेस यानी गद्दे को साफ करना आसान नहीं होता.
लेकिन कुछ तथ्य हैं जिन पर गौर करना ज़रूरी है. इंसानी शरीर हर दिन 1.5 ग्राम मृत त्वचा पैदा करता है जो ज़्यादातर आपके गद्दे के ऊपर मौज़ूद रहती है.
2018 में प्रकाशित रॉयल सोसाइटी ओपन साइंस जर्नल में गद्दों की साफ-सफाई से जुड़े अध्ययन के नतीजे छापे गए. अध्ययन में चिंपैंजी से तुलना की गई.
इस अध्ययन में ये बात सामने आई कि बंदरों की प्रजाति की तुलना में इंसान 30 प्रतिशत ज़्यादा गद्दे गंदा करते हैं.
गद्दे में मृत त्वचा(डेड सेल्स/स्कीन), धूल और पसीना इकट्ठा होते हैं. ये माइट्स और बैक्टीरिया के पनपने के लिए सबसे अच्छी जगह होती है.
विशेषज्ञ बताते हैं कि हाल के सालों में गद्दों की सफाई के नए तरीके विकसित किए गए हैं.
गद्दे में नमी और वैक्यूमिंग की वजह से पैदा होने वाली फफूंदी को कम करने के लिए इसे धूप में रखने की सलाह दी जाती है.
3. रिसाइकिल्ड शॉपिंग बैग
जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए 'सिंगल यूज प्लास्टिक' हटाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है.
कई घरों में प्लास्टिक की थैलियों की खपत कम करने के लिए बार-बार इस्तेमाल हो सकने वाले प्लास्टिक का प्रयोग किया जाने लगा है.
यूनिवर्सिटी ऑफ एरिज़ोना के माइक्रोबायोलॉजिस्ट चार्ल्स पी. गेरबा के हवाले से एएआरपी न्यूज पोर्टल ने बताया, " उन बैगों में हमारे अंडरवियर की तुलना में ई.कोली जैसे बैक्टीरिया और मल पदार्थ के ज़्यादा निशान हैं."
"यदि आप कच्चे मांस और कच्ची सब्जियों को ले जाने के लिए एक ही बैग का उपयोग करते हैं तो आप बहुत आसानी से साल्मोनेला बैक्टिरिया से संक्रमित हो सकते हैं.
अमेरिका के नेशनल क्लीनिंग इंस्टीट्यूट के कर्मचारी इन बैग को सप्ताह में कम से कम एक बार धोने की सलाह देते है. लेकिन वॉशिंग मशीन में धोने से बैग को नुक़सान हो सकता है.
4. डिशवॉशिंग स्पंज
किचन में बर्तन साफ करने के लिए हम स्पंज का इस्तेमाल ये सोचते हुए करते हैं कि इससे जटिल से जटिल सफाई की जा सकती है.
हम ये मान लेते हैं कि उसमें साबुन लगाने से वहां कीटाणुओं के पनपने की संभावना नहीं है.
लेकिन जर्मनी की फर्टवांगेन यूनिवर्सिटी का एक अध्ययन बताता है कि सिंक की तुलना में डिशवॉशिंग स्पंज में इंसानों के लिए ख़तरनाक कीटाणुओं और जीवाणुओं की संख्या ज़्यादा हो सकती है.
अध्ययन के मुताबिक़ किचन के स्पंज में लगभग 362 अलग-अलग जीवाणु पाए गए. उनका विश्लेषण किया गया. स्पंज पर इन जीवाणुओं की संख्या बाथरूम में मिले जीवाणुओं से ज़्यादा थी.
ऐसा इसलिए होता है क्योंकि स्पंज में लगातार नमी बनी रहती है और स्पंज के भीतर छोटे-छोटे छेद होते हैं जो कीटाणुओं के विकसित होने के लिए आदर्श जगह हैं.
विशेषज्ञों की सलाह है कि स्पंज में ख़तरनाक बैक्टीरिया के विकसित होने से बचने के लिए स्पंज को सप्ताह में कम से कम एक बार क्लोरीन या ब्लीच से धोना चाहिए.
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